भाजपा के लिए खतरनाक है मोदी का आत्मनिर्भर भारत अभियान!
Gambhir Samachar|May 01, 2021
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत अभियान का मकसद तो यही है कि हर बात के लिए सारे लोग सरकार का मुंह न देखते रहें जितना भी संभव हो सके खुद भी कुछ न कुछ करें और अपने आस पास के लोगों को भी ऐसा ही करने के लिए प्रेरित करें.जब देश का प्रत्येक नागरिक आत्मनिर्भनर बनने की कोशिश करेगा तो सरकार पर काम का बोझ कम होगा और सरकार लोगों की बुनियादी जरूरतों को छोड़ आगे के बारे में सोचेगी. ये समझाइश भी इसीलिए रही है कि कोई ये न सोचे कि सरकार ने आपके लिए क्या किया हमेशा लोग ये सोचें कि देश के लिए हमने क्या किया?
एम शेखर

अगर लोगों में ऐसा सोचने की आदत पड़ गयी तो कुछ गड़बड़ होने की स्थिति में भी लोग सरकार को दोष देने की जगह अपने में ही खामी खोजेंगे सत्ता की राजनीति में ये बड़ा ही सुविधा जनक फॉर्मूला है.

सोशल मीडिया पर तो ये अवधारणा स्थापित सी हो चुकी थी कि अगर कोई सरकार को लेकर सवाल उठाये तो कुछ लोगों का जत्था टूट पड़ता था और सवाल उठाने वालों को कोसने लगता था, लेकिन अब वो बात नहीं रही. शायद इसलिए क्योंकि ये सब वे ही कर पाते थे जिनको कोई दिक्कत नहीं आती थी. कोविड के डबल म्यूटेंट वाले दौर में बड़ी आबादी स्वास्थ्य सेवाओं के लिए कदम कदम पर जूझ रही है, बड़ी मुश्किल से काफी मशक्कत के बाद कहीं कोई थोड़ी बहुत मिल पा रही है. 2020 में कोविड के पहले दौर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश की जनता के सामने आत्मनिर्भर बनाने का प्रस्ताव रखा थालगता है लोगों ने इसे अपने अपने तरीके से समझा और काम पर लग गये. मौजूदा दौर में स्वास्थ्य सेवाओं के मामले में लोगों को मोदी का वही मंत्र काम आ रहा है क्योंकि अस्पताल में बेड हासिल करने से लेकर ऑक्सीजन और जरूरी दवाओं तक के इंतजाम खुद ही करने पड़ रहे हैं. लेकिन ये सब ज्यादा नहीं चलने वाला क्योंकि बीजेपी को आत्मनिर्भर भारत का ये रूप बेहद डरावना लग रहा है इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में ऐसे कई बीजेपी नेता मिले हैं जो गुमनाम होकर ये भयावह स्थिति से चिंतित है ! सोवियत गणराज्य के जमाने के लोकप्रिय नेता मिखाइल गोबाचीव के पेरेस्त्रोइका और ग्लासनोस्त जैसे कार्यक्रमों की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत अभियान मिशन से सीधे सीधे तो नहीं लेकिन परोक्ष रूप से तुलना तो हो ही सकती है कम से कम एक बात तो कॉमन है ही दोनों कार्यक्रमों का मकसद देश और समाज में खुशहाली लाने का है.

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