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Champak - Hindi|October First 2021
महात्मा गांधी का सत्याग्रही और आंदोलनकारी जीवन वास्तव में दक्षिण अफ्रीका की धरती से शुरू हुआ था. भारत का स्वतंत्रता आंदोलन तो उन के आंदोलनकारी जीवन का दूसरा पड़ाव था. इसलिए दक्षिण अफ्रीका के संघर्ष को जाने बिना हम गांधीजी को सही से नहीं समझ सकते.
कुमुद कुमार

13 जनवरी, 1897 को दक्षिण अफ्रीका के डरबन शहर में उन के साथ भयानक घटना घटी.

18 दिसंबर, 1896 को गांधीजी अपनी पत्नी, बच्चों और अन्य भारतीयों के साथ कुरलैंड स्टीमर से दक्षिण अफ्रीका के डरबन बंदरगाह पहुंचे. लेकिन मैडिकल जांच और अन्य कारणों से इस जहाज के यात्रियों को नीचे उतरने की अनुमति 13 जनवरी, 1897 को ही मिली.

डरबन के गोरे लोग गांधीजी से दो बातों पर नाराज थे. उन का मानना था कि गांधीजी ने भारत में दक्षिण अफ्रीका के नेटाल निवासी गोरे लोगों की गलत निंदा की है. दूसरी बात यह थी कि वे सोचते थे कि गांधीजी नेटाल को भारतीय लोगों से भर देना चाहते थे और इसलिए वे दो जहाजों में भारतीयों को भर कर लाए हैं.

हालांकि दोनों ही आरोप गलत थे. फिर भी गांधीजी की सुरक्षा के लिए कुरलैंड स्टीमर के कप्तान को सूचना भेजी गई कि गांधीजी को शाम होने पर ही स्टीमर से उतारा जाए, क्योंकि गोरे उन से बेहद नाराज थे.

दोपहर बाद डरबन के प्रसिद्ध वकील मिस्टर लाटन गांधीजी के जहाज पर पहुंचे. उन्होंने गांधीजी को सलाह दी कि वे अपने परिवार को गाड़ी में बैठा कर रुस्तम जीवनजी के घर ले जाएं. रुस्तमजी भारतीय पारसी समुदाय से थे और डरबन के एक जानेमाने व्यवसायी थे.

वे अपने परिवार को गाड़ी में बैठा कर खुद लाटन के साथ साढ़े 4 बजे पैदल चल पड़े.

यह रास्ता 3 किलोमीटर लंबा था और एक घंटे में इस रास्ते रुस्तमजी के घर पहुंचे.

जैसे ही गांधीजी बंदरगाह से बाहर आए, गोरे लोगों ने उन की विशेष टोपी से उन्हें पहचान लिया. वे चिल्लाए, 'गांधी, गांधी, मारो, उसे मारो, उसे पकड़ लो,' चिल्लाने की आवाज सुन कर कुछ ही देर में वहां भीड़ इकट्ठी हो गई, उन में से कुछ गोरों ने उन पर कंकड़, पत्थर और अंडे फेंकने शुरू कर दिए.

लाटन ने महसूस किया कि अकेले चलने में खतरा है तो उन्होंने एक रिक्शे चलाने को बुलाया, लेकिन गोरे लोगों ने उसे यह कह कर डरायाधमकाया, "अगर तू ने गांधी को अपने रिक्शे में बैठाया तो तुझे पीटेंगे और तेरा रिक्शा भी तोड़ दें.

यह सुन कर वह रिक्शा चालक डर गया और अपनी भाषा में 'खा' (नहीं) कह कर वहां से चला गया.

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