लहर के थपेडों से बचने की तैयारी
India Today Hindi|April 14, 2021
महामारी के एक साल बाद कारोबार तत्परता के साथ उबर रहे हैं लेकिन एक बार फिर गंभीर रूप से इम्तिहान से गुजरेंगे क्योंकि भारत कोविड-19 की दूसरी लहर से जूझ रहा है
एम.जी. अरुण

पिछले साल 25 मार्च को जब भारत में दुनिया के सबसे कठोर लॉकडाउन में से एक लगाया गया, कारोबार पर इसका असर इतना जबरदस्त था कि 40 वर्षों में पहली बार अर्थव्यवस्था मंदी में चली गई. अब जब देश कोविड-19 की दूसरी लहर से जूझ रहा है और सक्रिय मामले हर दिन तेजी से बढ़ रहे हैं (31 मार्च को 5,52,566), आशंका बढ़ गई है कि अर्थव्यवस्था में बीते छह महीनों में हुई बहाली भी नेस्तनाबूद न हो जाए.

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआइ) के गवर्नर शक्तिकांत दास ने 25 मार्च को भरोसा जताया कि कोविड की दूसरी लहर आर्थिक बहाली में रुकावट नहीं डालेगी और अर्थव्यवस्था केंद्रीय बैंक के 2021-22 के पूर्वानुमान के मुताबिक 11 फीसद की रफ्तार से बढ़ती रहेगी. मगर उद्योगों से जुड़े विशेषज्ञों को लगता है कि कोविड की इस लहर की तीव्रता अर्थव्यवस्था की सामर्थ्य का इम्तिहान लेगी और यह सामर्थ्य इससे तय होगी कि भारत अपनी आबादी और अहम कार्यबल के सबसे बड़े हिस्से यानी 20-60 आयु समूह के लोगों को कितनी तेजी से टीके लगा पाता है.

अभी तक कहीं लॉकडाउन का ऐलान नहीं हुआ है और केंद्र ने यह तय करने की जिम्मेदारी राज्यों पर छोड़ दी है कि पाबंदियां किस हद तक लगाई जाएं, पंजाब, महाराष्ट्र और गुजरात कोविड के प्रकोप के अपने बदतरीन दौर से गुजर रहे हैं. भारत के जीडीपी में महाराष्ट्र और गुजरात का मिलाकर 22 फीसद योगदान है. दोनों राज्यों में बढ़ते मामलों और ज्यादा पाबंदियों की आशंका ने न केवल कारोबार बल्कि व्यापक अर्थव्यवस्था के लिए खतरा पैदा कर दिया है.

कई राज्यों ने होली के दिन इकट्ठा होने पर पाबंदियों का ऐलान किया. उद्धव ठाकरे की सरकार ने पूरे महाराष्ट्र में 28 मार्च से रात का कर्फ्यू लगा दिया. होटलों, मॉल और रेस्तरां सहित व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को शाम 7 बजे अपने को बंद करना पड़ रहा है. इन पाबंदियों की मार पहले ही जर्जर फूड और रेस्तरां कारोबार पर पड़ेगी और संगठित खुदरा कारोबार पर भी, जो मंदी के कई महीनों बाद लोगों के आने में बढ़ोतरी बता रहा था. अगर कोविड के मामले बढ़ते हैं तो महाराष्ट्र को आखिरकार फिर लॉकडाउन लगाना पड़ सकता है.

धीमी बहाली

देशव्यापी लॉकडाउन ने ज्यादातर क्षेत्रों के कारोबार को भारी नुक्सान पहुंचाया. कृषि को उतना नुक्सान नहीं हुआ क्योंकि इसका ज्यादा कामकाज ग्रामीण क्षेत्रों में है, पर मैन्युफैक्चरिंग और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र को लॉकडाउन में कामकाज जारी रखने की छूट के बावजूद भारी मार सहनी पड़ी. फैक्ट्रियों में काम करने वाले हजारों प्रवासी मजदूर अपने गांव-घरों के लिए निकल गए, जिसका असर उत्पादन पर पड़ा, सप्लाइ चेन अवरुद्ध हो गई और सड़कों पर ट्रकों की लंबी कतारें लग गईं.

"कोविड की दूसरी लहर ने अब तक तो हम पर असर नहीं डाला है. मगर हम अपने स्टाफ, वितरकों और वेंडरों पर बार-बार जोर डाल रहे हैं कि वे कोविड नियमों का कड़ाई से पालन करें" आर.सी. भार्गव चेयरमैन, मारुति सुजुकी

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