प्यार का साया
Vanitha Hindi|February 2020
एक्सीडेंट के बाद रिदम को हर पल किसी के आसपास होने का अहसास होता, जबकि सामने मंगेतर पलक होती। क्या वह उसके प्यार का साया था?
प्राची भारद्वाज

रिदम ने आंखें खोलने की कोशिश की। हॉस्पिटल के इस कमरे में उसके सिवा और कोई नहीं था। हाथ में आईवी नीडल के जरिए मेडिसिन उसके शरीर में जा रही थी। शायद इसीलिए वह इतनी सुस्ती महसूस कर रहा है। इतने में 2 लड़कियां रूम में दाखिल हुईं - एक नर्स और गुलाबी सूट पहने एक । और लड़की। वह लड़की गुमसुम थी। नर्स ने बिना कुछ बोले-पूछे उसकी दवाई चेक की और वापस लौट गयी। रिदम ने फिर आंखें बंद कर लीं।।

"बस, हमारा बेटा ठीक हो जाए, तो अपने घर चलें," हॉस्पिटल की कैंटीन में बैठे रामेश्वर ने चाय का आखिरी छूट खत्म करती अपनी पत्नी सुधा से कहा। उनका 28 वर्षीय इकलौता बेटा रिदम हॉस्पिटल में दाखिल था। बेटे की हालत शारीरिक तौर पर कुछ बेहतर होने लगी थी, लेकिन मानसिक स्थिति अब भी जस की तस बन हुई थी। डॉक्टर ने डिस्चार्ज के वक्त हिदायत दी, "आप जानते हैं कि शॉक के कारण रिदम को पार्शियल मेमोरी लॉस हुआ है। रिदम को केवल आप । दोनों और बचपन की पुरानी बातें व दोस्त याद हैं। अपनी जिंदगी का जो हिस्सा यह भूल गया है वह सब याद दिलाने में आपको मदद करनी होगी। उस समय से रिलेटेड बातें इसके सामने दोहराएंगे, तो याददाश्त जल्दी ठीक हो सकेगी।"

आंखें मूंदे रिदम की हालत देख सुधा की आंखों के कोरों से आंसू छलक आए। रामेश्वर डिस्चार्ज का पेपर वर्क पूरा करवा कर रूम में सामान समेटने में सुधा की मदद कर रहे थे कि अचानक बेड पर लेटा रिदम कसमसाने लगा। पसीना-पसीना हो गए रिदम ने घबराहट में आंखें खोली और उठ बैठा, "मां।"उसकी पुकार पर सुधा उसकी ओर दौड़ पड़ीं और उसके माथे से पसीना पोंछने लगीं। “फिर वही सपना मां, हर बार वही एक सपना। मुझे लगता है जैसे मैं खड़ा देख रहा हूं और मेरे सामने एक कार खड़ी है, जिसके अंदर से बेबस आंखों का जोड़ा मुझे ही ताक रहा है। इतनी छटपटाहट होती है इस सपने से मुझे। क्यों मां? क्यों इतना तड़प उठता हूं मैं। क्या हुआ है मेरे साथ मां, बता दो ना, प्लीज।"

सुधा कुछ बोल पाती इससे पहले रिदम के बचपन के दोस्त विभाष और नकुल कमरे में आ गए। उनकी नमस्ते का जवाब देते हुए इशारे से सुधा ने उन्हें कमरे से बाहर बुलाया, "देखो बच्चो, आज ही डॉक्टर से बात हुई है। रिदम को पुरानी बातें याद दिलाने से उसके दिमाग पर जोर पड़ सकता है इसलिए कोई भी ऐसी बात ना करना, जिससे उसे तकलीफ हो। समझ रहे हो ना तुम दोनों।" ।

क्या सुधा डॉक्टर की बात ठीक से समझ नहीं पायी थी, लेकिन रामेश्वर भी तो वहीं थे। उन्होंने क्यों अपनी पत्नी की बात पर सहमति जतायी?

