दादी इंदिरा के नक्शे कदम पर चल रहीं प्रियंका
DASTAKTIMES|October 2021
कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव और उत्तर प्रदेश प्रभारी प्रियंका गांधी वाड्रा अन्य दलों की तुलना में थोड़ा ज्यादा प्रभाव छोड़ने में कामयाब रहीं। विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी को किसी तरह लड़ाई में लाने में जुटी प्रियंका अच्छी तरह जानती हैं कि कमजोर संगठन के कारण उनके लिए यह उतना आसान नहीं हैं। ऐसे में मुद्दों को तलाशना और उसे लेकर सरकार के खिलाफ आवाज उठाना मददगार साबित हो सकता है
डॉ. सुनील कुमार

लखीमपुर हिंसा मामले में विपक्ष की सियासत की बात करें तो किसानों की सहानुभति हासिल करने के लिए सभी ने इस मुद्दे को लपकने में देरी नहीं की।लेकिन कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव और उत्तर प्रदेश प्रभारी प्रियंका गांधी वाड्रा अन्य दलों की तुलना में थोड़ा ज्यादा प्रभाव छोड़ने में कामयाम रहीं।

विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी को किसी तरह लड़ाई में लाने में जुटी प्रियंका अच्छी तरह जानती हैं कि कमजोर संगठन के कारण उनके लिए यह उतना आसान नहीं हैं। ऐसे में मुद्दों को तलाशना और उसे लेकर सरकार के खिलाफ आवाज उठाना मददगार साबित हो सकता है। इसीलिए यूपी की हर गतिविधि पर प्रियंका की नजर रहती और वह इसे लेकर अक्सर ट्वीट भी करती रहती हैं। सत्तारूढ़ दल के नेता इसलिए उन्हें ट्विटर की नेता भी कहते हैं। इससे बेपरवाह प्रियंका यूपी की घटनाओं पर प्रतिक्रिया देने का मौका नहीं छोड़ती। सियासी जानकार इसे प्रियंका की मजबूरी भी करार देते हैं। देखा जाए तो उत्तर प्रदेश में पार्टी के कई चर्चित चेहरे हैं। लेकिन, उनकी सियासी सक्रियता न के बराबर है। प्रदेश नेतृत्व में गुटबाजी भी सामने आती रहती है। ऐसे में विधानसभा चुनाव का सारा दारोमदार प्रियंका के ही कन्धों पर है। यही वजह है कि खीरी हिंसा प्रकरण के बाद प्रियंका बेहद सक्रिय रहीं और उन्होंने आनन फानन में मौके पर जाकर सरकार व प्रशासन पर दबाव बनाने की रणनीति पर काम किया। प्रियंका का यह फैसला सही साबित भी हुआ। पुलिस अधिकारियों से लड़ते-भिड़ते वह सीतापुर तक पहुंची। पुलिस प्रशासन द्वारा रोके जाने से लेकर नजरबंद करने के दौरान वह सुर्खियों में भी रहीं। अफसरों से तीखी बहस से लेकर नजरबंदी के दौरान झाडू लगाती उनकी तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर छाये रहे। आखिरकार सरकार की ओर से इजाजत मिलने पर वह राहुल गांधी के साथ लखीमपुर खीरी पीड़ित परिवार के परिजनों से मिलने भी पहुंची।

इस तरह देखा जाए तो प्रियंका अपने मकसद में कामयाब हुईं। पार्टी के अन्य प्रदेशस्तरीय नेता जब तक अपनी रणनीति को अंजाम देते, तब तक प्रियंका आगे आकर अपना काम कर चुकी थीं। ऐसा नहीं है कि इस तरह के कड़क तेवर प्रियंका गांधी ने पहली बार दिखाए हों या सरकार के खिलाफ इतना मुखर होकर बोली हों। इससे पहले प्रियंका गांधी जब पूर्व आईपीएस अधिकारी एसआर दारापुरी के परिवार से मिलने जा रही थीं, तब भी पुलिस से बहस के वीडियो वायरल हुए थे। वह पार्टी कार्यकर्ता के स्कूटर पर एसआर दारापुरी के घर चली गई थीं। दारापुरी नागरिक संशोधन कानून के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे थे। सोनभद्र में जमीन विवाद में आदिवासियों की हत्या का मामला हो, चाहे हाथरस गैंग रेप का मामला या कोरोना के दौरान प्रवासी मजदूरों के लिए बसें मुहैया कराने का प्रकरण, प्रियंका ने कांग्रेस को चर्चाओं में लाने का पुरजोर प्रयास किया।

उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय प्रसाद लल्लू कहते हैं, 'यूपी सरकार एक डरी हुई सरकार है। यह हमारी नेता प्रियंका जी से इतना डर गयी कि उन्हें कैद करके रखा। लेकिन, जनता सब देख रही है। इसी तरह पार्टी के अन्य नेताओं और कार्यकर्ताओं को प्रियंका से बहुत उम्मीदे हैं, जो उन्हें अन्य नेताओं में नजर नहीं आती। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अखिलेश प्रताप सिंह कहते हैं कि जनता प्रियंका गांधी को गंभीरता से लेती है। वो अकेली नेता हैं जो जनता के मुद्दों पर सड़क पर आई हैं, उनकी आवाज बनी हैं। छह बार हिरासत में ली गईं। कई बार उन्हें पकड़ा गया। कई बार उनसे धक्का-मुक्की की गई। मीरजापुर में किसानों का मामला हो, इलाहाबाद में मछुआरों की बात हो, हाथरस की बेटी का मामला हो या किसानों का मुद्दा हो - ऐसे हर मामलों में वो जनता के साथ खड़ी दिखाई दीं। बकौल अखिलेश प्रताप सिंह प्रियंका गांधी अपना दायित्व बेहद अच्छी तरह निभा रही हैं। हालांकि प्रियंका की इस सक्रियता को भाजपा सीधे तौर पर चुनाव से जोड़ रही है। पार्टी का आरोप है कि प्रियंका सिर्फ पर्यटन के तौर पर उत्तर प्रदेश आती हैं और चली जाती हैं। पांच सालों में उन्होंने और उनकी पार्टी के नेताओं ने जनता के लिए कुछ नहीं किया। आरोप प्रत्यारोप के बीच बड़ी सच्चाई ये भी है कि प्रियंका पहली बार उत्तर प्रदेश में सक्रिय नहीं हुई हैं। हर चुनावी माहौल में उनके दौरे बढ़ जाते हैं। पार्टी की ओर से बड़े-बड़े दावे किये जाते हैं। लेकिन, चुनावी नतीजे सारी हकीकत बयान कर देते हैं। चुनाव दर दर चुनाव कांग्रेस और ज्यादा कमजोर होती गई है। उसके नेता एक एक कर साथ छोड़ रहे हैं। हालत ये है कि उसके लिए सभी सीटों पर उम्मीदवार तलाशना तक मुश्किल हो जाता है। इस बार भी प्रियंका माहौल बनाने की कोशिश में हैं। लेकिन, वह कितना सफल हो पाएंगी, ये चुनाव परिणाम ही बताएंगे।

Continue reading your story on the app

Continue reading your story in the magazine

MORE STORIES FROM DASTAKTIMESView All

दादी इंदिरा के नक्शे कदम पर चल रहीं प्रियंका

कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव और उत्तर प्रदेश प्रभारी प्रियंका गांधी वाड्रा अन्य दलों की तुलना में थोड़ा ज्यादा प्रभाव छोड़ने में कामयाब रहीं। विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी को किसी तरह लड़ाई में लाने में जुटी प्रियंका अच्छी तरह जानती हैं कि कमजोर संगठन के कारण उनके लिए यह उतना आसान नहीं हैं। ऐसे में मुद्दों को तलाशना और उसे लेकर सरकार के खिलाफ आवाज उठाना मददगार साबित हो सकता है

