अजगर की शरीर-क्रिया की समझ के फायदे
Shaikshanik Sandarbh|September - October 2020
24 दिसम्बर को भरतपुर के केवलादेव नेशनल पार्क में प्रवेश लेते हुए सुबह के साढ़े ग्यारह बज रहे थे। इसके बावजूद सूर्य नदारद था। घने कोहरे के कारण चेन्नई से आई छह सदस्यीय फोटोग्राफर्स की एक टीम, पक्षियों के फोटो खींचने की बजाय अपना समय गप्पे मारने में लगा रही थी।
विपुल कीर्ति शर्मा

एक घण्टे बाद धूप खिल गई परन्तु अधिकांश पक्षी पेट-पूजा कर घरौंदों में लौट गए थे और कुछ बचे-खुचे आराम फरमा रहे थे। मेरी निगाहें सड़क के दोनों ओर घनी झाड़ियों के बीच कुछ और ही खोज रही थीं। तभी मैदान जैसे खुले हिस्से में कुछ हलचल दिखी। ठण्डे बिलों में दुबके अजगर धूप खिलते ही धूप का मज़ा लेने बिलों से बाहर आने लगे थे।

भरतपुर बर्ड सेंक्चुरी या केवलादेव नेशनल पार्क या घाना नेशनल पार्क राजस्थान में स्थित यूनेस्को द्वारा घोषित संरक्षित इलाका प्रवासी पक्षियों के लिए स्वर्ग है। अक्टूबर से फरवरी माह तक प्रवासी पक्षियों की चार सौ से भी ज़्यादा प्रजातियों को यहाँ देखा जा सकता है। फरवरी के अन्तिम सप्ताह तक अधिकांश प्रवासी पक्षी विदा ले लेते हैं, परन्तु अनेक स्थानीय पक्षियों को आप फिर भी यहाँ साल भर देख सकते हैं।

यद्यपि केवलादेव नेशनल पार्क, पक्षियों के लिए ज़्यादा प्रसिद्ध है, परन्तु यहाँ 25 प्रकार के स्तनधारी, 23 प्रकार के सरीसृप, 5 प्रकार के उभयचर एवं अनेक प्रकार की मछलियाँ और कीट-पतंगे भी पाए जाते हैं। आप अगर भाग्यशाली हुए तो सर्दियों की दोपहर में आपको धूप सेंकते हुए अजगर भी मिल जाएँगे। और यदि आपका भाग्य कुलांचे भर रहा हो तो अजगर को शिकार करते हुए भी देख पाएँगे। 2017 में केवलादेव नेशनल पार्क में अजगरों पर किए गए एक अध्ययन से ज्ञात होता है कि यहाँ अजगरों की आबादी कम-से-कम 80 है। 29 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्रफल वाले नेशनल पार्क के लिए यह बेहद अच्छी खबर है।

ये कौन-से अजगर हैं?

केवलादेव नेशनल पार्क में पाए जाने वाले अजगर का वैज्ञानिक नाम पायथन मोलुरस है। सामान्य रूप से इन्हें भारतीय अजगर या इण्डियन रॉक पायथन या एशियन रॉक पायथन भी कहते हैं। यह एक बड़े आकार का साँप है। केवलादेव नेशनल पार्क में 10-12 फीट के अजगर देखने को मिलते हैं। पी.मोलुरस पूरे भारत में पाए जाते हैं। वैज्ञानिकों ने भौगोलिक और कुछ शारीरिक लक्षणों के आधार पर इन्हें दो उप-प्रजातियों में बाँटा है। पी. मोलुरस भारत, पाकिस्तान, श्रीलंका और नेपाल में पाए जाते हैं जबकि कुछ बड़े आकार की उप-प्रजाति पायथन मोलुरस बिविटेटस या बर्मिस पायथन कहलाती है जो म्यांमार, चीन तथा इण्डोनेशिया में पाई जाती है।

