पूजा में पूजन सामग्री का महत्त्व
Sadhana Path|October 2021
यूं तो पूजा मन की आस्था का भाव है उसके लिए किसी सामग्री विशेष की नहीं श्रद्धा की जरूरत होती है, फिर भी व्यावहारिक तौर पर यदि किसी पूजा को पूर्ण, सही व संपन्न करने या कहें तो वह पूजा बिना पूजन सामग्री के अधूरी कहलाती है। कौन सी है पूजन की वह सामग्रियां तथा क्या है उसका महत्त्व? जानिए इस लेख से।
शशिकांत 'सदैव'

यूं तो पूजा चुपचाप, अकेले किसी कोने में बैठकर भी की जा सकती है उसके लिए किसी ढोल-मंजीरे या धूप-दीपक की आवश्यकता नहीं होती। यदि एक ओर यह बात सत्य है तो दूसरी बात बिना पूजन सामग्री के पूजा अधूरी होती है यह बात भी उतनी ही सही है। पूजा में पूजन सामग्री कोई औपचारिक नहीं बल्कि भक्त का अपने प्रभु के प्रति प्रेम का भाव समर्पित करने का एक ढंग होता है, जिसमें पूजन की हर सामग्री का एक प्रतीकात्मक ढंग होता है उसका धार्मिक, आध्यात्मिक एवं मनोवैज्ञानिक आधार होता है।

पूजन की सभी सामग्री भक्त का अपना अहोभाव प्रकट करती है। जिस तरह हम अपने प्रेमी से जब मिलने जाते हैं तो उसके लिए हम तमाम तरह के उपहार जैसेफल, फूल, मिष्ठान या कोई कपड़ा वस्तु आदि लेकर जाते हैं कि उसे अच्छा लगेगा उसी तरह हम भगवान की पूजा अर्चना करते हैं तो न केवल हम उसको उपहार आदि चढ़ाते हैं बल्कि उसका साजशृंगार भी करते हैं। जैसेहम अपने प्रेमी को रिझाने व मनाने के लिए कभी गाकर तो कभी नाचकर मनाते हैं वैसे ही हम प्रभु के सामने पूजा के दौरान भजन, कीर्तन, ढोल-मंजीरे आदि से उसे मनाते व रिझाते हैं। और उसी मस्ती में हम गाते-झूमते भी हैं, कभी उसे माला पहनाते हैं तो कभी शीश नवाते हैं।

इतना ही नहीं उसे सुस्वादु से सुस्वादु भोजन, मिठाई या प्रसाद का भोग भी लगाते हैं। प्रभु के प्रति भक्ति का यही भाव है जिसके कारण भक्त पूजा में प्रतीक के रूप में विभिन्न सामग्रियों का उपयोग करता है।

यूं तो हर देवी-देवता तथा त्योहार एवं अवसर अनुसार पूजा में सामग्री का कम ज्यादा या भिन्न होना हो सकता है, लेकिन सामग्री जो अमूमन हर पूजा में विशेष व जरूरी होती है वह हैफल, फूल, दीप, धूप, कपूर, कलश, नारियल, सिंदूर, कुमकुम, चंदन, चावल, इन सभी सामग्रियों का पूजा में विशेष महत्त्व है।

धूप-अगरबत्ती

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