भारत की एटमी शार्क
India Today Hindi|April 28, 2021
भारत की पनडुब्बी ताकत को पैना करने में काफी लंबा वक्त लग गया और एक बहुप्रतीक्षित परियोजना को अब जाकर कैबिनेट की सुरक्षा समिति की मंजूरी मिलने वाली है. एटमी क्षमता वाली हमलावर पनडुब्बी परियोजना में इतनी देरी क्यों हुई
संदीप उन्नीथन

भारत के नौसेना प्रमुख एडमिरल करमबीर सिंह ने इस साल 4 मार्च को गुजरात के केवड़िया में हुए कमांडरों के संयुक्त सम्मेलन में एक पावरपॉइंट प्रजेटेंशन दिया, जिसे बनाने में कुछ महीने लगे थे. 96,000 करोड़ रुपए की लागत से एटमी शक्तिसंपन्न छह हमलावर पनडुब्बियां (एसएसएन) देश में ही बनाने का प्रस्ताव करीब 18 महीनों से मंत्रिमंडल की सुरक्षा समिति (सीसीएस) के पास अटका था, क्योंकि सरकारी अफसरों ने आर्थिक संकट के दौरान इन पनडुब्बियों की जरूरत पर सवाल उठा दिए थे. नौसेना प्रमुख ने प्रधानमंत्री पर जोर डाला और बताया कि समुद्र के भीतर भारत की लड़ाकू शक्ति का संकट दूर करने के लिए एसएसएन का जल्द निर्माण कितना जरूरी है. करीब 6,000 टन की हरेक पनडुब्बी पर 16,000 करोड़ रुपए खर्च आएगा. 1980 के दशक में हासिल भारत की पारंपरिक पनडुब्बियों के बेड़े का बड़ा हिस्सा 30 साल का सेवा काल खत्म करने के करीब है. उनकी एवजी पनडुब्बियों को अफसरशाही लेट-लतीफी की मार झेलनी पड़ी है.

समुद्र में शक्ति घट रही है जब भारत के मुख्य शत्रु चीन ने शीत युद्ध के बाद सबसे बड़े नौसैन्य विस्तार का बीड़ा उठाया है. पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) की नौसेना जंगी जहाजों के लिहाज से दुनिया की सबसे बड़ी नौसेना है और अगले दशक में इसका बढ़ना जारी रहेगा. वह न सिर्फ नए विमानवाहक पोत, एटमी पनडुब्बियां और सतहपोत जोड़ेगी, बल्कि हिंद महासागर क्षेत्र में सुदूर तैनातियों से अपनी पहुंच का भी विस्तार करेगी.

एडमिरल करमबीर सिंह की आवाज काम कर गई. दो दशकों से रुकी हुई परियोजना के मामले में सीसीएस का शुरुआती गोली दागना अब तय है. सीसीएस की मंजूरी से सरकारी धन मिल जाएगा जिससे भौगोलिक तौर पर बिखरी और टेक्नोलॉजी के लिहाज से चुनौतियों से भरी यह परियोजना शुरू हो सकेगी. परियोजना में गुरुग्राम में डिजाइन को अंतिम मंजूरी मिलना, कलपक्कम में एटमी रिएक्टर का निर्माण, हजीरा में ढांचा बनाना और पुर्जे जोड़ना तथा विशाखापत्तनम के पोत निर्माण केंद्र (एसबीसी) पर समुद्री परीक्षण शामिल हैं. पहली 6,000 टन की पनडुब्बी को पानी में उतारने में अभी एक दशक से ज्यादा लगेगा. माना जा रहा है कि एसएसएन परियोजना के लिए दूसरे स्वदेशी विमानवाहक पोत 65,000 टन वजनी आइएसी-2 के निर्माण की महत्वाकांक्षी नौसैन्य परियोजना को अब तिलाजंलि दे दी गई है.

