नव्य एवं भव्य काशी
DASTAKTIMES|December 2021
काशी अब अपने पुराधिपति के नव-प्रांगण के कायाकल्प को लेकर रोमांचित और आह्लादित है और ऐसा हो भी क्यों न, शताब्दियों बाद इस विशाल प्रांगण में सूर्य की किरणें खुलकर अम्खेलियां कर रहीं हैं, स्वर्णिम आभा बिखेर रही है। मंदिर के स्वर्ण शिखर को छूकर विश्वनाथ धाम में निखरती किरणें ऐसा एहसास करा रही हैं मानो इस पावन पर्व पर स्वर्ग से उतरे नक्षत्र और देवी-देवता देवाधिदेव महादेव को नमन कर उनके दरबार में बैठ रहे हों। काशीवासियों का शिवत्व अपने चरम पर है। विश्वनाथ धाम की विशाल प्राचीर से जुड़े प्रवेश द्वार उस युग का आभास कराते हैं जब काशी पर आक्रांताओं की कुदृष्टि नहीं पड़ी थी। आदिकाल से गौरवमयी चिर चैतन्य काशी ने अपने भव्य इतिहास की सीढ़ियों पर पहला कदम रख एक और इतिहास रच दिया है। सर्वव्यापी शिव के धाम के दिव्य स्वरूप ने पीढ़ी-दर-पीढ़ी सुनाई जाने वाली बाबा दरबार की भव्यता को जीवंत कर, मूर्त रूप देकर काशीवासियों के मन की वीणा के तारों को कुछ इस तरह झंकृत किया है कि उससे निकला राग शताब्दियों तक गूंजता रहेगा।
संजय सिंह

काशी यूं तो हमेशा अपने अल्हड़पन, मस्त अंदाज और शिव भक्ति के अलग-अलग स्वरूपों में नजर आती है। लेकिन, पिछले कुछ दिनों से इस नगर की हर डगर पर सबकी जुबान पर विश्वनाथ धाम की विशालता, विशेषता, दिव्यता और भव्यता के किस्से हैं। इन्हें सुनाते वक्त काशीवासियों के चेहरे पर गौरव की अनुभूति साफ देखी जा सकती है। काशी अब अपने पुराधिपति के नव-प्रांगण के कायाकल्प को लेकर रोमांचित और आह्लादित है और ऐसा हो भी क्यों न, शताब्दियों बाद इस विशाल प्रांगण में सूर्य की किरणें खुलकर अठखेलियां कर रहीं हैं, स्वर्णिम आभा बिखेर रही है। मंदिर के स्वर्ण शिखर को छूकर विश्वनाथ धाम में निखरती किरणें ऐसा एहसास करा रही हैं मानो इस पावन पर्व पर स्वर्ग से उतरे नक्षत्र और देवी-देवता देवाधिदेव महादेव को नमन कर उनके दरबार में बैठ रहे हों। काशीवासियों का शिवत्व अपने चरम पर है। विश्वनाथ धाम की विशाल प्राचीर से जुड़े प्रवेश द्वार उस युग का आभास कराते हैं जब काशी पर आक्रांताओं की कुदृष्टि नहीं पड़ी थी। आदिकाल से गौरवमयी चिर चैतन्य काशी ने अपने भव्य इतिहास की सीढ़ियों पर पहला कदम रख एक और इतिहास रच दिया है। सर्वव्यापी शिव के धाम के दिव्य स्वरूप ने पीढ़ी-दर-पीढ़ी सुनाई जाने वाली बाबा दरबार की भव्यता को जीवंत कर, मूर्त रूप देकर काशीवासियों के मन की वीणा के तारों को कुछ इस तरह झंकृत किया है कि उससे निकला राग शताब्दियों तक गूंजता रहेगा।

