कैसे गुम हो गया भारतीय जंगलों का शहज़ादा कहलाने वाला चीता?
Samay Patrika|December 2020
कबीर संजय की पुस्तक 'चीता' बेहद ख़ास दस्तावेज है। यह उन किताबों में शामिल की जा सकती है जिसे आप संजो कर रख सकते हैं। अपने बच्चों को पढ़कर सुना सकते हैं। उन्हें प्रकृति और जीवों से लगाव के लिए प्रेरित कर सकते हैं
कबीर संजय

चीता भारत से लुप्त हो गया है। यह एक या दो दशक पहले नहीं हुआ, बल्कि 70 साल पहले यह हुआ। भारत में अंतिम तीन चीते 1947 में मार गिराए गए थे। उनका शिकार किसी अंग्रेज़ या विदेशी ने नहीं किया था। उन्हें मौत की नींद सुलाया था छत्तीसगढ़ के कोरिया स्टेट के राजा सरगुजा ने। भारत में कभी चीते बहुतायत में थे। लेकिन आज वे कहीं नहीं हैं। ऐसा क्या हुआ कि चीता भारतीय नक्शे से गायब हो गया? इसका जवाब कबीर संजय की किताब 'चीता : भारतीय जंगलों का गुम शहज़ादा' देती है। किताब का प्रकाशन वाणी प्रकाशन समूह के नए उपक्रम 'वाणी पृथ्वी' के तहत किया गया है। लेखक कबीर संजय कहानियाँ लिखते हैं। साहित्य और पत्रकारिता से अच्छा नाता है। सामाजिक तथा राजनीतिक गतिविधियों में शामिल रहते हैं। प्रकृति से अथाह प्रेम की वजह रही कि फेसबुक पर उनका अपना पेज है जिसका नाम है 'जंगलकथा'। पर्यावरण और जीवन की चर्चा उनके फेसबुक पन्ने पर बहुत अच्छी और रोचक जानकारी से भरपूर होती है। कबीर संजय की पुस्तक 'चीता' बेहद ख़ास दस्तावेज है। यह उन किताबों में शामिल की जा सकती है जिसे आप संजो कर रख सकते हैं। अपने बच्चों को पढ़कर सुना सकते हैं। उन्हें प्रकृति और जीवों से लगाव के लिए प्रेरित कर सकते हैं।

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