अज्ञान बनाम विज्ञान
Champak - Hindi|October First 2021
जिब्बी जेबरा अमेरिका की अंतरिक्ष एजेंसी नासा से रिटायर हो कर लौटा था. दुर्भाग्य से जिस चंपकवन में वह रहता था, वहां कोई जानवर पढ़ालिखा न था. यहां लौटते ही उस के बुरे समय की शुरुआत हो गई.
हरबंश सिंह

जिब्बी अंतरिक्ष वैज्ञानिक था और दूरबीन ले कर आकाश में घंटों देखा करता था.

चंपकवन के जंगलवासियों को यह बात बड़ी अजीब लगती थी. इसलिए वे जिब्बी को मानसिक रूप से बीमार समझते थे.

ब्लैकी भालू जंपी बंदर, बैडी गीदड़ और जोजो सियार की चंडाल चौकड़ी थी. वन के जीवों को बेवकूफ बना कर वे ज्योतिष और वैद्य का काम करते थे. जिब्बी के आने से उन का धंधा चौपट होने वालाथा.

ब्लैकी भालू इस चंडाल चौकड़ी का मुखिया था. “आप हरे नग की अंगूठी पहनो, हरी दाल दान करो,” वह बीमार जानवरों को बेकार की सलाह दे कर उस के बदले मोटी रकम लेता था. उस का ज्ञान अलगअलग रंगों की अंगूठियां बेचने और काली दाल, हरी दाल, पीली दाल दान करने तक ही सीमित था. साथ ही वह ताबीज भी दिया करता था.

"बैडी सुनो, जानवरों को ताबीज बेचते हुए तुम्हें यह मंत्र भी बोलना है, मुझे कुछ नहीं पता फिर भी मैं सब जानता हूं,” ब्लैकी भालू ने समझाया.

"नहीं गुरूजी, इस का मतलब मैं मूर्ख हूं, लेकिन मैं सबकुछ जानता हूं,” बैडी असहमत था, लेकिन जब ब्लैकी ने उसे डांटा तो उस ने बात करनी बंद कर दी. ब्लैकी भालू के दादाजी इसी मंत्र का जाप करते थे.

जंपी बंदर पूंछ के सहारे पेड़ की डाली से लटका झूला झूल रहा था. उस ने सुझाव दिया, “जिब्बी मानसिक रूप से बीमार है और उसे पागलखाने भिजवा सकें, तो हमारा धंधा चलता रहेगा,” चंडाल चौकड़ी को यह चाल अच्छी लगी.

जंपी ने जंगल के सभी जानवरों की मीटिंग बुलाई, सभी गोला बना कर खड़े हुए थे. जंपी ने कहा, “जिब्बी हर समय अपने पाइपों के माध्यम से क्या खोजता रहता है? और अगर उसे कुछ मिल भी जाता है तो उसे वह यहां कैसे लाएगा, उसे मानसिक अस्पताल भेजने के लिए आप को और सुबूत चाहिए?"

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