प्रदूषण बना खतरा
Champak - Hindi|December FIrst 2021
कहानी
विजय खत्री

नीति काफी समय से अपना होमवर्क कर रही थी और उस के पापा अखबार पढ़ रहे थे. पापा ने कहा, "नीति, अब थोड़ा आराम कर लो. वैसे भी कल छुट्टी है.”

नीति ने आश्चर्य से पूछा, "लेकिन कल संडे तो नहीं है पापा, तो फिर कोई त्योहार है क्या कल? छुट्टी क्यों है?' वह हैरान हो कर बोली.

"नहीं,” उस के पापा ने कहा.

"तो क्या स्कूल में सब टीचर एकसाथ छुट्टी पर हैं?' नीति ने मजाकिया लहजे में कहा.

पापा ने हंसते हुए कहा, “नहीं बेटा, न्यूज में बता रहे हैं कि प्रदूषण का स्तर बहुत बढ़ गया है. वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 300 को पार कर गया है, जो बहुत खतरनाक है."

नन्ही नीति को पापा की बात कुछ समझ में नहीं आई, लेकिन कल छुट्टी होने की वजह से वह बहुत खुश थी और सोचने लगी कि कल दोस्तों के साथ बाहर खेलनेकूदने में बहुत मजा आएगा.

अगली सुबह नीति बाहर टहलने निकल गई, लेकिन चारों ओर घना कोहरा सा छाया हुआ था. ठीक से कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा था. उस की आंखों व गले में जलन सी होने लगी. साथ ही सांस लेने में भी कुछ तकलीफ होने पर वह खांसने लगी.

"अरे नीति, इतने प्रदूषण में तुम बाहर घूमने क्यों निकली? तुम्हें पता नहीं कि इस से गंभीर नुकसान हो सकता है?"

अनजानी आवाज सुन कर नीति ने आंखें मलते हुए इधरउधर देखा, फिर बोली, “तुम कौन हो? मुझे कोई दिखाई नहीं दे रहा है. "

स्मोग ने अपना आकार बदला और उस में से एक मानव आकृति सामने आई. उस ने कहा, "मैं प्रदूषित हवा हूं. अभी मेरा एक्यूआई 350 से ज्यादा है, जो स्वास्थ्य के लिए काफी नुकसानदायक है. खास कर बीमार, वृद्ध व बच्चों को घर से बाहर नहीं निकलना चाहिए."

नीति ने पूछा, "अरे हवा, तुम्हारी हालत तो गंभीर मालूम हो रही है. और ये एक्यूआई क्या होता है? कल मेरे पापा भी यही बात मुझे बता रहे थे.''

हवा ने उसे समझाते हुए कहा, “एक्यूआई का मतलब एयर क्वालिटी इंडैक्स है. भारत में 17 सितंबर, 2014 को केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने इस को मापने की शुरुआत की थी. इस में अंकों और रंगों द्वारा हवा की शुद्धता को मापा जाता है. अगर हवा की गुणवत्ता खराब है तो इंसान सांस नहीं ले सकता और उसे घर के अंदर ही रहना पड़ता है."

"सचमुच, कृपया मुझे जरा विस्तार से समझाओ तो,” नीति की हवा की बातों में दिलचस्पी बढ़ी.

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