एसएसएन परियोजना भारत की एडवांस्ड टेक्नोलॉजी वेसल (एटीवी) की छाया में दब गई. एटीवी एटमी शक्ति संपन्न चार लड़ाकू मिसाइल पनडुब्बियों (एसएसबीएन) के निर्माण की टॉप सीक्रेट परियोजना है. आइएनएस अरिहंत 2016 में कमीशन किया गया और दूसरी इकाई एस3 इस साल कमीशन की जाएगी. दो और इकाइयां एस4 और एस4* 2025 में नौसेना में शामिल होंगी.

एसएसबीएन और एसएसएन दोनों एटमी विखंडन रिएक्टरों का इस्तेमाल करते हैं ताकि संचालक दस्ते को चलाने के लिए जरूरी भाप उत्पन्न करने की खातिर भारी ताप पैदा कर सकें. एसएसबीएन सामरिक बमवर्षकों की तरह हैं, जो भयरोधक औजार के तौर पर अपनी नोक पर एटमी हथियार से लैस और दागी जाने को तैयार मिसाइलों के साथ समुद्र में चुपचाप मंडराते रहते हैं. एसएसएन समुद्र के भीतर वही हैं जो आसमान में लड़ाकू विमान हैं. डीजल-बिजली की पारंपरिक पनडुब्बियां असलियत में पानी में बस डूबी ही होती हैं. उन्हें अपने डीजल इंजनों को चलाने और अपनी बैटरियों को रिचार्ज करने की खातिर नली के सहारे हवा खींचने के लिए पानी की सतह पर गोता लगाना होता है और इसी वक्त वे पता लगाए जाने के लिहाज से सबसे ज्यादा असुरक्षित होती हैं. एसएसएन असल पनडुब्बियां हैं, इस लिहाज से कि वे लगभग अनिश्चित वक्त तक पानी के नीचे रहकर काम कर सकती हैं. उनकी यह क्षमता केवल क्रू के खाने की आपूर्ति से ही सीमित होती है. वे टारपीडो, ऐंटी-शिप क्रूज मिसाइलों और लैंड-अटैक क्रूज मिसाइलों जैसे विभिन्न सामरिक हथियारों से भी लैस होती हैं.

Continue reading your story on the app

Continue reading your story in the magazine

MORE STORIES FROM INDIA TODAY HINDIView All

यानी बज गई घंटी!

विधानसभा चुनावों में निराशाजनक नतीजों ने ब्रांड मोदी पर भाजपा की निर्भरता को लेकर सवाल खड़े किए

1 min read
India Today Hindi
May 19, 2021

नाकामियों की त्रासदी

सामूहिक अत्येष्टियां, अस्पताल में बिस्तरों के लिए मारामारी चिकित्सा ऑक्सीजन के लिए हायतौबा, हर तरफ हाहाकार, पारिवारिक त्रासदियां-कोविड की दूसरी लहर के डरावने नजारों देश की राज्यसत्ता की धीर नाकामी को बेनकाब कर दिया

1 min read
India Today Hindi
May 19, 2021

दीदी से दुर्गा

ममता बनर्जी की जीत ने न केवल बंगाल बल्कि देशभर की विपक्षी ताकतों में उम्मीद पैदा कर दिया है जो भगवा ब्रिगेड की अनवरत चढ़ाई को रोकने की आस लगाए हुए हैं

1 min read
India Today Hindi
May 19, 2021

देहात में फीका पड़ा कमल

उत्तर प्रदेश पंचायत चुनाव

1 min read
India Today Hindi
May 19, 2021

डांवाडोल नाव

चुनावों में घटिया प्रदर्शन के बाद कांग्रेस के लिए फिर से करो या मरो की स्थिति बन गई है. अगर पार्टी खुद को सुधारने के लिए एक ईमानदार प्रयास कर सके तो यह अभी भी विपक्ष को एकजुट करने वाली ताकत बन सकती है

1 min read
India Today Hindi
May 19, 2021

अब यहां एकछत्र राज

केरल में बाम मोर्चे की लगातार दूसरी जीत से पिनाराई विजयन की राज्य में एक के बाद एक संकटों से निबटने की काबिलियत और राजनैतिक अफसाने पर मजबूत पकड़ साबित हुई

1 min read
India Today Hindi
May 19, 2021

चूकता ब्रह्मास्त्र

हाल में संपन्न हुए चार राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश के चुनावों में ध्रुवीकरण की लंबे समय से की जा रही कोशिशें अपेक्षित कामयाबी नहीं दे पाईं, तो, क्या ध्रुवीकरण का आकर्षण मतदाताओं में कम होने लगा?

