अमेरिकी नेतृत्व मलाला से तो मिला लेकिन इमरान को नहीं दे रहा टाइम
Gambhir Samachar|December 16, 2021
साल 2021 के अगस्त का मध्य. विश्व एक बड़े सत्ता परिवर्तन का साक्षी बना और ये परिवर्तन हुआ अफगानिस्तान में जहां राष्ट्रपति अशरफ गनी की सत्ता को न केवल कुख्यात आतंकी संगठन तालिबान ने चुनौती दी बल्कि उसे उखाड़ फेंका और काबुल पर कब्जा कर लिया. घटना का सबसे विचलित करने वाला पहलू अमेरिका था जिसने घटना पर वैसी प्रतिक्रिया नहीं दी जैसी उम्मीद आमतौर पर उससे की जाती है.अफगानिस्तान पर तालिबान को कब्जे करे ठीक ठाक वक़्त गुजर चुका है. जैसे हालात हैं अफगानिस्तान की स्थिति अच्छी नहीं है और मुल्क दशकों पीछे चला गया है. बात सबसे ज्यादा प्रभावित लोगों की हो तो महिलाएं और लड़कियां हैं. तालिबान पर लगातार यही आरोप लग रहा है कि वो लड़कियों और महिलाओं को शिक्षा तक से वंचित कर उनके मानवाधिकारों का हनन कर रहा है. इन्हीं गफलतों के बीच नोबेल पीस प्राइज विनर और पाकिस्तानी एक्टिविस्ट मलाला यूसुफजई द्वारा एक बड़ी पहल को अंजाम दिया गया है.
बी एम जाफरी

मलाला युसूफजई ने अफगानिस्तान की एक स्कूली छात्रा सोतूदा फोरातन का संदेश अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन को पहुंचा कर युद्ध से जर्जर हो चुके देश में लड़कियों की शिक्षा के लिए बाइडन प्रशासन से मदद मांगी है. ध्यान रहे ये सब उस वक़्त हुआ है जब पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान अपनी बात कहने के लिए बाइडन की कॉल का इंतेजार कर रहे थे. बताया जा रहा है कि जहां एक तरफ मलाला का अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन से मिलना किसी भी पाकिस्तानी के लिए गर्व का क्षण है. वहीं जिस तरह इमरान को अमेरिका ने नजरअंदाज किया है. वो इस बात की तस्दीक कर देता है कि अब तक अमेरिका भी समझ गया है कि इमरान का असली चाल, चरित्र और चेहरा क्या है? बात अफगानी छात्रा फोरातन की हुई है तो ये बता देना बहुत जरूरी है कि 15 साल की फोरातन को अभी बीते दिनों ब्रिटेन के अखबार फाइनेंसियल टाइम्स ने 2021 की 25 सर्वाधिक प्रभावशाली महिलाओं की सूची में शामिल किया था. फोरातन को ये उपलब्धि कैसे हासिल हुई है? इसकी वजह भी खासी दिलचस्प है.

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