प्रकाश की गति
Shaikshanik Sandarbh|March - April 2020
सन् 2015 अन्तर्राष्ट्रीय प्रकाश वर्ष के रूप में मनाया जा रहा था। प्रकाश के गुण, प्रकाश सम्बन्धी परिघटनाओं और प्रकाश के अनुप्रयोग पर चर्चा के लिए जगह-जगह गोष्ठी, सम्मेलन, वक्तव्य, कार्यशाला आदि आयोजित हो रहे थे, तो मन में प्रकाश के बारे में और पढ़ने की जिज्ञासा हुई। इसी क्रम में पढ़ते-पढ़ते कुछ लिखने का भी मन हुआ तो प्रकाश द्वारा एक सेकण्ड में तय की जाने वाली 30,00,00,000 मीटर की यात्रा पर जाने का विचार जागा। प्रस्तुत लेख में उसी यात्रा के कुछ अंश का ज़िक्र कर रही हूँ।
अंजु दास मानिकपुरी

लगभग सत्रहवीं शताब्दी तक कुछ दार्शनिकों जैसे अरस्तू, केप्लर और देकार्ते की यह मान्यता थी कि प्रकाश की चाल अनन्त है। लेकिन रोजर बेकन (1250 ईस्वी) और फ्रांसिस बेकन (1600 ईस्वी) को लगता था कि कुछ तो समय सीमा होगी जिसमें प्रकाश धरती पर पहुँचता है और इस तरह दोनों ने प्रकाश की एक अनन्त गति के खिलाफ बहस छेड़ी। पर यह विचार केवल कुछ लेखों में एक विचार के रूप में सिमट गया ।कालान्तर में और कई वैज्ञानिकों ने पाया कि प्रकाश की चाल अधिक तो ज़रूर है किन्तु अनन्त नहीं है। लेकिन इसे और अधिक जानने का सबसे पहला प्रयास गैलीलियो ने सन् 1600 में किया। हालाँकि, वे एक निश्चित अंक तो नहीं बता पाए किन्तु उनके प्रयास ने अन्य वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं को और भी प्रयास करने के लिए प्रोत्साहन देने का काम अवश्य किया।

गैलीलियो की कोशिश

गैलीलियो ने प्रकाश की चाल ज्ञात करने के लिए एक प्रयोग किया। गैलीलियो इतना तो जानते ही थे कि प्रकाश की चाल बहुत अधिक होगी। इसके आधार पर वे जानते थे कि प्रकाश की चाल निकालने के लिए जो दूरी ली जाएगी, बहुत अधिक होगी। उन्होंने सोचा कि करीब एक मील की दूरी पर्याप्त होगी। इसके लिए उन्होंने पास-पास स्थित दो पहाड़ियाँ चुनीं। इनके शिखरों के बीच की दूरी एक मील के आसपास थी। अब उन्होंने दो लालटेन लिए, दोनों में खिड़की की व्यवस्था थी। विचार यह था कि एक पहाड़ी पर गैलीलियो खुद चढ़ेंगे और दूसरी पहाड़ी पर उनका कोई सहयोगी। दोनों के लालटेन जलते होंगे लेकिन खिड़कियाँ बन्द होंगी।पहले गैलीलियो अपने लालटेन की खिड़की खोल देंगे और समय गिनना शुरू कर देंगे। जैसे ही दूसरी पहाड़ी पर खड़े सहयोगी को गैलीलियो के लालटेन की रोशनी दिखाई देगी, वह अपने लालटेन की खिड़की खोल देगा। गैलीलियो को जैसे ही सहयोगी के लालटेन की रोशनी दिखाई देगी, वे समय गिनना बन्द कर देंगे।

यह वह समय होगा जो गैलीलियो के लालटेन से रोशनी को पास की पहाड़ी पर पहुँचने और पास की पहाड़ी पर खड़े उनके सहयोगी के लालटेन से रोशनी को वापिस गैलीलियो तक पहुँचने में लगा है। दूरी तो मालूम ही है, दो मील | करना बस इतना ही है कि दो मील में ऊपर नापे गए समय का भाग देकर प्रकाश की चाल निकाल लेनी है।

उन्होंने इस प्रयोग को कई मर्तबा किया। प्रकाश की चाल का मान हर बार अलग-अलग आता था।

गैलीलियो को लगा कि शायद चाल का जो मान निकल रहा है, वह प्रकाश की चाल नहीं है बल्कि सहयोगी द्वारा उनके लालटेन की रोशनी को देखने तथा उसके बाद अपने लालटेन की खिड़की खोलने में लगने वाला समय यानी प्रतिक्रिया की अवधि है।

इस समस्या से निपटने का उन्होंने एक अनोखा तरीका निकाला। हालाँकि, उस तरीके से भी वे ज़्यादा कुछ हासिल नहीं कर पाए मगर तरीका दिलचस्प है।

गैलीलियो ने सोचा कि यदि स्वयं और सहयोगी के बीच की दूरी बढ़ा दी जाए तो काम बन सकता है। उनका तर्क इस प्रकार था, दूरी बढ़ाने के बाद भी सहयोगी की प्रतिक्रिया अवधि तो पहले जितनी ही रहेगी। करेंगे यह कि पहले दो मील की कुल दूरी रखकर प्रकाश को पहुँचने में लगने वाला समय नापेंगे। यह समय होगा प्रकाश को दो मील की दूरी तय करने में लगा समय धन सहयोगी की प्रतिक्रिया अवधि अर्थात प्रकाश द्वारा तय की गई दूरी में सहयोगी की प्रतिक्रिया अवधि का जोड़।

अब मान लीजिए, दूरी को दुगना कर दें। तो जो समय लगेगा, वह होगा प्रकाश को चार मील की दूरी तय करने में लगा समय धन सहयोगी की प्रतिक्रिया अवधि।

दूसरे प्रयोग में लगे समय में से पहले प्रयोग में लगा समय घटा देंगे, तो सहयोगी की प्रतिक्रिया अवधि शून्य हो जाएगी और दो मील की दूरी तय करने में लगा समय पता चल जाएगा।

इस प्रयोग के परिणाम अत्यन्त रोचक थे। अलग-अलग दूरी लेकर प्रयोग किए गए| मगर सारा हिसाब- किताब यानी साथी की प्रतिक्रिया का समय घटाने के बाद प्रकाश को विभिन्न दूरियाँ तय करने में लगभग बराबर समय लग रहा था।

गैलीलियो ने इससे यह निष्कर्ष निकाला कि प्रकाश की चाल बहुत अधिक है और लगने वाला समय इतना कम था कि उसे नापना गैलीलियो के साधनों के बूते की बात नहीं है।

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