घोंघे की खोल में घुमाव कैसे आता है?
Shaikshanik Sandarbh|January - February 2021
सममिति यानी सिमेट्री कई पौधों, जन्तुओं और यहाँ तक कि पानी जैसे कुछ अणुओं का भी गुण होता है। लेकिन घोंघे और उसके कुण्डलित खोल में यह बात नहीं है।
विक्की स्टाईन

ये कायरल (chiral) होते हैं यानी ये कुछ इस तरह असममित होते हैं कि इनके दर्पण प्रतिबिम्ब को इनके ऊपर जमाया नहीं जा सकता। हॉकी स्टिक, कैंची और जूतों में भी ऐसा ही होता है। हॉकी स्टिक और कैंचियाँ दाएँ हाथ से काम करने वालों और बाएँ हाथ से काम करने वालों के लिए अलग-अलग बनाई जाती हैं। और यदि आपको बाएँ पैर का जूता दाएँ पैर में पहनकर चलना पड़े तो अपने नसीब को कोसिए।

'दक्षिणहस्ती' घोंघे (यानी वे घोंघे जिनकी खोल की कुण्डली नुकीले सिरे से शुरू करके घड़ी की सुइयों की दिशा में घूमती है) का दर्पण प्रतिबिम्ब किसी 'वामहस्ती' घोंघे पर ही फिट बैठेगा, जिसकी खोल घड़ी की उल्टी दिशा में घूमती है। किसी घोंघे के चिपचिपे अंग और हिस्से भी खोल के घुमाव का अनुसरण करते हैं। उनमें भी उसी तरह की ऐंठन होती है जैसे खोल में है। यह एक ऐसा अवलोकन था जिसने कुछ शोधकर्ताओं को इस गुणधर्म के उद्गम की खोजबीन करने को प्रेरित किया। और डेवलपमेंट नामक शोध पत्रिका में प्रकाशित अध्ययन के मुताबिक इस बुनियादी कुण्डली के पीछे एक इकलौते जीन का हाथ है।

उक्त अध्ययन की वरिष्ठ शोधकर्ता जापान के चूबू विश्वविद्यालय की रसायन शास्त्री व परिवर्धन वैज्ञानिक राइको कुरोडा हैं। उनका कहना है कि “ऐसे शारीरिक लक्षण बहुत कम होते हैं, जिन्हें आप (किसी एक जीन में) चिन्हित कर सकें।"

सजीवों के अधिकांश गुणधर्म कई सारे जीन्स से निर्धारित होते हैं। जैसे व्यक्ति की आँख का रंग 10 या उससे भी अधिक जीन्स मिलकर तय करते हैं, जबकि कद का निर्धारण तो कई सैकड़ा जीन्स से निर्धारित होता है। घोंघे का मामला इस अर्थ में दुर्लभ है कि यहाँ एक जीन है जो एक प्रोटीन बनवाता है और यह प्रोटीन इस बात को तय करता है कि कोशिकाएँ अपनी संरचनाएँ कैसे विकसित करती हैं और अन्तत: पूरे घोंघे की अन्दर और बाहर की आकृति को प्रभावित करता है। और तो और, उनकी टीम ने यह भी पाया कि घोंघे की असममित प्रकृति उसकी एक-कोशिकीय अवस्था से ही शुरू हो जाती है।

शोधकर्ताओं ने किया क्या?

तालाबों के बड़े घोंघे (Lymnaea stagnalis) लगभग गोल्फ की गेंद के बराबर हो जाते हैं। इसमें लगभग सबमें दक्षिणहस्ती खोल और शरीर पाए जाते हैं लेकिन करीब 2 प्रतिशत घोंघे विपरीत दिशा में कुण्डलित होते हैं।

कुरोडा बताती हैं कि यह घुमाव शोधकर्ताओं को विक्टोरिया काल से ही आकर्षित करता आया है। सन् 2016 में उनकी टीम ने सुझाव दिया था कि शायद एक अकेला जीन (Lsdia1) घोंघे की कायरेलिटी के लिए ज़िम्मेदार होगा। लेकिन उनका ख्याल था कि मामला पूरी तरह तय नहीं हुआ है। पहले किए गए अध्ययनों से भी लगा था कि शायद घुमाव की दिशा का वास्तविक जीन सम्भवत: घोंघे के गुणसूत्रों में Lsdial के निकट स्थित है।

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