आइएसआइएल-के का नया खतरा
India Today Hindi|September 22, 2021
भारतीय सुरक्षा एजेंसियां उन भारतीय नागरिकों की वापसी को लेकर चिंतित हो गई हैं जो आतंकवादी संगठनों में शामिल होने के लिए अफगानिस्तान चले गए थे
जीमॉन जैकब

अफगानिस्तान स्थित आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट-ऑफ इराक ऐंड लेवांतखुरासान प्रोविंस (आइएसआइएल-के) के पांच सदस्यों ने, जो 2016 में केरल से गए थे, अपने परिवारों से संपर्क करके कहा है कि वे घर वापस आना चाहते हैं. 30 अगस्त को आए आखिरी संदेश में उन्होंने कहा कि हालात खराब हैं, खाने की आपूर्ति सीमित है और आइएसआइएल-के का केरल धड़ा बिखरा हुआ है.

यह गैरमामूली घटना है क्योंकि मई और अगस्त 2016 के बीच केरल से अफगानिस्तान गए 36 में से ज्यादातर लोगों को मृत मान लिया गया था (अनुमान है कि ये पांचों उसी सेल का हिस्सा हैं). केंद्रीय खुफिया सूत्रों का कहना है कि जिन्हें अब भी जिंदा माना जाता है, उनमें मूलतः कारसगोड जिले का रहने वाला मोहम्मद साजिद, जो 2016 में गायब होने से पहले इस्लामिक बैंक, शारजाह में काम करता था; कारसगोड का ही रहने वाला 34 वर्षीय शिहास अब्दुल रहमान, जो कोझिकोड के पीस फाउंडेशन में काम करता था; और कोझिकोड का 31 वर्षीय रियास अहमद, जो 2015 में आइएसआइएल-के से जुड़ने से पहले सऊदी अरब में कार्यरत था.

तालिबान का एक कट्टर धड़ा 2014 में अलग होकर आइएसआइएल-के बना. सीरिया और इराक स्थित आतंकी संगठन के प्रति वफादारी की कसमें खाते हुए उन्होंने अफगानिस्तान में एक के बाद एक आत्मघाती हमलों को अंजाम दिया. संगठन ने 2020 में काबुल के गुरुद्वारे पर हुए हमले की जिम्मेदारी ली थी, जिसमें 25 लोग मारे गए थे (आत्मघाती हमलावरों में एक केरल का मोहम्मद मोहसिन था). उसने 27 अगस्त को काबुल अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर हुए ताजा हमले की जिम्मेदारी भी ली, जिसमें 13 अमेरिकी सैनिकों के अलावा रिपोर्टों के मुताबिक 169 अफगान नागरिक और 28 तालिबान लड़ाके भी मारे गए थे. रहस्यमयी अबू बकर अल बगदादी की अगुआई में आइएसआइएल ने अपने अच्छे दिनों में अफ्रीका और एशिया में 'फ्रेंचाइज' बनाई थीं, जिनमें आइएसआइएल-के सबसे प्रमुख था.

सुरक्षा एजेंसियों को आशंका है कि आएसआइएल-के के केरल वाले लड़ाके वापस आकर भारत में आतंकी हमले कर सकते हैं. इसी वजह से पिछले महीने के अंत में एयरपोर्ट, सीपोर्ट और जमीनी क्रॉसिंग पर अलर्ट जारी किया गया ताकि अफगानिस्तान से लौटने की फिराक में जुटे आइएसआइएल-के के 25 आतंकियों पर नजर रखी जा सके. ये अलर्ट तालिबान के सत्ता संभालने के बाद जारी किया गया. काबुल में घुसने के दो दिन बाद 17 अगस्त को तालिबान ने अल कायदा और आइएसआइएल-के के लड़ाकों समेत हजारों कैदियों को राजधानी के पुल-ए-चरखी जेल से छोड़ दिया.

आतंक से जुड़े मामलों की जांच करने वाले राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआइए) आइएसआइएल-के में शामिल होने वाले भारतीय रंगरूटों के कई मामलों की जांच कर रही है. इसने 1 अप्रैल, 2020 को एक मामला दर्ज किया, जो मार्च 2020 में काबुल के गुरुद्वारे पर हुए हमले से जुड़ा था. हमले में आइएसआइएल-के के तीन आतंकवादी अफगान राजधानी के गुरुद्वारा हर राय साहिब में दनदनाते घुस गए थे. आइएसआइएल ने सोशल मीडिया पर ऐलान किया कि हमला अबू खालिद अल-हिंदी (मूलतः कारसगोड के रहने वाले मोहसिन) की अगुआई में 'कश्मीर में मुसलमानों के खिलाफ अत्याचारों का बदला लेने के लिए किया गया. हमले के दौरान अफगान सुरक्षा बलों ने उसे मार डाला.

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