विरोधाभासों से बेपरवाह गुजरती जिंदगी
Samay Patrika|September 2021
यह पुस्तक मूल रूप से डेनिश में 2011 में प्रकाशित हुई थी। वर्ष 2012 में इस उपन्यास के लिए जब लेखिका हेल्ले हेल्ले को प्रतिष्ठित साहित्यिक पुरस्कार द गोल्डन लॉरेल से सम्मानित किया गया तो मेरा ध्यान इस उपन्यास ने अपनी ओर खींचा। मैंने इसे पढ़ा और तब ही इसका हिंदी अनुवाद करना तय कर लिया था। लेखिका हेल्ले हेल्ले और उनके प्रतिष्ठित प्रकाशन ग्यूलडेंडल ग्रुप एजेंसी ने सहर्ष स्वीकृति दे दी। इस बीच मुझे डेनिश लिटरेचर संस्था के सचिव श्री पीटर होल्लेरूप ओलेसेन से ज्ञात हुआ कि डेनिश आर्ट फाउंडेशन' में डेनिश साहित्य का दूसरीभाषाओं में अनुवाद के लिए अनुदान का प्रावधान है, सो इस अनुदान के लिए आवेदन किया गया और सौभाग्य से उपन्यास के हिंदी प्रकाशन के लिए 'डेनिश आर्ट फाउंडेशन से अनुदान प्राप्त हुआ।
अर्चना पैन्यूली

लेखिका हेल्ले ने इस पुस्तक में बीसवीं सदी के अस्सी के जाते हुए दशक का कालखंड दर्शाया है, जब वह स्वयं उपन्यास की नायिका की उम्र की रही होगी। तब स्मार्टफोन, आईफोन और व्हाट्सऐप वगैरह तो क्या, मोबाइल फोन का भी इस्तेमाल नहीं था। उपन्यास का कथा-सूत्र इस प्रकार है-डॉर्टे, एक बीस साल की नवयुवती, ग्लुम्सो में रेलवे स्टेशन के बगल में किराए के एक बँगले में रहती है। वह ग्लुम्सो प्रांत और राजधानी कोपनहेगन के बीच लगभग 80 किमी. दैनिक आवागमन करती है। कथित तौर पर वह कोपनहेगन विश्वविद्यालय में पढ़ती है और विश्वविद्यालय के आम परिसर में साहित्य पढ़ने के लिए नामांकित है। उसके माता-पिता तो यही सोचते हैं कि वह हर दिन अपनी पढ़ाई के लिए विश्वविद्यालय जा रही है, लेकिन वह विश्वविद्यालय नहीं जाती है। वह अपना समय सड़कों एवं गलियों में घूमते हुए और कवियों के साथ गोष्ठियों में बिताती है। उसमें लिखने की बेचैनी है, मगर अभी उतना अच्छा लिख नहीं पाती।

अपने पूर्व प्रेमी पेअर फिनलैंड के साथ वह अतीत में डूबती -उतराती है। वह आवेगों में बहती है और संबंधों को बनाने के लिए भटकती है। रात में आने-जाने वाली मालगाड़ियाँ उसे जगाती हैं और जब-तब वह अपनी चहेती बुआ के पास जाती रहती है। माँ से अधिक वह अपनी बुआ के निकट दिखती है। डॉर्टे का नाम उसकी बुआ के नाम पर रखा गया है और बुआ की तरह ही उसके भी पुरुषों के साथ संबंध अस्थिर हैं। वे दोनों वही करती हैं, जो वे आमतौर पर करना चाहती हैं, बजाय इसके कि उन्हें क्या करना चाहिए या क्या नैतिकता है! वे इन पलों में जी रही हैं, भले ही जीवन बिखरता जा रहा हो।

Continue reading your story on the app

Continue reading your story in the magazine

MORE STORIES FROM SAMAY PATRIKAView All

गांधी को नए सिरे से खोजती किताब

इस किताब का हर पन्ना कोई नयी कहानी कहता है जो गांधी के बारे में अनसुना और अनकहा है। रामचंद्र गुहा की पुस्तक 'गांधी' के बारे विस्तार से बता रहे हैं जानेमाने टीवी पत्रकार ब्रजेश राजपूत...

1 min read
Samay Patrika
October 2021

कोरोनाकाल की सच्ची कहानियाँ - उम्मीद जगाने वाला कहानी-संग्रह

कोरोनाकाल की सच्ची कहानियाँ पुस्तक में कुल उन्नीस कहानियाँ हैं। संग्रह में 'लॉकडाउन टूट गया', 'जीवन में भागने में नहीं', 'कर्मबीरा', 'नई सुबह', 'रुपया देना है', 'फिर करीब ले आया कोरोना' आदि कहानियाँ शामिल हैं। ये कहानियाँ एक उम्मीद जगाती हैं, एक विश्वास पैदा करती हैं कि हम विकट परिस्थितियों में भी चुनौतियों का सामना करते हुए आगे बढ़ने का साहस करते हैं। कोई भी महामारी मानव की दृढ़-इच्छाशक्ति के आगे बेबस नजर आती है। मुश्किल दौर में हमने मानवता का धर्म निभाया और मिलकर कठिन दौर का मुकाबला किया। इस पुस्तक के लेखक हैं डॉ. रमेश पोखरियाल 'निशंक'। पुस्तक का प्रकाशन प्रभात प्रकाशन ने किया है। यह पुस्तक क्यों और कैसे लिखी गई, खुद पोखरियाल जी बता रहे हैं...