1 min read
DASTAKTIMES
October 2021

ड्रग्स का जाल- अब शाहरुख का दुलारा बना समीर वानखेडे का शिकार

एनसीबी को आर्यन के पास से कोई मादक पदार्थ नहीं मिला था। उसे सिर्फ वाट्सएप चैट्स के आधार पर गिरफ्तार किया गया है। क्रूज शिप पर ड्रग्स पार्टी करने के आरोप में फंसे आर्यन खान के पिता शाहरुख खान को भी बड़ा झटका लगा है।

1 min read
DASTAKTIMES
October 2021

हत्यारी बनती खाकी

पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मनीष के शरीर पर कई जगह चोट के निशान मिले। मामले में बातचीत के बहाने जिलाधिकारी और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक का पीड़ित परिवार पर मुकदमा न दर्ज कराने के लिए दबाव बनाने का वीडियो वायरल होने पर पुलिस व प्रशासन की बेहद किरकिरी हुई।

1 min read
DASTAKTIMES
October 2021

बदलाव के 4.5 साल

पिछले साढ़े चार सालों में कोई भी आरोप नहीं लगा सकता है कि ट्रांसफर-पोस्टिंग में कोई लेनदेन हुआ हो। वर्ष 2017 से पहले उत्तर प्रदेश को देश में रुकावट पैदा करने वाला प्रदेश समझा जाता था। आज नेकनीयत और ईमानदार नेतृत्व का नतीजा है कि प्रदेश, देश की बड़ी योजनाओं का नेतृत्व कर रहा है।

1 min read
DASTAKTIMES
October 2021

यूं ही नहीं हुई 'अब्बाजान' 'चचाजान' की एंट्री

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में मुख्य मुकाबला भाजपा और सपा के बीच माना जा रहा है। भाजपा इसीलिए लगातार सपा पर मुस्लिम तुष्किरण का आरोप लगाकर उस पर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने की रणनीति अपना रही है। मुख्यमंत्री से लेकर दूसरे भाजपा नेता भी अक्सर पूछते रहे हैं कि अखिलेश यादव को अब्बाजन शब्द में क्या आपत्तिजनक लगता है। भगवा खेमे का आरोप है कि सपा मुस्लिम वोट तो चाहती है। लेकिन, अब्बाजन शब्द से उसे समस्या है।

1 min read
DASTAKTIMES
October 2021

उत्तराखंड के बौद्धिक संपदा अधिकार संरक्षण से जुड़ी एक और नई उपलब्धि

पारंपरिक प्रोडक्ट्स का उत्पादन किया जाता रहा है। अब उत्तराखंड सरकार ने ऐसे कृषि भूमि के आकार में वृद्धि करने पर प्रतिबद्धता जाहिर की है जिस पर राज्य के पारंपरिक उत्पादों के उत्पादन को बढ़ाया जा सके।

1 min read
DASTAKTIMES
October 2021

महंत की मौत आत्महत्या या साजिश

महंत नरेंद्र गिरि की मौत के रहस्य में सबसे अहम कमरे में मिला उनका सुसाइड नोट है। इसके हस्ताक्षर, राइटिंग, कई जगह कटिंग, तारीखों में बदलाव को लेकर तमाम सवाल खड़े होते रहे हैं। हालांकि प्रथम दृष्टया जांच में इतना साफ हुआ है कि सुसाइड नोट पर जो हस्ताक्षर हैं वह नरेंद्र गिरि के ही हैं। हालांकि सुसाइड नोट की फॉरेंसिक जांच अभी जारी है। हस्ताक्षर के अलावा सुसाइड नोट की हैंड राइटिंग की रिपोर्ट अभी साफ नहीं है।

1 min read
DASTAKTIMES
October 2021

मुख्यमंत्रीधामी का शानदार शतक 100 दिन में 330 उपलब्धियां का रिकॉर्ड

ताबतड़तोड़ फैसले करके जनता का दिल जीतने वाले मुख्यमंत्री धामी की कार्यकुशलता से पार्टी का शीर्ष नेतृत्व में भी मुरीद हो गया हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उनकी प्रशंसा कर उन्हें युवा ऊर्जावान और उत्साहित बताते हुए अपना मित्र तक बताया। वहीं रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह उन्हें अन्तिम ओवर में मैच जिताने का माद्दा रखने वाले धाकड़ बल्लेबा बता चुके हैं। पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा भी उत्तराखण्ड दौरे के दौरान धामी सरकार के कार्य से बेहद सन्तुष्ट नजर आए। कैबिनेट मंत्री बिशन सिंह चुफाल कहते हैं कि मुख्यमंत्री धामी के ऊर्जावान नेतृत्व में सरकार ने काफी बेहतर काम किया है। 100 दिन के कार्यकाल का एक एक पल जनता को समर्पित रहा है। इन सौ दिनों में हमने जनता के हित में 330 से अधिक फैसले किए हैं।

