अब बढ़ेगी पाकिस्तान की मुश्किलें
Gambhir Samachar|May 01, 2021
पहले से एक साथ कई मुश्किले झेल रहे पाकिस्तान के लिए अब एक और नई मुश्किलें खड़ी होने जा रही है. दरअसल, आफगानिस्तान में शांति प्रक्रिया में पाकिस्तान की भूमिका रही है. इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने घोषणा की है कि अफगानिस्तान में तैनात सभी अमेरिकी सैनिक सितंबर की 11 तारीख तक वापिस लौट जाएंगे. अमेरिका की इस डेडलाइन पर पाकिस्तान नजर बनाए हुए हैं. पाकिस्तान का कहना है कि अमेरिकी सैनिकों के वापस जाने को अफगान शांति प्रक्रिया से जोड़ा जाना चाहिए.

सूत्रधार के रूप में अफगान शांति प्रक्रिया में अहम भूमिका निभा चुके पाकिस्तान ने अमेरिकी राष्ट्रपति की घोषणा का स्वागत किया है और कहा है कि 'अफगान हितधारकों के साथ समन्वय में सैनिकों को वापिस ले जाने का वो सैद्धांतिक रूप से समर्थन करता है. हालांकि वो ये भी उम्मीद करता है कि अफगानिस्तान में राजनीतिक हल के लिए अमेरिका अफगान नेताओं से बातचीत जारी रखेगा. अफगान सरकार और दूसरे पक्षों के साथ बातचीत शुरू करने के लिए तालिबान को राजी करने में बीते कुछ सालों में पाकिस्तान ने बेहद अहम भूमिका अदा की है. जानकार मानते हैं कि पाकिस्तान की मदद के बिना अफगानिस्तान में जारी संघर्ष का हल खोजने के लिए शांति वार्ता को आगे बढ़ाना असंभव था. दिसंबर 2018 में पाकिस्तान ने ही अमेरिका और तालिबान के बीच सीधी बातचीत करवाई थी. इसी के बाद दोहा में दोनों पक्षों के बीच शांति वार्ता आगे बढ़ सकी थी.इससे पहले जुलाई 2015 में इस्लामाबाद में तालिबान और अफगान सरकार के बीच पहले दौर की सीधी बातचीत भी पाकिस्तान की कोशिशों का नतीजा थी. लेकिन ये बातचीत आगे नहीं बढ़ सकी क्योंकि लंबे वक्त से तालिबान के नेता रहे मुल्ला उमर की मौत के बाद तालिबान के भीतर गुट के नेतृत्व की लड़ाई शुरू हो गई और शांति वार्ता आगे बढ़ने से पहले ही रुक गई.ऐसे कई मौके आए जब अमेरिकी अधिकारियों ने अफगान शांति वार्ता के लिए पाकिस्तान की भूमिका की सराहना की है.

वो ये भी समझते हैं कि अब जब अमेरिका और उसके मित्र देशों ने अफगानिस्तान से अपने सैनिकों को बाहर ले जाने का फैसला कर लिया है तो पाकिस्तान की भूमिका और महत्वपूर्ण हो जाती है. वो नहीं चाहेगा कि करीब एक ट्रिलियन डॉलर खर्च कर, 2,300 अमेरिकी जानों को अफगानिस्तान में गंवाने वाले बीस साल के युद्ध से जो कुछ हासिल हो सका है वो ऐसे ही खत्म हो जाए. अमेरिकी सैनिकों को अफगानिस्तान से निकालने की घोषणा करते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय जिहादियों को अफगानिस्तान की सरजमीन पर पैर न जमाने देने के वादे को पूरा करने के लिए अमेरिका 'तालिबान को ज़िम्मेदार ठहराएगा.'

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