देश-विदेश के करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र, भगवान शिव के स्वयंभू ज्योतिर्लिंगों में सर्वप्रमुख आदि विश्वेश्वर श्रीकाशी विश्वनाथ का धाम अपने नव्य एवं भव्य रूप में आकार ले चुका है। गंगा तट से मंदिर के गर्भगृह तक बने काशी विश्वनाथ धाम का यह नया स्वरूप 241 साल बाद दुनिया के सामने आया है। इतिहासकारों के अनुसार श्री काशी विश्वनाथ मंदिर पर वर्ष 1194 से लेकर 1669 तक कई बार हमले हुए। 1777 से 1780 के बीच मराठा साम्राज्य की महारानी अहिल्याबाई होलकर ने मंदिर का जीर्णोद्धार कराया था। ढाई दशक बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आठ मार्च, 2019 को इस परियोजना की आधारशिला रखी थी। इसके बाद 339 करोड़ की लागत से 33 महीने में श्री काशी विश्वनाथ धाम पहले चरण के उद्घाटन के बाद अपने नव्य और भव्य रूप में सामने आया है। बाबा विश्वनाथ के तीर्थयात्रियों और भक्तों को पवित्र नदी में डुबकी लगाने की सदियों पुरानी परम्परा का पालन करने, खराब रख-रखाव एवं भीड़भाड़ वाली सड़कों से आने-जाने और गंगाजल लेकर मंदिर में अर्पित करने में होने वाली कठिनाइयों को दूर करके उन्हें सुविधा प्रदान करना, प्रधानमंत्री मोदी का काफी पुराना सपना था। इस सपने को साकार करने के लिए, श्री काशी विश्वनाथ मंदिर को गंगा नदी के तट से जोड़ने के लिए एक सुगम मार्ग के सृजन की एक परियोजना के रूप में श्री काशी विश्वनाथ धाम की परिकल्पना की गई। प्रधानमंत्री लगातार परियोजना की समीक्षा और निगरानी से लेकर निर्देश देते रहे। परियोजना को बेहतर बनाने और दिव्यांगजनों समेत सभी तीर्थयात्रियों के लिए इसे और अधिक सुलभ बनाने के क्रम में उन्होंने लगातार इनपुट दिए और इस सम्बन्ध में अपना दृष्टिकोण साझा किया। परियोजना को रैंप, एस्केलेटर और अन्य आधुनिक सुविधाओं के साथ डिजाइन किया गया, ताकि दिव्यांगजनों और वृद्ध लोगों को पहुंचने में आसानी हो।

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टॉप गियर में योगी सरकार विरोधी दल में कलह

उत्तर प्रदेश की राजनीति में विपक्ष का सारा दारोमदार समाजवादी पार्टी पर आन पड़ा है। योगी सरकार को सदन में दो तिहाई बहुमत प्राप्त है। तो भी विरोधी दल यानी सपा का यह संख्या बल उसको घेरने के लिए पर्याप्त है। समाजवादी पार्टी अगले चुनावों तक जनता में अपने लिए कितना समर्थन और सम्मान अर्जित कर पाती है, यह सदन और सदन से बाहर उसके प्रदर्शन पर ही निर्भर करेगा। अखिलेश यादव ने इस अवसर को अच्छी तरह पहचाना है। लेकिन जिसे कहते हैं, सिर मुढ़ाते ही ओले पड़ना, समाजवादी पार्टी शक्तिशाली विपक्ष की भूमिका में आने से पहले ही अपने आन्तरिक कलह में घिर गई है।

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हाइब्रिड सुरक्षा मॉडल समय की मांग

हाइब्रिड सुरक्षा मॉडल समय की मांग है। निजी क्षेत्र की विभिन्न औद्योगिक और विनिर्माण इकाइयों को प्रभावी सुरक्षा मुहैया कराने के लिए केंद्र सरकार का अर्धसैनिक बल सीआईएसएफ और निजी सुरक्षा एजेंसियां एक साथ मिल कर काम कर सकती हैं। गृह मंत्रालय का मानना है कि सीआईएसएफ जैसे सुरक्षा बल अकेले देशभर में निजी क्षेत्र की विभिन्न औद्योगिक और विनिर्माण इकाइयों को प्रभावी सुरक्षा मुहैया नही उपलब्ध करा सकते। इसी कड़ी में सीआईएसएफ से निजी सुरक्षा एजेंसियों को प्रशिक्षण देने की जिम्मेदारी लेने पर विचार करने को भी कहा गया है।

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May 2022

भीमताल : मशरूम क्रांति का नया पड़ाव

उत्तराखंड के पर्वतीय ग्रामीण क्षेत्रों से पलायन रोकने के लिए मशरूम की खेती को एक बड़े समाधान के रूप में देखा जा रहा है। इसीलिए नैनीताल के मुख्य विकास अधिकारी डॉ. संदीप तिवारी का कहना है कि गांवों से पलायन रोकने के लिए मशरूम उत्पादन, पॉलीहाउस योजना, बागवानी, मत्स्य पालन समेत अन्य योजनाओं से लोगों को स्वरोजगार से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।