1 min read
Samay Patrika
October 2021

किन्नर : सेक्स और सामाजिक स्वीकार्यता

देखा जाये तो इन्सानी वजूद के रूप में जन्म लेने के बावजूद ज़रा -सी शारीरिक असमानता के चलते परित्यक्त होती जाने कितने ही सन्तानों के आर्तनाद गूंज रहे हैं चारों तरफ़।

1 min read
Samay Patrika
October 2021

ब्रेन ड्रेन की त्रासदी पर एक खास उपन्यास

यह पुस्तक एक उपन्यास है, जो यथार्थ के पंख लगाकर काल्पनिकता के धरातल पर एक सशक्त भारत की आधारशिला रखता है।

1 min read
Samay Patrika
October 2021

बाल कहानियों की अलबेली और चटपटी दुनिया

दादा-दादी की कहानियों का पिटारा

1 min read
Samay Patrika
September 2021

पिशाच उजले चेहरों के बदनुमा दाग

पत्रकारिता के साथ संजीव पालीवाल ने उपन्यास लेखन के क्षेत्र में भी अपनी कलम चलायी है। उनका पहला उपन्यास 'नैना' पाठकों में बेहद लोकप्रिय हुआ था। हाल में उनका दूसरा उपन्यास 'पिशाच प्रकाशित हुआ है।

1 min read
Samay Patrika
September 2021

ज़ेन : सरल जीवन जीने की कला

शुनम्यो मसुनो ज़ेन को आधुनिक दुनिया के लिए बेहद सरल तरीके से प्रस्तुत करने के लिए जाने जाते हैं। वे एक प्रसिद्ध बौद्ध संन्यासी हैं तथा पुरस्कार प्राप्त ज़ेन गार्डन डिज़ाइनर भी हैं।

1 min read
Samay Patrika
September 2021

जीवन से भरी एक स्त्री

मशहूर साहित्यकार उषाकिरण खान के बारे में

1 min read
Samay Patrika
September 2021

विरोधाभासों से बेपरवाह गुजरती जिंदगी

यह पुस्तक मूल रूप से डेनिश में 2011 में प्रकाशित हुई थी। वर्ष 2012 में इस उपन्यास के लिए जब लेखिका हेल्ले हेल्ले को प्रतिष्ठित साहित्यिक पुरस्कार द गोल्डन लॉरेल से सम्मानित किया गया तो मेरा ध्यान इस उपन्यास ने अपनी ओर खींचा। मैंने इसे पढ़ा और तब ही इसका हिंदी अनुवाद करना तय कर लिया था। लेखिका हेल्ले हेल्ले और उनके प्रतिष्ठित प्रकाशन ग्यूलडेंडल ग्रुप एजेंसी ने सहर्ष स्वीकृति दे दी। इस बीच मुझे डेनिश लिटरेचर संस्था के सचिव श्री पीटर होल्लेरूप ओलेसेन से ज्ञात हुआ कि डेनिश आर्ट फाउंडेशन' में डेनिश साहित्य का दूसरीभाषाओं में अनुवाद के लिए अनुदान का प्रावधान है, सो इस अनुदान के लिए आवेदन किया गया और सौभाग्य से उपन्यास के हिंदी प्रकाशन के लिए 'डेनिश आर्ट फाउंडेशन से अनुदान प्राप्त हुआ।

1 min read
Samay Patrika
September 2021

नारीवादी निगाह से

इस किताब की बुनियादी दलील नारीवाद को पितृसत्ता पर अन्तिम विजय का जयघोष सिद्ध नहीं करती इसके बजाय वह समाज के एक क्रमिक लेकिन निर्णायक रूपान्तरण पर जोर देती है ताकि प्रदत्त अस्मिता के पुरातन चिह्नों की प्रासंगिकता हमेशा के लिए खत्म हो जाए। नारीवादी निगाह से देखने का आशय है मुख्यधारा तथा नारीवाद, दोनों की पेचीदगियों को लक्षित करना। यहाँ जैविक शरीर की निर्मिति, जातिआधारित राजनीति द्वारा मुख्यधारा के नारीवाद की आलोचना, समान नागरिक संहिता, यौनिकता और यौनेच्छा, घरेलू श्रम के नारीवादीकरण तथा पितृसत्ता की छाया में पुरुषत्व के निर्माण जैसे मुद्दों की पड़ताल की गई है। एक तरह से यह किताब भारत की नारीवादी राजनीति में लम्बे समय से चली आ रही इस समझ को दोबारा केन्द्र में लाने का जतन करती है कि नारीवाद का सरोकार केवल महिलाओं से नहीं है। इसके उलट, यह किताब बताती है कि नारीवादी राजनीति में कई प्रकार की सत्ता-संरचनाएँ सक्रिय हैं जो इस राजनीति का मुहावरा एक दूसरे से अलग-अलग बिन्दुओं पर अन्तःक्रिया करते हुए गढ़ती हैं।

1 min read
Samay Patrika
August 2021