पी. मोलुरस हल्के रंग के अजगर होते हैं जिनका औसत वज़न 90 कि.ग्रा. तक होता है। ये पेड़ पर चढ़ने या पानी में तैरने में भी माहिर होते हैं। प्रजनन काल के दौरान ही ये जोड़े में दिखते हैं वरना इन्हें अकेले रहना ही पसन्द है।

होमियोस्टेसिस यानी समस्थिति

राजस्थान की सर्दियाँ और गर्मियाँ भीषण होती हैं। यहाँ साल के अधिकांश समय दिन और रात के तापमान में बहुत ज़्यादा अन्तर होता है। वातावरण का तापमान कैसा भी हो, मानव शरीर का तापमान 98.6°F या 37.0°C होता है। अपेक्षाकृत स्थिर या नियत आन्तरिक वातावरण को बनाए रखने की प्रवृत्ति को होमियोस्टेसिस (समस्थिति) कहते हैं। शरीर में अनेक ऐसे कारक हैं जिनकी मात्रा को नियत रखना बेहद आवश्यक होता है, उसमें से तापमान केवल एक कारक है। उदाहरण के लिए हमारे रक्त में ग्लूकोज़ की मात्रा, आयनों की सान्द्रता तथा pH का सामान्य होना कार्यिकी के लिए बेहद आवश्यक है। सामान्य क्रियाकलापों के दौरान भी शरीर में स्थिति बदलती रहती है। जब हम सामान्य भोजन भी करते हैं तो पाचन के पश्चात् कार्बोहाइड्रेट सरल शर्करा में बदलकर रक्त वाहिनियों में पहुंचकर रक्त में शर्करा की सान्द्रता को बढ़ा देते हैं। इसी प्रकार व्यायाम करने से शरीर का तापमान बढ़ जाता है। इन बदलावों से वापिस स्थिर स्थिति में आने के लिए आम तौर पर शरीर नकारात्मक प्रतिक्रिया (नेगेटिव फीडबैक) लूप अपनाता है। अर्थात यह क्रिया प्रारम्भ करने वाली संवेदनाओं के विपरीत ही कार्य करता है। अगर आपके शरीर का तापमान जॉगिंग के दौरान बहुत अधिक हो जाता है तो नकारात्मक प्रतिक्रिया लूप द्वारा शरीर का तापमान 98.6°F या 37.0°C की ओर नीचे लाने का प्रयास किया जाता है।

कैसे रखते हैं तापमान सामान्य?

यह जानने के लिए हमें मानव शरीर की ताप नियमन की कार्यिकी को समझना पड़ेगा। सबसे पहले उच्च तापमान का पता शरीर के सेंसर्स द्वारा लगाया जाता है, जो मुख्य रूप से त्वचा पर पाई जाने वाली संवेदी कोशिकाएँ होती हैं। इनमें संवेदनाओं को ग्रहण करने के लिए मस्तिष्क से तंत्रिकाएँ आती हैं। तंत्रिकाओं से मस्तिष्क में स्थित तापमान नियामक नियंत्रण केन्द्र (हाइपोथेलेमस) को सन्देश भेजा जाता है जो शरीर का तापमान नीचे गिराने के लिए त्वचा की रक्त वाहिनियों को फैला देता है तथा पसीने को निकालता है।

इसके विपरीत जब ठण्डे मौसम में आप गर्म कपड़ों के बगैर निकलते हैं, तो मस्तिष्क में तापमान केन्द्र (हाइपोथेलेमस) को उन प्रतिक्रियाओं को प्रारम्भ करना पड़ता है जो शरीर को गर्म रख सकें। ऐसी परिस्थितियों में आपके रोंगटे (बाल) खड़े हो जाते हैं जिससे हवा को बालों के बीच कैद करके, त्वचा की गर्मी को बाहर निकलने से बचाया जा सके। इसी प्रक्रिया में त्वचा में रक्त का प्रवाह भी कम हो जाता है। ठण्ड में काँपना भी मांसपेशियों द्वारा अधिक गर्मी पैदा कर शरीर के तापमान को बढ़ाने का एक तरीका है।

चित्र-1: शरीर को गर्म रखने के लिए हमारे रोंगटे (बाल) खड़े हो जाते हैं।

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