तीसरी लहर की दस्तक
DASTAKTIMES|July 2021
कोरोना का नया वैरिएंट कितना घातकहोगा यह अभी देखना बाकी है। सवाल यह भी है कि क्या नये वैरिएंट से हमारी वैक्सीन मुकाबला कर पायेगी।
जितेन्द्र शुक्ला 'देवव्रत'

भारत में कोविड-19 यानि कोरोना वायरस की दूसरी लहर अब थम चुकी है। यही वजह है कि देश में अनलॉक की प्रक्रिया भी पूर्ण हो गयी है लेकिन इसी बीच कोरोना की तीसरी लहर की दस्तक सुनायी देने लगी है। महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और केरल में कोरोना के नए वैरिएंट 'डेल्टा प्लस' के प्रमाण मिले हैं। यूं भी स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने अक्टूबर तक देश में कोरोना की तीसरी लहर आने की आशंका जताई है। हालांकि, स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि यह भारत में आई दूसरी कोरोना लहर के मुकाबले अधिक नियंत्रित होगा लेकिन इस तीसरी लहर के कारण अब देश में कोरोना संक्रमण एक और साल तक बना रह सकता है, लेकिन भारत में टीकाकरण में आयी तेजी से कोरोना की तीसरी लहर का प्रकोप निश्चित ही कम होगा। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के निदेशक डॉ.रणदीप गुलेरिया ने कहा है कि इसे और अधिक नियंत्रित किया जाएगा क्योंकि मामले बहुत कम होंगे क्योंकि अभियान टीकाकरण काफी अच्छी सियासत में चल रहा है। शुरू हो गया होगा और दूसरी लहर से कुछ हद तक प्राकृतिक प्रतिरक्षा भी होगी। यानि कोरोना की तीसरी लहर उतनी तेज रहने की संभावना नहीं है।

हालांकि अभी सिर्फ कयास ही लगाये जा रहे हैं। लाख टके का सवाल यह है कि जो कुछ लोगों ने दूसरी लहर के दौरान भोगा उससे हमने क्या सीख ली और आगे की हमारी तैयारी क्या है। न्यायालयों ने भी विभिन्न राज्य सरकारों और केन्द्र सरकार से आगे की तैयारी को लेकर सवाल किए है। कोरोना का नया वैरिएंट कितना घातक होगा यह अभी देखना बाकी है। सवाल यह भी है कि क्या नये वैरिएंट से हमारी वैक्सीन मुकाबला कर पायेगी। वास्तव में डेल्टा प्लस वेरिएंट, डेल्टा वेरिएंट से ही जुड़ा है, जिसकी सबसे पहले भारत में ही पहचान की गई थी और यही वेरिएंट भारत में कोरोना की दूसरी लहर का कारण बना था। दूसरी लहर के पीक के दौरान मई महीने में भारत में हर रोज जहाँ औसतन चार लाख नए मामले दर्ज किए जा रहे थे। वो अब औसतन 50,000 हो चुके हैं।

दूसरी लहर में कमी आने के बाद सरकारें अपनी-अपनी पीठ थपथपाने में जुटी हैं। लेकिन यह भी सच है कि दूसरी लहर ने व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी। विशेषज्ञों का मानना है कि गलतियों को अगर दोहराया गया, तो ये तीसरी लहर के जल्दी आने का कारण बन सकती है। वास्तव में लोगों का बर्ताव कोरोना की तीसरी लहर का भविष्य तय करेगा। लोगों ने कोविड के सेफ्टी प्रोटोकॉल का पालन नहीं किया, तो इससे वायरस को तेजी से फैलने में मदद मिलेगी। वैज्ञानिकों के अनुसार, अगर वायरस के प्रसार को अतिसंवेदनशील आबादी में फैलने से रोका नहीं गया, तो कोरोना के ऐसे कुछ और वेरिएंट आ सकते हैं। भारत सरकार ने पहले ही 'डेल्टा प्लस' वेरिएंट को 'वेरिएंट ऑफ कंसर्न' यानी चिंताजनक घोषित कर दिया है। लेकिन अब तक ऐसा कोई डेटा उपलब्ध नहीं है, जिसके आधार पर कहा जा सके कि ये वेरिएंट कोरोना की तीसरी लहर का कारण बन सकता है। कुछ सावधानियों के जरिए इसे कुछ समय के लिए टाला जा सकता है और इसके लिए वायरस की म्यूटेशन को समझना और सेफ्टी प्रोटोकॉल का पालन करना बहुत जरूरी है।

