वास्तु अनुसार हो दिवाली की तैयारी
Sadhana Path|November 2021
दिवाली के पावन अवसर पर हम सभी की यही कोशिश होती है कि पूजा व अन्य प्रकार की तैयारियों में किसी प्रकार की कमी न होने पाएं ऐसे में वास्तुशास्त्र के कुछ नियम हमारे लिए बहुत लाभकारी सिद्ध हो सकते हैं।
ऋचा कुमारी

यूं तो हम सभी दिवाली पूरे हर्षोल्लास के साथ मनाते क्योंकि यह त्योहार जितनी पवित्रता के साथ मनाया जाएगा मां लक्ष्मी हम पर अपनी उतनी ही अधिक कृपा बरसाएंगी।

दीपावली पर्व केवल पर्व ही नहीं इसके साथ ज्योतिष एवं वास्तु का समावेश भी है। वास्तुशास्त्र में चार दिशाएं होती है। तथा स्वास्तिक चारों दिशाओं का बोध कराता है। पूर्व, दक्षिण, पश्चिम, उत्तर। चारों दिशाओं के देव पूर्व के इन्द्र, दक्षिण के यम, पश्चिम के वरुण, उत्तर के कुबेर। सुख, शान्ति व समृद्धि के लिए जरूरी है चारों दिशाओं की सफाई, सजावट व पूजना जिसका सही अवसर है दिवाली।

दीपावली की सफाई पर सबकी विदाई हो जाती है। मकानों, दुकानों में रंग-रोशन कराने से सकारात्मक ऊर्जाओं का आगमन हो जाता है। जहां गंदगी, कबाड़ भरा रहता है वहां लक्ष्मी का आगमन नहीं होता। यह पर्व गंदगी और कबाड़ को घर से निकालने के लिए आता है।

वास्तु का मुख्य नियम नकारात्मक ऊर्जाओं के मार्ग को बन्द करना एवं सकारात्मक ऊर्जाओं के आगमन का मार्ग खोलना। सकारात्मक ऊर्जाओं को बुलाने में दीपावली महापर्व सहायक का काम करता है। तीन दिन तक दीये जलते हैं पूजा की जाती है मंत्रों का उच्चारण होता है। घंटे-घंटियां बजायी जाती है। अगरबत्तियां, धूप जलायी जाती है। कपूर से आरती की जाती है। उपरोक्त सभी क्रियाओं से निकलने वाली ऊर्जाएं भूखण्ड, आवास, दुकान इत्यादि में नकारात्मक ऊर्जाओं का शमन करने में सहायक हो जाती है। खुशी एवं उल्लास का माहौल देखने को मिलता है। स्वास्तिक का अपना एक अस्तित्व है। बगैर स्वास्तिक बनाये पूजा आरम्भ नहीं की जाती। वास्तु के निम्न उपायों द्वारा आप न केवल लक्ष्मी जी को प्रसन्न कर सकते हैं बल्कि जीवन में सुख समृद्धि भी पा सकते हैं।

1. घर में किसी भी प्रकार का टूटा-फूटा या खराब सामान न रखें। दिवाली के लिए जिस दिन भी सफाई करना प्रारम्भ करें सर्व प्रथम इस प्रकार के कूड़े-करकट को ठिकाने लगा दें।

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