नवरात्रों में शक्तिपीठों के दर्शन
Sadhana Path|October 2021
हिन्दू धर्म में नवरात्रों का विशेष महत्त्व है। ऐसे में लोग मां के शक्तिपीठों के दर्शन की कामना करते हैं परंतु समय के अभाव एवं जिम्मेदारियों तथा महंगाई के चलते कई लोग इससे वंचित रह जाते हैं। तो आइए इस लेख के माध्यम से मां के उन सभी शक्तिपीठों का दर्शन करें।
नीलम

51 शक्तिपीठों के संदर्भ में जो कथा प्रचलित है वह यह है कि सती के पिता राजा प्रजापति दक्ष ने एक यज्ञ का आयोजन किया था, परंतु सती के पति भगवान शिव को इस यज्ञ में शामिल होने के लिए निमंत्रण नहीं भेजा। जिससे भगवान शिव इस यज्ञ में शामिल नहीं हुए, लेकिन सती जिद कर यज्ञ में शामिल होने चली गईं, वहां शिव की निंदा सुनकर वह यज्ञकुंड में कूद गईं, तब भगवान शिव सती के वियोग में विह्वल होकर सती का शव अपने सिर पर धारण कर संपूर्ण भूमंडल पर भ्रमण करने लगे। भगवती सती ने तब अंतरिक्ष में शिव को दर्शन दिए और उनसे कहा कि जिसजिस स्थान पर उनके शरीर के खंड विभक्त होकर गिरेंगे, वहां महाशक्तिपीठ का उदय होगा। सती का शव लेकर शिव पृथ्वी पर विचरण करते हुए नृत्य भी करने लगे, जिससे पृथ्वी पर प्रलय की स्थिति उत्पन्न होने लगी। इस पर विष्णु ने सुदर्शन चक्र से सती के शरीर को खंड-खंड करने का विचार किया। जब-जब शिव नृत्य मुद्रा में पांव पटकते, विष्णु अपने चक्र से शरीर का कोई अंग काटकर उसके टुकड़े पृथ्वी पर गिरा देते। इस प्रकार जहां-जहां सती के अंग के टुकड़े, वस्त्र या आभूषण गिरे, वहीं शक्तिपीठ का उदय हुआ।

शक्तिपीठों के उद्भव कथा का वर्णन विभिन्न पुराणों एवं शाक्त शैव ग्रंथों में मिलता है, किन्तु उनकी संख्या को लेकर सर्वत्र अंतर मिलता है। श्रीमद्देवीभागवत में इनकी संख्या 108 है, तंत्र चूडामणि में 52 है, देवी पुराण -महाभागवत में 51 है, शिवचरित में भी 51 है, देवीगीता में 51 है, किन्तु परंपरागत रूप में 51 शक्तिपीठ मान्य हैं। इस चैत्र नवरात्र पर हम अपने आलेख के जरिए देश-विदेश में स्थित इसी 51 शक्तिपीठों की जानकारी आप तक पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं कि कौन सा शक्तिपीठ कहां स्थित है।

1. किरीट शक्तिपीठ

पश्चिम बंगाल के हुगली नदी के तट लालबाग कोट पर स्थित है किरीट शक्तिपीठ, जहां सती माता का किरीट यानी शिराभूषण या मुकुट गिरा था। यहां की शक्ति 'विमला' अथवा 'भुवनेश्वरी' तथा 'भैरव' संवर्त हैं।

2. कात्यायनी पीठ (वृंदावन)

उत्तर प्रदेश, मथुरा के भूतेश्वर में स्थित है कात्यायनी वृंदावन शक्तिपीठ, जहां सती का केशपाश गिरा था। यहां की शक्ति देवी 'कात्यायनी' हैं।

3.करवीर शक्तिपीठ

महाराष्ट्र के कोल्हापुर में स्थित है यह शक्तिपीठ, जहां माता का त्रिनेत्र गिरा था। यहां की शक्ति महिषासुरमर्दिनी तथा भैरव क्रोधीश हैं। यहां महालक्ष्मी का निज निवास माना जाता है।

4. श्री पर्वत शक्तिपीठ

इस शक्तिपीठ को लेकर विद्वानों में मतांतर है कुछ विद्वानों का मानना है कि इस पीठ का मूल स्थल लद्दाख है, जबकि कुछ का मानना है कि यह असम के सिलहट में है, जहां माता सती का दक्षिण तल्प यानी कनपटी गिरा था। यहां की शक्ति श्री सुंदरी एवं भैरव सुंदरानंद हैं।

5. विशालाक्षी शक्तिपीठ

उत्तर प्रदेश, वाराणसी के मीरघाट पर स्थित है विशालाक्षी शक्तिपीठ जहां माता सती के दाहिने कान के मणि गिरे थे। यहां की शक्ति 'विशालाक्षी' तथा भैरव 'काल भैरव' हैं।

6. गोदावरी तट शक्तिपीठ

आंध्रप्रदेश के कब्बूर में गोदावरी तट पर स्थित है यह शक्तिपीठ, जहां माता का वामगण्ड यानी बायां कपोल गिरा था।

8. पंच सागरशक्तिपीठ

इस शक्तिपीठ का कोई निश्चित स्थान ज्ञात नहीं है, लेकिन यहां माता के नीचे के दांत गिरे थे। यहां की शक्ति वाराही ' तथा भैरव 'महारुद्र' हैं।

9. ज्वालामुखी शक्तिपीठ

हिमाचल प्रदेश के कांगड में स्थित है यह शक्तिपीठ, जहां सती का जिह्वा गिरी थी। यहां की शक्ति 'सिद्धिदा' व भैरव 'उन्मत्त' हैं।

10. भैरव पर्वत शक्तिपीठ

इस शक्तिपीठ को लेकर विद्वानों में मतभेद है। कुछ गुजरात के गिरिनार के निकट भैरव पर्वत को तो कुछ मध्य प्रदेश के उज्जैन के निकट क्षिप्रा नदी तट पर वास्तविक शक्तिपीठ मानते हैं, जहां माता का ऊर्ध्व ओष्ठ गिरा है। यहां की शक्ति 'अवंती' तथा 'भैरव'लबकर्ण' हैं।

11. अट्टहास शक्तिपीठ

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