घर वापस लौटने के बाद रिदम ज्यों ही अपने रूम में लेटा, उसकी नजर खिड़की पर सजे फ्लावर वास पर गयी। ताजा पिंक लिली देखते ही उसके सिर में एक अजीब सी जकड़न हुई। उसे ऐसा लगा जैसे पिंक लिली के ठीक साथ में एक गुलाबी दुपट्टा लहराया हो। लेकिन कमरे में उसके अलावा कोई ना था। तभी सुधा ने कमरे में प्रवेश किया, “रिदम, अभी तुमसे मिलने पलक आनेवाली है।" लेकिन रिदम की आंखों की रिक्तता ने साफ दर्शा दिया कि उसे पलक याद नहीं है। "पलक तुम्हारी होनेवाली मंगेतर है, रिदम," मां के कहने पर रिदम का सिर फिर चकराया। सुधा ने बताया कि रिदम और पलक के पिताओं की पुरानी दोस्ती के कारण उनका रिश्ता तय किया गया और जल्द ही मंगनी होनेवाली थी कि तभी रिदम का एक्सीडेंट हो गया। उसकी बिगड़ी हालत में सगाई का प्रोग्राम करना मुमकिन नहीं था। पलक और उसके परिवारजन रिदम के ठीक होने का इंतजार कर रहे हैं। ओह ! कितना बुरा लगेगा पलक को यह जान कर कि रिदम को उसके बारे में कुछ भी याद नहीं।

ब्लैक जंपसूट पहने साधारण कद-काठीवाली पलक ‘हेलो' कह कर पास में रखी कुर्सी पर बैठ गयी। रिदम कुछ कहता, इससे पहले ही पलक कह उठी, "किसी बात की चिंता मत करना रिदम, मुझे तुम्हारी तबीयत और हालत के बारे में पता है।"

अगले दिन फिर पलक उससे मिलने आयी। सुधा ने चाय की 2 प्यालियां कमरे में भिजवा दीं। “आओ पलक, इतनी दूर क्यों खड़ी हो, यहां बैठो ना," रिदम दरवाजे पर रुक गयी पलक को कंफर्टेबल फील करवाना चाहता था। रिदम ने चाय की प्याली उठायी, तब तक पलक कमरे में दाखिल होती हुई बोली, “सॉरी रिदम, मेरा एक फोन आ गया था इसलिए मैं कमरे से बाहर चली गयी थी।" पलक की बात पर सुन कर रिदम चौंक गया। तो क्या दरवाजे की ओट पर खड़ी लड़की रिदम की गलतफहमी थी? पिछली शाम भी रिदम को लगा था कि उसके कमरे में कोई है, पर लाइट ऑन करने पर वहां कोई ना था। क्यों उसका अपना कमरा ही रहस्यमयी सा लगने लगा है। उसकी तबीयत नासाज होती देख पलक उसका सिर दबाने लगी। रिदम ने अपनी आंखें मूंद लीं। यह क्या ! उसकी बंद आंखों के सामने ब्लैक एंड वाइट फ्लैश आने लगे। यह शायद वह खुद है, और उसके साथ पलक। पलक भाग रही है और रिदम उसके पीछे.... दोनों हंस रहे हैं... इन प्यार के पलों में रिदम ने पलक की कमर को पीछे से पकड़ लिया है... पलक उसकी ओर घूमी... यह लड़की पलक नहीं, यह चेहरा किसी और का है। एक बेहद जाना-पहचाना चेहरा, यह उसका प्यार है, उसके मन में अटूट नेह बंधन की कसक उठने लगी और अस्फुट बोल निकले, "सुरीली।"

"वॉट डिड यू से। क्या कहा तुमने," पलक के पूछने पर रिदम पुरानी स्मृतियों को पीछे धकेल वर्तमान में पहुंचा, तो पाया कि यह उसका एक सपना था। कुछ अनमना सा, परेशान रिदम आंखें खोल कर बैठ गया। "कुछ नहीं," कह तो दिया, पर कुछ हो रहा था उसके साथ, जिसे वह पहचान नहीं पा रहा था।

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