मोदी सरकार का विराट कायापलट
India Today Hindi|July 21, 2021
काम करने वालों को पुरस्कृत करने और वादे पूरे करने की गरज से नई प्रतिभाएं लाने के लिए मंत्रिमंडल में भारी बदलाव किया गया. इसका एक मकसद चुनाव के लिहाज से महत्वपूर्ण साझा हित समूहों को नुमाइंदगी देना और अगली पीढ़ी का नेतृत्व विकसित करना भी था
राज चेंगप्पा और अनिलेश एस. महाजन

प्रधानमंत्री के तौर पर अपने सात सालों में नरेंद्र मोदी उतने लाचार कभी दिखाई नहीं दिए जितने इस मई में कोविड-19 की दूसरी लहर के शिखर पर होने के वक्त दिखाई दिए. महामारी ने इतनी प्रचंडता से धावा बोला कि उनकी सरकार सुस्ताती और ऊंघती पकड़ी गई. जब लाशों के अंबार बढ़ने लगे और मेडिकल ऑक्सीजन की आपराधिक कमी से हालात और पेचीदा हो गए तो मोदी और उनकी सरकार की साख को गहरा बट्टा लगा. राज्यों के एक के बाद एक लॉकडाउन के साथ अर्थव्यवस्था और गहरी मंदी में धंस गई. देश भर में लोग वाकई त्राहिमाम करने लगे. पश्चिम बंगाल विधानसभा की ऊंचे दांव वाली लड़ाई में भारतीय जनता पार्टी की शर्मनाक हार ने इस धारणा को मजबूत किया कि मोदी सरकार की ताकत चुक रही है. वह भी तब जब महज दो साल पहले मोदी ने संसद में एक के बाद एक पूर्ण बहुमत के साथ दूसरा ऐतिहासिक कार्यकाल जीता था और अपराजेयता का अपना आभामंडल पुख्ता और मजबूत कर लिया था. देखते ही देखते हालात बदले और बदतर हो गए.

मोदी ने ताड़ लिया कि अभी नहीं तो कभी नहीं. उन्होंने वही किया जो वे सबसे अच्छा करते हैं मुश्किल को मौके में बदलना. उन्होंने ढरे के मंत्रिमंडल विस्तार को टीम मोदी के जबरदस्त कायापलट में बदल दिया और यह इस तरह किया कि कई बड़ी जरूरतें भी पूरी कर ली. पहली यह कि देश के आमूलचूल बदलाव की खातिर दूसरी पीढ़ी के आर्थिक सुधार शुरू करने के बाद उनकी सरकार के लिए यह बेहद अहम था कि हालात पर पकड़ पूरी तरह खोने से पहले वह अपने मनसूबों को अंजाम दे और वादे पूरे करे. इसका मतलब था कि गैरजरूरी झाड़-झंखाड़ को काटे-छांटे और मंत्रिमंडल का कायापलट करे ताकि ऐसी नई ऊर्जा और गतिशीलता ला सके जो भीषण चुनौतियों से निपटने में सरकार की मदद करे.

लिहाजा अपने बाकी साथियों को संदेश देते हुए कि सारा दारोमदार उनके काम और नतीजों पर टिका है, उन्होंने विस्तार से पहले अपने सात दिग्गज मंत्रियों पर गाज गिराते हुए उन्हें इस्तीफा देने को कह दिया. इनमें दो बेहद अहम मंत्रालय संभाल रहे मंत्री भी थे स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन और शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल. दोनों को अपने-अपने मंत्रालय के समक्ष मौजूद चुनौतियों से कारगर ढंग से निपटने में असमर्थ माना गया. मोदी गंभीर और दृढ़संकल्प हैं, यह उन्होंने दो हाइ-प्रोफाइल मंत्रियों प्रकाश जावडेकर और रविशंकर

प्रसाद को हटाकर जाहिर कर दिया. दोनों के पास कई अहम मंत्रालय थे. जाहिर तौर पर तो उन्होंने इस्तीफे इसलिए दिए कि उन्हें पार्टी के काम में लगाया जा सके, लेकिन नई प्रतिभाओं की जरूरत साफ थी. दूसरों को उनके किंचित ढीले-ढाले कामकाज या बढ़ती उम्र की वजह से इस्तीफा देने को कहा गया. इनमें रसायन और उर्वरक मंत्रालय संभाल रहे डी.वी. सदानंद गौड़ा, सामाजिक न्याय मंत्रालय संभाल रहे थावरचंद गहलोत और श्रम तथा रोजगार मंत्रालय देख रहे संतोष गंगवार थे.

बेशक सभी मंत्री मोदी की छाया में काम करेंगे लेकिन यह महत्वपूर्ण है कि वे अपने काम के बारे में अधिक स्पष्ट और मुखर हों. बदलाव की मोदी की यह बड़ी कवायद अपना उद्देश्य तभी पा सकेगी जब प्रत्येक अपने मंत्रालय का चैंपियन बनेगा

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