औनलाइन गेम्स का भयावह जंजाल
Mukta|September 2021
कोरोनाकाल में सबकुछ औनलाइन होने से बच्चों में औनलाइन गेम खेलने की लत भी बढ़ गई है, इस कारण कई तरह की दिक्कतें सामने आने लगी हैं. ऐसे में मातापिता को खासा आगाह होने की जरूरत है.
सुरेशचंद्र रोहरा

औनलाइन गेम्स आज एक बड़ी चिंता का विषय बन गया है. परिणामस्वरूप देश के उच्चतम न्यायालय अर्थात सुप्रीम कोर्ट ने भी इस पर संज्ञान लेते हुए केंद्र सरकार को आदेश दिए हैं.

आज नौनिहालों में फैलता औनलाइन गेम्स का भयावह प्रकोप उन के जीवन के लिए स्याह पक्ष बन चुका है. यह एक राष्ट्रीय चिंता का विषय बन कर सामने है.

इस से अगर नजात न पाई गई तो भावी पीढ़ी पर इस का जो भयावह असर देखने को मिलेगा उस के लिए हमें तैयार रहना होगा. हमारे लिए यह चिंता का विषय है कि किस तरह नौनिहालों को इस जंजाल से बचाया जाए.

दरअसल, कोविड-19 महामारी ने बच्चों सहित घर के सभी सदस्यों को घर पर ही एक प्रकार से बंधक बना दिया है. बच्चों की पढ़ाई भी औनलाइन ही हो रही है. औनलाइन अध्ययन भले ही बच्चों के लिए वर्तमान समय के अनुसार विवशता ही है लेकिन यह विवशता धीरेधीरे बच्चों के लिए घातक सिद्ध हो रही है.

कई बच्चे औनलाइन गेम के आदी होते जा रहे हैं. वे अपने अभिभावकों से औनलाइन अध्ययन के नाम से मोबाइल लेते हैं पर उन्हें जैसे ही समय मिलता है वे औनलाइन गेम्स खेलना आरंभ कर देते हैं.

दरअसल, निरंतर मोबाइल स्क्रीन में नजरें टिकाने से आंखों पर बुरा प्रभाव तो पड़ता ही है, साथ ही, बच्चे औनलाइन गेम्स के आदी हो रहे हैं. इस से बच्चे मानसिक रूप से विकलांग हो रहे हैं.

आएदिन अपने आसपास और समाचारपत्रों में इस के दुष्प्रभावों के बारे में पढ़ते रहते हैं. यहां तक कि औनलाइन गेम इतना घातक है कि कई बच्चों में अपराध का भाव भी पैदा हो जाता है और वे इतने गुस्सैल हो जाते हैं कि कुछ भी अपराध कर जाते हैं.

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