नई लहर की तैयारी
India Today Hindi|April 21, 2021
इस साल शेयर बाजार में कई दमदार स्टार्टअप दस्तक देने की तैयारी में हैं. स्टार्टअप की दुनिया के लिए यह बड़े बदलाव का संकेत माना जा रहा
शुभम शंखधर

अगर आप यह मानते हैं कि शेयर बाजार के रास्ते पूंजी जुटाने केवल वे ही कंपनियां आ सकती हैं जिनके पास जमे-जमाए कारोबार और पारंपरिक धंधे हैं तो आपका यह भ्रम अब टूट सकता है. दरअसल, देश में कई ऐसे स्टार्टअप हैं जिनके प्रबंधन इस साल शेयर बाजार में घंटी बजाने की तैयारी कर रहे हैं. स्टार्टअप के मूल्यांकन के तौर-तरीके निश्चित ही पारंपरिक कारोबार की तुलना में एकदम अलग होते हैं, जहां मुनाफे की चिंता छोड़कर शुरुआती वर्षों में जोर केवल टॉपलाइन (राजस्व) बढ़ाने पर रहता है. एचएसबीसी ग्लोबल रिसर्च की ताजा रिपोर्ट भारत के इंटरनेट' के मुताबिक, फूड-डिलिवरी से लेकर ई-कॉमर्स और ऑनलाइन बीमा क्षेत्र की कई स्टार्टअप कंपनियां अब सूचीबद्धता के करीब हैं. इन स्टार्टअप का सामूहिक मूल्यांकन वर्ष 2025 तक 180 अरब डॉलर हो जाने का अनुमान है. पिछले पांच साल के दौरान भारत के इंटरनेट स्टार्ट-अप में 60 अरब डॉलर का निवेश हुआ है. वर्ष 2020 में ही अकेले इनमें 12 अरब डॉलर का निवेश आया है.

परामर्श कंपनी केपीएमजी के सीनियर पार्टनर अमरजीत सिंह कहते हैं, "स्टार्टअप की दुनिया के लिए अगले 12 महीने बेहद अहम रहने वाले हैं." अगर शेयर बाजारों में (घरेलू और वैश्विक) स्टार्टअप की सफल लिस्टिंग देखने को मिलती है तो इससे निवेशकों को अच्छी वैल्युएशन पर अपना निवेश निकालने का मौका मिलेगा. यह स्टार्टअप में निवेशकों का भरोसा और बढ़ाएगा. गौरतलब है कि जोमेटो, नायका, पॉलिसी बाजार, ओला, डेल्हीवेरी समेत कई स्टार्टअप्स शेयर बाजार में दस्तक की तैयारी कर रहे हैं.

एस्कॉर्ट सिक्योरिटीज के हेड (रिसर्च) आसिफ इकबाल भी 2021 में स्टार्टअप की लिस्टिंग की बात से इत्तेफाक तो रखते हैं लेकिन इसकी पेंचीदगियों से वाकिफ कराते हुए कहते हैं, "देश में अभी ज्यादातर स्टार्टअप घाटे में हैं और भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) के मौजूदा नियमों के मुताबिक किसी घाटे में चल रहे स्टार्टअप को शेयर बाजार में सूचीबद्ध कराना लगभग असंभव है." हालांकि ऐसे प्रावधान भी हैं जिसमें घाटा बना रहे स्टार्टअप को भी लिस्ट कराया जा सकता है लेकिन वहां शर्ते बहुत कठिन हैं. मसलन, बाजार में बेचने के लिए लाए गए शेयरों में से 75 फीसद हिस्सा केवल संस्थागत निवेशकों (क्यूआइबी) जैसे म्युचुअल फंड, बीमा कंपनियों वगैरह को बेचना होगा. यह स्टार्टअप को लिस्टिंग के लिए हतोत्साहित करता है.

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