शून्य पर समझ
Shaikshanik Sandarbh|January - February 2021
अगर मैं आपसे पूछू कि ओ, डक और लव में क्या समानता है, तो आप या तो थोड़ा चुप रहेंगे या कहेंगे कि कुछ भी समानता नहीं या कहेंगे कुछ समानता हो सकती है, पर अभी मुझे सूझ नहीं रहा है।
मनोज कुमार शराफ

चलिए, आपकी कुछ मदद कर देते हैं। आपने बैडमिंटन के खेल के दौरान रेफरी को 'लव ऑल' कहते ज़रूर सुना होगा। अब आप कुछ-कुछ अन्दाज़ लगा रहे होंगे कि यहाँ 'लव ऑल' का क्या मतलब हो सकता है। थोड़ा आगे बढ़ते हैं और सोचते हैं कि क्रिकेट में कहे जाने वाले शब्द 'डक' के आखिर क्या मायने हैं। अभी भी न समझ में आया हो तो 'ओ' को अंग्रेज़ी में कैसे लिखते हैं, इस पर विचार करें।

हाँ, आप सही समझे, मैं शून्य की ही बात कर रहा था। शून्य जिसे अरबी-उर्दू में सिफर, अंग्रेज़ी में जीरो तथा अमेरिकन लोग 'ओ' या 'नॉट' पढ़ते, लिखते और समझते हैं।

आप इस लेख को जिस कम्प्यूटर या मोबाइल पर पढ़ रहे हैं, वह भी द्वि-आधारित संख्या पद्धति यानी 'जीरो' और 'एक' के आधार पर चलता है। शून्य के बिना कोई भी आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक उपकरण मौजूद ही नहीं होंगे। शून्य के बिना इन उपकरणों से कोई गणना सम्भव नहीं है जिसका अर्थ है कि शून्य के उपयोग के बिना आधुनिक इंजीनियरिंग या स्वचालित मशीनों की कल्पना भी सम्भव नहीं है। वास्तव में, हमारी आधुनिक दुनिया का ज़्यादातर हिस्सा शून्य के बिना अधूरा रह जाएगा।

शून्य एक गेम चेंजर

इस तरह देखें तो मानव द्वारा शून्य की खोज (आविष्कार) एक 'गेम चेंजर' साबित हुआ है। लेकिन क्या आपको पता कि मानव इतिहास में हज़ारों साल तक शून्य का कहीं अता-पता ही नहीं था। शून्य की अवधारणा आ भी गई तब भी काफी समय तक मानव ने इसे संख्या नहीं समझा। उपरोक्त बातों से एक बात तो तय है कि शून्य प्रकृति-प्रदत्त नहीं है। हमने शून्य का अपनी सुविधा या कहें आवश्यकता-पूर्ति हेतु आविष्कार किया है। और हमें इसे अगली पीढ़ी को भी सिखाना होगा। मैंने सुना है कि वैज्ञानिकों ने विभिन्न शोध में यह पाया है कि कई जानवर, जैसे बन्दर, मधुमक्खी 'कुछ भी नहीं की अवधारणा को न केवल समझते हैं बल्कि छोटी मधुमक्खी तो अपने दिमाग में शून्य की गणना भी कर सकती है। लेकिन केवल मनुष्यों ने न केवल शून्य की अवधारणा को समझ लिया है बल्कि उसकी सहायता से कई स्वचालित उपकरणों का आविष्कार भी कर लिया है।

शून्य की समझ

तो आइए, जानने की कोशिश करते हैं कि यह अति उपयोगी किन्तु विचित्र शून्य आखिर है क्या।

जब आप इस बात पर विचार करते हैं तो पाते हैं कि प्रकृति में हम शून्य का सामना शायद कभी नहीं करते हैं। अगर हम शून्य को एक, दो और तीन जैसी संख्याओं की तरह मूर्त चीज़ों से सम्बद्ध कर पाते जैसे एक आम, दो किताब, चार दिशाएँ आदि तो शायद शून्य की हमारी समझ और गहरी होती। हम 'एक' प्रकाश पुंज को देख सकते हैं। हम कार के हॉर्न से 'दो' बीप सुन सकते हैं। लेकिन क्या शून्य को देख या सुन सकते हैं? शायद नहीं! ऐसे में हमें यह समझने के लिए काफी मशक्कत करनी होगी कि किसी चीज़ की अनुपस्थिति भी अपने आप में एक चीज़ है।

हार्वर्ड विश्वविद्यालय के एक गणित के प्रोफेसर और शून्य पर पुस्तक लिखने वाले रॉबर्ट कपलान कहते हैं, “शून्य दिमाग में है, लेकिन संवेदी दुनिया में नहीं है।” यहाँ तक कि सूने अन्तरिक्ष में भी शून्य नहीं है क्योंकि आप वहाँ तारों को देख सकते हैं। तो इसका मतलब है कि शायद एक सच्चा शून्य जिसका अर्थ पूर्ण शून्यता है बिग बैंग से पहले के समय में अस्तित्व में रहा हो लेकिन हम इस बात को कभी प्रमाणित नहीं कर सकते कि कभी पूर्ण शून्यता की स्थिति भी रही होगी। वास्तव में, शून्य मौजूद नहीं है, फिर भी हम शून्य की अवधारणा का उपयोग अन्य सभी संख्याओं को प्राप्त करने के लिए कर सकते हैं।

रॉबर्ट कपलान का प्रयोग

सबसे पहले रॉबर्ट कपलान ने एक प्रयोग के माध्यम से शून्य को समझाने का प्रयास किया जिसे गणितज्ञ जॉन वॉन न्यूमैन द्वारा कुछ इस तरह वर्णित किया गया है। वॉन न्यूमैन, रॉबर्ट कपलान के इस प्रयोग का वर्णन सरल किन्तु भ्रामक प्रयोग के रूप में करते हैं।

• यह प्रयोग कुछ इस तरह है कि एक बॉक्स की कल्पना करें जिसमें कुछ भी नहीं है। यह शून्य का भौतिक प्रतिनिधित्व है। चित्र-1 में आप देख सकते हैं कि खाली बॉक्स के अन्दर क्या है। कुछ भी तो नहीं।

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