अंगूर मीठे हैं
Champak - Hindi|October First 2021
गरमी का मौसम था. फौक्सी लोमड़ी दोपहर में जंगल से गुजर रही थी. जंगल के एक छोर पर विंची भेड़ का बहुत बड़ा बगीचा था. उस बगीचे में तरहतरह के फलफूलों के कई पेड़पौधे लगे थे.
डा. के. रानी

इसी बगीचे में रास्ते की तरह एक बड़ी सी ताजे अंगूरों की बेल सड़क की ओर झुकी थी. फौक्सी रास्ते के किनारे नीम के पेड़ के नीचे बैठ कर अंगूरों से लदी बेल को देखने लगी. रसीले अंगूर देख कर उस के मुंह में पानी आ रहा था. उसी पेड़ की डाल पर ब्लैकी कौआ बैठा हुआ था.

फौक्सी को वहां बैठा देख कर वह बोला, “क्या बात है फौक्सी, आज भरी दोपहरी में पेड़ के नीचे बैठ कर आराम कर रही हो?" ब्लैकी ने ताना मारते हुए कहा.

"हां, मैं बस वहां से गुजर रही थी. लेकिन मौसम में काफी गरमी है. जिस के कारण मैं अब और नहीं चल सकती. इसलिए मैं ने सोचा कि मैं कुछ देर आराम कर लूं," फौक्सी ने कहा.

"फौक्सी, क्या तुम उन रसीली अंगूरों की बेल को देख रही हो क्या? मेरे खयाल से वह सब खट्टी है," ब्लैकी ने कहा.

“यह तो खाने के बाद ही पता चलेगा कि अंगूर खट्टे हैं या मीठे."

“मैं ने एक किताब में पढ़ा था कि एक बार लोमड़ी को जब अंगूर खाने को नहीं मिले तो वह कहने लगी, अंगूर खट्टे हैं."

"तुम सही कह रही हो, लेकिन यह तो सदियों पुरानी कहानी है.” अब लोमड़ी भी स्मार्ट हो गई है. मैं तो ऐसी कहानी पर यकीन नहीं करती."

"तो फिर तुम सामने वाली बेल से अंगूर तोड़ कर अपनी चालाकी का परिचय दे दो.'

"अभी मेरा अंगूर खाने का मन नहीं है. जब मन होगा तब तुम्हें दिखाऊंगी कि मैं कितनी स्मार्ट हूं, फौक्सी ने जवाब दिया.

उस की बात ब्लैकी को बुरी लगी और वह बुरा सा मुंह बना कर वहां से उड़ गया. फौक्सी ब्लैकी से चिढ़ गई. वह मन ही मन बुदबुदाई, 'पेड़ पर बैठ कर बड़ीबड़ी बातें बना रहा है. ऐसा नहीं कि दोचार अंगूर तोड़ कर मुझे दे दे. गरमी के मारे गला मेरा " सूख गया है.

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