1 min read
India Today Hindi
May 19, 2021

सुपुत्र के हाथ आई सत्ता

एम.के. स्टालिन के चुनावी वादे वोटरों को ठीक लगे अब सबकी निगाहें इस पर हैं कि नए मुख्यमंत्री उन पर कैसे अमल करते हैं

1 min read
India Today Hindi
May 19, 2021

भयावह आपदा

संक्रमण के बेतहाशा बढ़ते मामलों के बीच ग्रामीण इलाकों में खस्ताहाल स्वास्थ्य सेवा तंत्र और किसी तरह की तैयारी के अभाव कोविड के खिलाफ लड़ाई में गंभीर बाधाएं

1 min read
India Today Hindi
May 12, 2021

सवालों के घने दायरे

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबले ने कोरोना की दूसरी लहर से मचे हाहाकार के बीच 24 अप्रैल को बयान जारी किया, "समाज विघातक और भारत विरोधी शक्तियां इस गंभीर परिस्थिति का लाभ उठाकर देश में नाकारात्मक एवं अविश्वास का वातावरण खड़ा कर सकती हैं."

1 min read
India Today Hindi
May 12, 2021
RELATED STORIES

Reincarnation And Realpolitik

China, India, and the U.S. are vying to influence the selection of the next Dalai Lama

5 mins read
Bloomberg Businessweek
April 19, 2021

An Exclusive Interview With Nandakumar Narasimhan

The Little Red Train

10+ mins read
Lens Magazine
March 2021

A Room for Dad

Before Mom passed, I made a promise to her

8 mins read
Guideposts
April 2021

THE DANGAL IN THE JUNGLE, PART 1

YOU KNOW YOU’RE SOMEBODY WHEN YOU’VE APPEARED ON AN INDIAN DANGAL POSTER — IN OTHER WORDS, IN A WRESTLING ADVERTISEMENT.

6 mins read
Black Belt
April/May 2021

WOUNDS AND THE WOMB

JULIE PETERS explores how to heal a relationship with the sacred womb, a place of death, life, and possibilities.

8 mins read
Spirituality & Health
Mar/Apr 2021

BE SQUIRRELY

Giant squirrels, giant lessons? Animal chaplain SARAH BOWEN explores what squirrels can show us about mindfulness.

4 mins read
Spirituality & Health
Mar/Apr 2021

E8 Caste and the Indian Tech Ivies

IIT grads are highly sought after in Silicon Valley. Are they bringing deep-rooted prejudices with them?

10+ mins read
Bloomberg Businessweek
March 15, 2021

Life Changing

I was happily married, happily employed, just plain happy. Until the accident

8 mins read
Guideposts
February 2021

IN SEASON Chickpeas (GARBANZO BEANS)

Chickpeas appear in early recordings in Turkey well over 5000 years ago. India produces the most chickpeas worldwide but they are grown in more than 50 countries. An excellent source of carbohydrates, protein, fiber, B vitamins, and some minerals, they are a nutritious staple of many diets. The name chickpea comes from the Latin word cancer, referring to the plant family of legumes, Fabaceae. It is also known by its popular Spanish-derived name, the garbanzo bean. Kidney beans, black beans, lima beans, and peanuts are other familiar foods found in this legume family.

1 min read
Alternative Medicine
February 2021

When the Signal Goes Out

Government-ordered internet shutdowns are becoming more frequent

3 mins read
Bloomberg Businessweek
February 15 - 22, 2021