1 min read
DASTAKTIMES
October 2021

पिछले 7 वर्षों की यात्रा में कहां खड़ी है मोदी की विदेश नीति

आज तेज गति से बदल रही क्षेत्रीय और वैश्विक राजनीति के दौर में इस बात पर चर्चा करनी बहुत जरूरी है कि भारत वैश्विक मंच पर किस हद तक अपने राष्ट्रीय हितों को पूरा कर पाया है, क्या भारत की विदेश नीति में वो बार्गेनिंग स्किल्स विकसित हुई हैं जिनसे वो अपने विरोधियों को प्रति संतुलित कर पाया है? क्या भारत कई देशों के साथ लगातार बढ़ रहे अपने व्यापारिक घाटे को पाटने के लिए कुछ निर्णायक कदम उठाने का साहस जुटा पा रहा है। ऐसे कई सवाल हैं जिनका जवाब खोजने पर ही पता चल पाता है कि हमने पिछले सात वर्षों में विदेश नीति के स्तर पर क्या हासिल किया है। पिछले सात वर्षों में भारत की विदेश नीति का मूल्यांकन करें, तो बहुत सी महत्वपूर्ण बातें सामने आती हैं।

1 min read
DASTAKTIMES
October 2021

20 साल-भारतीय राजनीति के अजेय नायक: नरेन्द्र मोदी

नरेंद्र मोदी की भारतीय राजनीति में सर्वाधिक प्रभावी भूमिका का दौर गुजरात की राजनीति से 2001 में शुरू हुआ। दरअसल इस समय गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री केशुभाई पटेल ने उप चुनावों में बीजेपी की हार के बाद मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था और उस समय गुजरात में बीजेपी को ऊंचाइयों पर पहुँचाने वाले एक बड़े रणनीतिकार को पहली बार गुजरात का मुख्यमंत्री अक्टूबर, 2001 में बनाया गया और ये पोलिटिकल ब्रेन थे नरेंद्र मोदी। मोदी ऐसे सर्वप्रिय राजनेता हैं जिन्होंने राष्ट्रवाद को नई दिशा दी है। पड़ोसी देश पाकिस्तान के आतंकी मंसूबों के खिलाफ़ आपने अल्ट्रा जीरो टॉलरेंस पालिसी अपनाई। ये मोदी जी ही है जिन्होंने उरी टेरर अटैक के बाद पाकिस्तान को साफ-साफ कह दिया कि कश्मीर घाटी में खून और पानी एक साथ साथ नही बह सकता, इसलिए भारत ने सिंधु जल समझौते के समीक्षा को क्रॉस बॉर्डर टेररिज्म से जोड़ दिया। भारत द्वारा दो दो बार सर्जिकल स्ट्राइक करना, पाकिस्तान से मोस्ट फेवर्ड नेशन का दर्जा वापस लेना मोदी की मजबूत इच्छा शक्ति का ही प्रमाण है। मोदी के नेतृत्व में म्यांमार की भूसीमा के अंदर भारत ने सर्जिकल स्ट्राइक कर भारत विरोधी उग्रवादी संगठनों के टेरर कैम्पों का खात्मा कर दिया। कश्मीर का गलवान हो या अरुणाचल का तवांग, सिक्किम का नकूला दर्रा हो या उत्तराखंड का कालापानी लिपुलेख भारतीय प्रधानमंत्री ने पड़ोसी देशों को मर्यादित रहना सिखाया है।

1 min read
DASTAKTIMES
October 2021