वास्तव में तीसरी लहर का प्रभाव और इसका प्रसार इस बात पर भी निर्भर करेगा कि भारतीय आबादी में इम्युनिटी कितनी है। जिन लोगों को वैक्सीन लग चुकी है, उन्हें कोरोना से संभावित इम्युनिटी मिल चुकी है। साथ ही जिन लोगों को एक बार कोरोना संक्रमण हो चुका है, उन्हें भी इस वायरस से कुछ हद तक इम्युनिटी मिल गई है। लेकिन यह नहीं भूलना चाहिए कि कोरोना की दूसरी लहर में वैक्सीन लगवा चुके और पहले संक्रमित हो चुके, दोनों तरह के लोगों को भी संक्रमण हुआ था। एक तथ्य यह भी है कि अभी तक भारत की करीब 20 फीसदी आबादी को वैक्सीन की एक डोज ही लगी है जबकि लगभग पांच प्रतिशत का दोनों डोज लग चुकी है। ऐसे में यदि तीसरी लहर से बचना है तो कोविड प्रोटोकॉल के साथ टीकाकरण की रफ्तार बढ़ाने की जरूरत है। एक अनुमान के मुताबिक उन लोगों की संख्या, जिन्हें पिछले संक्रमण से इम्युनिटी मिली होगी, वो 50 प्रतिशत के आस पास हो सकती है। यानि अभी भी आबादी का एक बड़ा हिस्सा ऐसा है जिसे तीसरी लहर से बचाना होगा। यह तभी संभव है जब थ्री टी फार्मूले का सही तरीके से अमलीजामा पहनाया जाये। यह भी नहीं भूलना चाहिए कि एक साल से अधिक समय से जो चिकित्सक और पैरा मेडिकल स्टाफ दिन-रात जुटा रहा था वह अब थका हुआ महसूस कर रहा है। ऐसे में आम लोगों का अपने स्तर से कोविड प्रोटोकाल का पालन करना ही हितकर होगा क्योंकि कोरोना अब तक देश में दो लाख से अधिक की जान ले चुका है और अर्थव्यवस्था को बेहाल कर चुका है।

कोरोना महामारी एक वैश्विक महामारी है और 1918 की महामारी के बाद सबसे बड़ी और जानलेवा महामारी है जिसमें जान और माल की तबाही ने दुनिया भर को हिला कर रख दिया है। कोरोना महामारी की शुरू होने की तारीख तो हम जानते हैं लेकिन ये महामारी कब खत्म होगी ये कोई विशेषज्ञ नहीं बता सकता, इसके अलावा कोरोना वायरस के वैरिएंट्स भी आ रहे हैं। कुछ विशेषज्ञों ने तो यहां तक कहा है कि इन सब से बढ़कर कोरोना की जगह कोई दूसरी महामारी भी आ सकती है। अगली महामारी से निपटने के लिए किसी देश की तैयारी नहीं है। डब्ल्यूएचओ के अनुसार 14 से 20 जून के बीच भारत में कोरोना संक्रमण के सबसे अधिक 4,41,976 मामले मिले हैं। राहत की बात ये है कि ये इससे पिछले सप्ताह की तुलना में 30 फीसदी कम है। इसी तरह इस दौरान सबसे अधिक 16,329 मरीजों की मौत भारत में हुई, इसमें भी पहले की तुलना में 31 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है। आंकड़े बताते हैं कि भारत में दूसरी लहर धीमी पड़ गई है।

• 1918 की महामारी के बाद सबसे बड़ी और जानलेवा महामारी

• 4,41,976 मामले मिले 14 से 20 जून के बीच भारत में कोरोना संक्रमण के

• 16,329 मरीजों की कोरोना संक्रमण से 14 से 20 जून के बीच में हुई

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