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May 2022

ट्रेडिशनल मेडिसिंस के क्षेत्र में बजता भारत का डंका

डब्ल्यूएचओ ग्लोबल सेंटर फॉर ट्रेडिशनल मेडिसिन, विश्व में अपनी तरह का पहला केन्द्र है, जिसका 19 अप्रैल, 2022 को जामनगर में उद्घाटन किया गया। इस केन्द्र का लक्ष्य पारंपरिक चिकित्सा की क्षमता को तकनीकी प्रगति और साक्ष्य - आधारित अनुसंधान के साथ एकीकृत करना है। जामनगर इसके आधार के रूप में कार्य करेगा और इस नए केंद्र का उद्देश्य विश्व को शामिल करना और उसे लाभान्वित करना है।

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May 2022

चारधाम यात्रा श्रद्धालुओं के आतिथ्य को तैयार धामी सरकार

यात्रियों को देवभूमि में दिल खोलकर स्वागत हो और उन्हें किसी प्रकार की कोई असुविधा न हो, इसके लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अधिकारियों को सभी व्यवस्थाएं समय पर दुरस्त करने के निर्देश दिए हैं। यात्रा से जुड़ी सभी तैयारियों पर मुख्यमंत्री स्वयं नजर बनाए हुए हैं। अब तक एक लाख से अधिक यात्री चारधाम यात्रा के लिए अपना ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन करा चुके हैं।

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May 2022

मुस्लिम तुष्टीकरण - राज्य सरकारें हिन्दुओं को घोषित कर सकती हैं अल्पसंख्यक

हाल ही में राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग अधिनियम 1992 चर्चा में रहा क्योंकि हाल ही में एक याचिका दायर करके केंद्र सरकार द्वारा अल्पसंख्यकों को दर्जा देने के अधिकार पर चुनौती पेश की गई है और ऐसा इसलिए किया गया है क्योंकि हाल ही में केंद्र सरकार ने इस बात पर विचार करना शुरू किया था कि जिन राज्यों में हिंदुओं की संख्या काफी कम हो गई है वहां पर हिंदुओं को अल्पसंख्यक घोषित कर दिया जाए, इसलिए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को 4 सप्ताह का समय देते हुए इस बारे में स्पष्टीकरण देने को कहा है।

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May 2022

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धामी के बहाने सिर्फ भाजपा ही नहीं, उत्तराखंड की सियासी तस्वीर बदलने जा रही है। प्रदेश की राजनीति में भुवन चंद खंडूरी, भगत सिंह कोश्यारी, विजय बहुगुणा, हरीश रावत, हरक सिंह, दिवाकर भट्ट, काशी सिंह ऐरी का युग अब लगभग खत्म सा हो गया है। रमेश पोखरियाल निशंक, त्रिवेंद्र सिंह रावत, अजय भट्ट, मदन कौशिक, सतपाल महाराज और गणेश जोशी की सियासी पारी भी ढलान पर है। राज्य की सियासत को हर कहीं अब नए नेतृत्व की दरकार है। वैसे भी भाजपा रणनीतिक रूप से तमाम राज्यों में नए नेतृत्व पर फोकस कर ही रही है। इसी क्रम में उत्तराखंड में भी भाजपा का सियासी दौर बदल रहा है।

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May 2022

जीरो टॉलरेंस और सुशासन हमारी प्रतिबद्धता : धामी

उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी अपनी नई पारी में बदले - बदले से नजर आ रहे हैं।

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May 2022

जम्मू कश्मीर के लिए 20 हजार करोड़

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सांबा में 3100 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से बनी बनिहाल काजीगुंड सड़क सुरंग का उद्घाटन किया। कुल 8.45 किलोमीटर लंबी यह सुरंग सड़क मार्ग से बनिहाल और काजीगुंड के बीच की दूरी को 16 किलोमीटर कम कर देगी और यात्रा में लगने वाले समय में लगभग डेढ घंटे की कमी ला देगी।

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May 2022

गांधी परिवार का विकल्प है ही कहां!

कांग्रेस के पास बहुत सीमित विकल्प ही उपलब्ध हैं। ऐसे में प्रशांत किशोर की बातों को आत्मसात करना उसके लिए पार्टी के लोग एकदम हितकर मानते हैं। प्रशांत किशोर चुनाव विशेषज्ञ हैं और उन्होंने कांग्रेस के हालातों पर गहराई से अध्ययन कर अपने प्रस्ताव तैयार किए हैं। वे सोनिया गांधी व दूसरे नेताओं के समक्ष इन्हीं प्रस्तावों पर प्रजेंटेशन भी दे चुके हैं। कांग्रेस के साथ दिक्कत यह है कि विभिन्न राज्यों में उसका वोट बैंक उसके पास से तेजी से खिसक रहा है। उत्तर प्रदेश इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। उसे उत्तर प्रदेश विधानसभा के चुनाव में कूल दो सीटें और 3 प्रतिशत से भी कम वोट मिले हैं।

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