महिलाएं और कैंसर
Sadhana Path|November 2021
आज बड़ी संख्या में महिलाएं भी कैंसर के रोग से पीड़ित हो रही हैं। महिलाओं में कैंसर होने के क्या हैं कारण, लक्षण व निवारण तथा इसके विभिन्न प्रकार? आइए जानें इस लेख से।
मीना भण्डारी

महिलाओं को चार प्रकार का कैंसर हो सकता हैबच्चेदानी के मुंह का कैंसर, ओवरी (अंडकोश) कैंसर, गर्भाशय कैंसर व स्तन कैंसर।

बच्चेदानी के मुंह का कैंसर

इसमें मासिक धर्म अनियमित हो जाता है, पानी ज्यादा आता रहता है, संभोग के बाद खून आने लगता है। प्रथम अवस्था में चिकित्सकीय परामर्श व औषधियों से इलाज हो सकता है। लापरवाही बरतने पर यह बढ़ जाता है। अंतिम अवस्था में गंदा पानी बाहर आने लगता है।

इस प्रकार का कैंसर सिगरेट पीने से, छोटी आयु में विवाह करने से, एक से ज्यादा पुरुषों से संभोग करने से होता है।

ओवरी (अंडकोशीय) कैंसर

इस प्रकार के कैंसर में ओवरी के नीचे गांठ बनने लगती है। कई बार गांठ के घूमने से रोगी महिला को तीव्र दर्द होता है। इस बीमारी का पता अंदरूनी जांच-पड़ताल से चल जाता है। ओवरी की स्क्रीनिंग मुश्किल है। इसमें पेट फूलने लगता है।वजन घटने लगता है। ये कैंसर की अंतिम अवस्था के लक्षण हैं। इस अवस्था में शल्य-क्रिया करानी पड़ती है। रोगी पूरी तरह ठीक हो जाए यह आवश्यक नहीं।

गर्भाशय कैंसर

इसका प्रमुख लक्षण मासिक धर्म का अनियमित होना व जरूरत से ज्यादा मात्रा में होना है। गर्भाशय की बायोप्सी से कैंसर के बारे में स्पष्ट होता है। प्रारंभिक अवस्था में यह औषधियों से (प्रमुखतया होम्योपैथिक औषधियों से) ठीक हो सकता है। अंतिम अवस्था में ऑपरेशन के बाद भी दवाइयां, इंजैक्शन आदि चलते हैं।

स्तन कैंसर

इसकी शुरूआत स्तन में गांठ से होती है। महिला को स्वयं ही वक्ष छूने से इस गांठ का पता चल जाता है। इसमें कई बार निपल से खून रिसने लगता है।

दोनों वक्षों के आकार में परिवर्तन आने लगता है। प्रारंभ में होम्योपैथिक औषधियों से उपचार संभव है। बाद में ऑपरेशन भी कराना पड़ सकता है। ऑपरेशन में प्रभावित स्तन को निकालना भी पड़ सकता है। कुछ अच्छे सर्जन अब स्तन निकालने के बाद प्लास्टिक सर्जरी द्वारा नया स्तन बना देते हैं। कैंसर एक जानलेवा रोग है। इसके लिए सजग रहें, सफाई का ध्यान रखें, एक जीवन साथी के प्रति समर्पित रहें, वक्षों की जांच स्नान करते समय महीने में एक बार स्वयं करती रहें।

स्तन कैंसर कैसे होता है?

हमारा शरीर असंख्य कोशों का बना हुआ है। ये कोश भिन्न-भिन्न स्वरूप के होते हैं और अलग-अलग कार्य करते हैं। प्रत्येक कोश के लिए एक या अनेक निर्धारित कार्य होते हैं। 15 दिन से 6 माह के अंदर पुराने कोश नष्ट हो जाते हैं और नए कोश बन जाते हैं। इस प्रकार शरीर के क्रियाकलाप उचित रूप से चलते रहते हैं।

कभी-कभी कोई एक कोश किसी उत्प्रेरक अथवा उपापचयी गड़बड़ी के चलते अपने से मिलता-जुलता विकृत कोश उत्पन्न करता है। ये विकृत कोश अपनी आयु के बाद नष्ट नहीं होते, जिससे इन विकृत कोशों के समूह की एक गांठ बन जाती है। इसी गांठ को कैंसर कहते हैं। कभी-कभी इस गांठ से कुछ कोश अलग होकर शरीर में फैल जाते हैं। इसे कैंसर का फैलाव (मेटास्टेसिस) कहते हैं। स्थान के अनुसार गले का, त्वचा का, गुदा का, आमाशय का, हड्डी का, फेफड़े का, मुंह का कैंसर आदि होते हैं। इसी प्रकार स्तन कैंसर होता है जो अधिकांशतः स्त्रियों में मिलता है। 1000 स्तन कैंसर के रोगियों में एक रोगी पुरुष भी मिलता है।

स्तन कैंसर का कारण

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