5 राज्यों के दिलचस्प चुनाव नतीजे नहीं चला ब्रांड मोदी
Saras Salil - Hindi|May Second 2021
साल 2021 में कोरोना महामारी के बीच हुए 5 राज्यों में विधानसभा चुनावों के नतीजे बेहद ही दिलचस्प हैं. अगर आंकड़ों को देखें तो तमिलनाडु, केरल और पश्चिम बंगाल में भाजपा को शिकस्त मिली है, लेकिन असम और पुदुचेरी में उस ने सरकार बना ली है.
शाहनवाज

असम और पुदुचेरी में जहां भाजपा ने सब से ज्यादा सीटें जीती हैं, वहां पर सरकार बनाने के लिए क्रमश: 64 और 16 सीटें चाहिए. इन दोनों ही राज्यों में भाजपा बहुत ज्यादा बहुमत से सीटें नहीं जीत सकी.

केरल में कुल वोटर का टर्नआउट 74.06 फीसदी रहा यानी केरल में रहने वाले कुल वोटरों में से 74.06 फीसदी लोगों ने अपनी पसंद की पार्टी को वोट डाला, जिन में से 11.30 फीसदी लोगों ने भाजपा को वोट दिया.

पिछली बार साल 2016 में भाजपा को वोट देने वाले लोगों की संख्या 10.6 फीसदी थी और यह पार्टी एक सीट जीती थी. इस बार भाजपा को वोट देने वालों की संख्या में इजाफा होने के बावजूद वह अपनी बचीखुची एक सीट को नहीं बचा पाई.

पश्चिम बंगाल में साल 2016 के मुकाबले इस बार भाजपा ने सीटों में इजाफा किया है. पिछली बार भाजपा केवल 3 सीटों पर ही जीत हासिल कर पाई थी, लेकिन इस बार 77 सीटें हासिल कर के वह पश्चिम बंगाल में विपक्ष की भूमिका में है.

भारत में कोविड 19 के बढ़ते प्रकोप के बीच अप्रैल महीने में 5 अलगअलग राज्यों में चुनाव हुए थे, जिन में पश्चिम बंगाल, असम, पुदुचेरी, तमिलनाडु और केरल शामिल थे. इन सभी राज्यों के चुनाव अप्रैल महीने के आखिर तक खत्म हो गए थे, जिस के नतीजे चुनाव आयोग ने 2 मई को घोषित किए.

केरल के ऐतिहासिक नतीजे

केरल में कुल 140 विधानसभा क्षेत्र हैं, जहां पर चुनाव आयोग ने एक ही फेज 6 अप्रैल को ही वोटिंग करा ली थी.

केरल में सरकार बनाने और बहुमत हासिल करने के लिए 140 सीटों में से 71 सीटों पर जीत हासिल करना जरूरी है. इस बार केरल की जनता ने 40 साल पुरानी राजनीतिक परंपरा को तोड़ कर एक बार फिर से वामपंथी दलों के गठजोड़ एलडीएफ को जिताया है. 40 सालों के बाद ऐसा देखने को मिला है, जब सत्ताधारी पार्टी ने दोबारा जीत हासिल कर राज्य में सरकार बना ली है.

एक तरफ भारतीय कम्यूनिस्ट पार्टी को 17 सीटें, भारतीय कम्यूनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) को 62 सीटें, इंडियन यूनियन मुसलिम लीग को 15 सीटें मिली हैं, जबकि कांग्रेस को 21, स्वतंत्र उम्मीदवारों को 6 और बाकी 1-2 सीटें क्षेत्रीय पार्टियों को मिली.

ध्यान देने वाली बात यह है कि केरल में इस बार राष्ट्रीय स्तर की पार्टी भाजपा को एक भी सीट नहीं मिली, बल्कि भाजपा ने पिछले विधानसभा चुनावों में जो एक सीट हासिल की थी, उसे भी गंवा दिया.

केरल में वामपंथी दलों के गठजोड़, जिसे एलडीएफ (लैफ्ट डैमोक्रेटिक फ्रंट) कहते हैं, में भारतीय कम्यूनिस्ट पार्टी, भारतीय कम्यूनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी), केरल कांग्रेस (एम), नैशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी, जनता दल सैक्यूलर, इंडियन नैशनल लीग और दूसरे छोटे क्षेत्रीय स्तर के राजनीतिक दल शामिल हैं, जिन्हें इस बार 99 सीटों पर जीत हासिल हुई.

उसी तरह से यूडीएफ (यूनाइटेड डैमोक्रेटिक फ्रंट) के गठजोड़ में कांग्रेस, इंडियन यूनियन मुसलिम लीग, क्रांतिकारी समाजवादी पार्टी (आरएसपी) और दूसरे छोटे क्षेत्रीय स्तर के राजनीतिक दल शामिल हैं, को इस बार 41 सीटों पर जीत हासिल हुई है.

पिछली बार के विधानसभा चुनावों से इस बार के नतीजों का आकलन करें, तो पिछली बार एलडीएफ को 91 सीटें हासिल हुई थीं और यूडीएफ को 47 सीटें.

तमिलनाडु में डीएमके का डंका

तमिलनाडु में कुल 234 विधानसभा सीटों पर एक ही फेज 6 अप्रैल में ही वोटिंग हुई, जिस पर सरकार बनाने और बहुमत हासिल करने के लिए 118 सीटों पर जीत हासिल करना जरूरी था.

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