ममिता हत्याकांड से कठघरे में बीजद सरकार
Manohar Kahaniyan|December 2021
ओडिशा में महिला शिक्षिका ममिता मेहेर की सनसनीखेज हत्या में प्रदेश के गृह राज्यमंत्री दिव्यशंकर मिश्रा का नाम उछलने से नवीन पटनायक सरकार सकते में है. आखिर देश में कब तक और कितनी निर्भयाएं इस तरह हवस और हत्या का शिकार बनती रहेंगी?
नसीम अंसारी कोचर

ओडिशा के कालाहांडी जिले के महालिंग इलाके में सनशाइन पब्लिक स्कूल की 27 वर्षीय शिक्षिका ममिता मेहेर की हत्या की तह में सैक्स स्कैंडल, शोषण, धमकी, रहस्य, षडयंत्र, सफेदपोश नेताओं के काले कारनामे, पुलिस की मिलीभगत, पैसा, दबाव, लालच सब कुछ है.

इस हत्याकांड की जांच अगर गहराई से हो जाए तो प्रदेश की सत्ता में बैठे कई नेताओं की गरदन कानून के शिकंजे में हो सकती है, लेकिन क्या प्रदेश पुलिस में इतनी हिम्मत है कि वह अपने आकाओं की आंखों में आंखें डाल कर सवाल पूछ सके?

शायद नहीं. तभी तो पूरा मामला सिर्फ स्कूल संचालक के इर्दगिर्द ही लपेट दिया गया है, वह भी तब जब जनता ने सड़क पर उतर कर बवाल करना शुरू किया था. जब सामाजिक संगठनों और विपक्षी दलों ने सड़क पर उतर कर आवाज उठानी शुरू की. जब ट्विटर पर 'जस्टिस फौर ममिता' की मांग उठने लगी.

8 अक्तूबर, 2021 को सनशाइन स्कूल की इंग्लिश टीचर ममिता मेहेर अचानक लापता हो गई. 12 अक्तूबर को उस के परिजन काफी मुश्किलों के बाद उस की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज करा पाए. पुलिस तो इस मामले को दर्ज करने को ही तैयार नहीं थी, मगर जब भारी दबाव में मामला दर्ज हुआ तो उस के बाद भी पुलिस द्वारा ममिता को ढूंढने का कोई प्रयास नहीं किया गया.

आखिरकार जब सोशल मीडिया पर मामला ट्रेंड होने लगा और ट्विटर पर स्कूल संचालक और मालिक गोविंद साहू के साथ सत्तारूढ़ बीजद सरकार के गृह राज्यमंत्री दिव्यशंकर मिश्रा का नाम भी उछलने लगा, तब पुलिस की नींद टूटी.

तब 17 अक्तूबर को पुलिस ने आननफानन में उस स्कूल के संचालक और मालिक गोविंद साहू को गिरफ्तार किया, जिस पर ममिता को गायब करने का शक ममिता के घर वालों ने जताया था.

8 अक्तूबर को ममिता गोविंद साहू के बुलाने पर उस के साथ कहीं गई थी और फिर वापस नहीं लौटी. ममिता मेहेर गोविंद साहू के सनशाइन पब्लिक स्कूल में इंग्लिश की टीचर भी थी और बालिका छात्रावास की वार्डन भी.

ममिता और गोविंद साहू के बीच पिछले कई महीने से विवाद चल रहा था. यह विवाद था स्कूल की शिक्षिकाओं के यौन शोषण को ले कर. ममिता स्कूल में चल रहे कई गैरकानूनी और अनैतिक कार्यों का विरोध कर रही थी, जिस के चलते गोविंद साहू से उस की कई बार तकरार हो चुकी थी.

इसलिए ममिता के गायब होने पर पहला शक गोविंद पर था. मगर राज्य के बड़ेबड़े नेताओं तक उस की पहुंच होने की वजह से पुलिस उस पर हाथ डालने से बच रही थी.

लेकिन सामाजिक संगठनों और विपक्षी दलों के भारी दबाव में अंततः पुलिस को उसे गिरफ्तार करना पड़ा. मगर पुलिस की लापरवाही देखिए कि पूछताछ के दौरान आरोपी थाने से बाथरूम जाने के बहाने पुलिस को चकमा दे कर निकल भागा.

खैर, 2 दिन की मशक्कत के बाद वह फिर पुलिस के हत्थे चढ़ा और तब जा कर उस ने ममिता मेहेर की हत्या की बात कुबूली और उस की लाश पुलिस बरामद करवाई.

गोविंद साहू की निशानदेही पर 19 अक्तूबर को एक निर्माणाधीन स्टेडियम से से ममिता की सड़ीगली अधजली लाश बरामद हुई, जिसे पहचानना भी मुश्किल था. यह निर्माणाधीन स्टेडियम सनशाइन स्कूल का ही था.

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