बाल कहानियों की अलबेली और चटपटी दुनिया
Samay Patrika|September 2021
दादा-दादी की कहानियों का पिटारा

सुधा मूर्ति की कहानियाँ इतनी रोचक होती हैं कि उन्हें बार-बार पढ़ने का मन करता है। प्रभात प्रकाशन से उनकी नई किताब 'दादा-दादी की कहानियों का पिटारा' प्रकाशित हुई है। इसमें उन्होंने ऐसी कहानियों को संकलित किया है जो उन्होंने लॉकडाउन के दौरान संजोयी हैं। इस संकलन में कुल 19 कहानियां हैं। पहली कहानी चावल के धरती पर आने की कथा है। बच्चे अज्जी से कहते हैं कि वे एक कहानी सुनाएँ, इसपर वे कहती हैं 'यह कहानी उसी की है, जिसे तुमने अभी रात के खाने में खाया है-चावल के बारे में। चावल हमारे रोज के खाने का बहुत जरूरी हिस्सा है और हम चावल व गेहूँ के बिना आज हमारे खाने की कल्पना भी नहीं कर सकते।'

अज्जी ने कहानी शुरू की कि एक समय ऐसा भी था जब इनसान बादलों पर चल सकता था। स्वर्ग जाने के लिए उसे किसी तरह का प्रतिबंध नहीं था। वह कहीं भी आ जा सकता था। लेकिन माधव नाम के व्यक्ति से कुछ ऐसा हो गया कि सभी मनुष्यों पर जीवित रहने तक स्वर्ग जाने पर रोक लगा दी गई। माधव यह जानने को उत्सुक था कि स्वर्गलोक में भगवान कैसे रहते हैं, किस तरह काम करते और क्या खाते हैं। उसकी मुलाकात भगवान से हुई। वह देवी-देवताओं के कार्यों को देखकर हैरान हुआ। जब उसने अनाज की देवी अन्नपूर्णा को देखा तो वह मंत्रमुग्ध हो गया। अन्नपूर्णा के घर पर आने का मौका मिलते ही माधव ने स्वादिष्ट भोजन चखा। वहाँ चावल उसने पहली बार देखा और खाया। चावल के बारे में अधिक जानकारी देने के लिए माधव को अन्नपूर्णा ने उसकी खेती दिखाई और उससे संबंधित जरूरी बातें बतायीं-बोना, कूटना आदि सभी चरणों से उसे परिचित कराया। माधव ने मन में सोचा 'मैं चाहता हूँ कि हर कोई जीवन में कम-से-कम एक बार तो चावल का स्वाद जरूर चखे, फिर चाहे उन्हें केवल एक चम्मच ही चावल खाने के लिए क्यों न मिले।'

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Samay Patrika
October 2021

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October 2021

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दादा-दादी की कहानियों का पिटारा

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September 2021

पिशाच उजले चेहरों के बदनुमा दाग

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Samay Patrika
September 2021

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Samay Patrika
September 2021

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August 2021