"हमें अपनी गलतियों को सुधारने की जरूरत है. पर्यावरण संकट को समझते हुए हर राष्ट्र को इसके समाधान में भूमिका बढ़ानी होगी"
India Today Hindi|April 28, 2021
जो बाइङन प्रशासन ने इस साल जनवरी में पदभार संभालने के बाद सबसे पहले जो फैसले किए उनमें 2015 के पेरिस समझौते में फिर से शामिल होने का निर्णय था. अके पूर्ववर्ती डोनाल्ड ट्रंप ने नवंबर 2020 के अमेरिकी चुनाव से महज छह महीने पहले इस समझौते से अमेरिका को अलग कर लिया था. बाइडन 22 अप्रैल को एक जलवायु शिखर सम्मेलन आयोजित कर रहे हैं. उम्मीद है कि इसमें वे भारत सहित प्रमुख उत्सर्जक देशों के प्रमुखों को 2050 तक शुद्ध कार्बन उत्सर्जन शून्य करने की प्रतिबद्धता जताने को राजी करेंगे, जलवायु पर अमेरिकी राष्ट्रपति के विशेष दूत जॉन केरी पिछले हफ्ते भारत में थे. उन्होंने ग्रुप एडिटोरियल डायरेक्टर (पब्लिशिंग) राज चेंगप्पा के साथ इस मुद्दे पर एक्सक्लूसिव बातचीत की. उसके अंश:

प्र. आपने प्रधानमंत्री नरेंद मोदी और कई प्रमुख कैबिनेट मंत्रियों से मुलाकात की और 2050 तक सभी देशों को कार्बन उत्सर्जन शून्य करने के लिए तैयार करने के अपने मिशन पर चर्चा की. इसमें भारत की भूमिका कितनी महत्वपूर्ण है ?

भारत की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण है. सबसे पहले, संयुक्त राज्य अमेरिका और भारत एक अग्रणी लोकतंत्र हैं; एक विशाल राष्ट्र जो इसके मानवतावादी मूल्यों और पृथ्वी के साथ इसके रिश्ते और उसके प्रति जिम्मेदारी के लिए भी जाना जाता है. भारत बहुत महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है क्योंकि एक देश के रूप में यह दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा उत्सर्जक है हमारा देश दूसरा सबसे बड़ा और चीन पहले नंबर पर है. इसलिए, हमारी विशेष जिम्मेदारी बनती है. हम तीनों दुनिया के उत्सर्जन के 50 प्रतिशत से अधिक के लिए जिम्मेदार हैं. इसलिए भले ही भारत का उत्सर्जन हमारे मुकाबले बहुत छोटा हो, आधे से भी कम, लेकिन हम सब को मिलकर काम करना होगा क्योंकि कोई भी राष्ट्र अकेला इस समस्या का समाधान नहीं कर सकता. हर राष्ट्र को समाधान का हिस्सा बनना होगा. हम एक दूसरे पर निर्भर हैं. इससे भी महत्वपूर्ण यह है कि भारत नवाचार, उद्यमशीलता के प्रयासों, अनुसंधान और विकास और इस तरह की कई अन्य खूबियों वाला देश है. हम नई प्रौद्योगिकियों की खोज में तेजी लाने के लिए अमेरिका और भारत के बीच एक साझेदारी में विश्वास करते हैं जिसकी जरूरत हमें जलवायु संकट से निबटने और अगले दस वर्षों में ऊर्जा के नवीकरणीय स्त्रोतों से 450 गीगावाट बिजली उत्पादन की प्रधानमंत्री मोदी की बहुत आक्रामक और महत्वपूर्ण प्रतिबद्धता को पूरा करने के लिए, वित्त और अन्य चीजों के प्रबंध में होगी...हमें यही करने की आवश्यकता है.

• आपने नेट जीरो (वास्तव में शून्य) का प्रस्ताव पीएम मोदी के सामने रखा तो उनकी क्या प्रतिक्रिया थी?

वे बहुत उत्साहित थे और उन्होंने इस पर भरपूर समर्थन जताया. मुझे लगता है कि प्रधानमंत्री ने साल 2030 के लिए एक लक्ष्य निर्धारित किया है और वे समझते हैं कि उनका लक्ष्य बहुत महत्वपूर्ण है और वे इसे प्राप्त भी करना चाहेंगे. वे काम करने वाले नेता हैं. वे परिणाम चाहते हैं, बयानबाजी नहीं. इसलिए, हम इस साझेदारी को मजबूत करने और लक्ष्यों को पूरा करने के लिए जोर लगाने की कोशिश कर रहे हैं. उम्मीद है कि यह दुनिया के अन्य देशों के लिए एक उदाहरण बन सकता है.

• अमेरिका अंतरराष्ट्रीय जलवायु समझौतों से जुड़ता और फिर उन्हें छोड़ता रहा है...

ज्यादातर शामिल ही रहा है...

• हमें खुशी है कि कुछ समय के लिए पेरिस समझौते से बाहर रहने के बाद आप वापस आ गए हैं. यह अच्छा है कि बाइडन प्रशासन इसको लेकर सक्रिय रहा है, लेकिन आप अन्य राष्ट्रों को कैसे भरोसा दिलाएंगे कि आपका प्रशासन केवल बातों तक सिमटा नहीं है, बल्कि जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर वास्तव में काम करेगा और अपनी प्रतिबद्धताओं से पीछे नहीं हटेगा?

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