“मुझे बोल्ड सीन करने से परहेज नहीं" वामिका गब्बी
Mukta|September 2021
शोहरत रातोंरात नहीं मिलती, इस के लिए तपना पड़ता है, अलग राह बनानी पड़ती है. 'ग्रहण' सीरीज देखने के बाद जिस भूरी आंख वाली खूबसूरत मनु यानी वामिका गब्बी की ऐक्टिग पर सब की नजर टिकी, वह यों ही यहां तक नहीं पहुंची.
शांतिस्वरूप त्रिपाठी

वैब सीरीज 'ग्रहण' की वजह से शोहरत बटोर रहीं अभिनेत्री वामिका गब्बी परिचय की मुहताज नहीं. मूलतया पंजाबी मगर हिंदी, तमिल, तेलुगू, मलयालम व पंजाबी भाषा की 20 फिल्मों तथा 10 म्यूजिक वीडियोज में वे अपने अभिनय का जलवा दिखा चुकी हैं.

वामिका ने अपने कैरियर की शुरुआत चंडीगढ़ में रहते हुए टीनएज उम्र में फिल्म 'जब वी मेट' से की थी. फिर हिंदी फिल्म 'सिक्सटीन' में वे हीरोइन बन कर आई थीं और काफी बोल्ड दृश्य किए थे. लेकिन इस फिल्म के बाद वे पंजाबी फिल्में करने लगी थीं. फिर उन्हें मलयालम फिल्म 'गोधा मिली, जिस ने उन्हें स्टार बना दिया और तब वे दक्षिण भारत में व्यस्त हो गई थीं. उन्होंने अब तक 20 से अधिक फिल्मों में अभिनय कर अपनी अलग पहचान बनाई है. लेकिन वैब सीरीज ‘ग्रहण' से बौलीवुड में उन की शानदार वापसी हुई है.

आप ने हिंदी फिल्म 'जब वी मेट' से कैरियर की शुरुआत की थी. तीनचार हिंदी फिल्मों में अभिनय करने के बाद आप ने हिंदी फिल्मों से दूरी बना ली थी. कोई खास वजह?

क्योंकि फिल्म 'सिक्सटीन' के अलावा सभी फिल्में बतौर बाल कलाकार थीं. उस वक्त मैं टीनएज थी. मेरी समझ में नहीं आ रहा था कि क्या करना चाहिए, तो मैं थिएटर करने लग गई. पढ़ाई भी कर रही थी. जब फिल्म 'सिक्सटीन' मिली, तो लगा कि अब कुछ होगा लेकिन फिल्म 'सिक्सटीन' के बाद भी कुछ अच्छा हुआ नहीं. उस के बाद मैं पंजाबी फिल्में करने लगी. दक्षिण की फिल्में करती रही.

अब जब मैं फिर हिंदी वैब सीरीज व फिल्में कर रही हूं, तो मैं बहुतकुछ सीख कर आई हूं. मैं ने हिंदी फिल्मों से दूरी नहीं बनाई थी, बल्कि अपने काम को एंजौय करने लगी थी. अपने काम से जो जुड़ाव होता है, उस से भी दूर हो गई थी. अब जो कुछ मेरी जिंदगी में हो रहा है वह अपनेआप हो रहा है.

मेरे मन में ऐसी कोई इच्छा नहीं थी कि अब मुझे इतनी शोहरत पानी है. न ही मेरे जेहन में कभी पैसे कमाने की बात थी और न आज है. और मैं यही चाहूंगी कि ऐसा कभी न हो. मैं सिर्फ यही चाहूंगी कि मेरे पास जो आ रहा है उस में जहां मुझे लगेगा कि इस में मुझे कुछ सीखने को मिलेगा, वह काम मैं करना चाहूंगी.

जहां कुछ उत्साहजनक नहीं लग रहा है मगर पैसे अच्छे मिल रहे हैं, वैसा काम कर के मैं ने देख लिया. घर में बेकार बैठे हैं और किसी फिल्म का औफर आ गया, तो कहानी पसंद न होने पर भी बेमन कर ली. क्योंकि उस वक्त मेरे सामने चौइस नहीं थी. काम करने में मजा भी नहीं आ रहा था. मगर अब हालात बदल गए हैं. अब मेरे पास चौइस है, अब मैं बहुत अच्छे ढंग से चयन कर पा रही हूं.

आप ने हिंदी फिल्म 'सिक्सटीन' में काफी बोल्ड दृश्य किए थे. क्या इस पर आप के मातापिता ने एतराज जताया था?

फिल्म ‘सिक्सटीन' में काफी बोल्ड दृश्य नहीं थे. ठीकठाक बोल्ड दृश्य ही थे. मेरे पिता ने शूटिंग से पहले ही पटकथा पढ़ी थी, इसलिए एतराज वाली बात नहीं उठी.

मुझे बोल्ड सीन करने से परहेज नहीं है बशर्ते वह किरदार ही बोल्ड हो. बिना किसी मतलब के बोल्ड सीन भरे जाएं तो मैं नहीं कर सकती. जिन दृश्यों का कहानी से संबंध नहीं है वे दृश्य महज दर्शकों को लुभाने के लिए रखना गलत है. मैं ऐसे दृश्य नहीं कर सकती. यदि कहानी को आगे बढ़ाने के लिए बोल्ड दृश्य की जरूरत है अथवा किसी रिश्ते की अहमियत के लिए वह दृश्य जरूरी है तो उसे करना मेरे काम का हिस्सा है. आखिरकार, मैं फिल्म के अंदर किसी न किसी इंसान व उस के अंदर के गुस्से, उस के प्यार वगैरह सबकुछ को निभाती हूं.

अब तक आप ने जो भी फिल्में या वैब सीरीज की हैं, उन में से किसे देख कर लगता है कि वह आप को नहीं करना चाहिए था?

हंसते हुए... ऐसा कुछ नहीं है. किसी फिल्म को करने का यदि मेरा अनुभव बुरा रहा तो उसी बुरे अनुभव से मैं वह बात सीख पाई, जो न सीख पाती. मैं ने सब से अधिक अपने बुरे अनुभवों से ही सीखा है. मैं यह नहीं चाहती कि आगे बुरे अनुभव न हों. मुझे अभी बहुतकुछ सीखना है तो मैं बुरे अनुभवों के लिए तैयार हूं.

आप दक्षिण में 'गोधा' सहित कई बेहतरीन फिल्में कर रही थीं तो फिर हिंदी वैब सीरीज 'ग्रहण' करने की वजह क्या रही?

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