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Champak - Hindi|September First 2021
मधु उनींदी आंखों से उठी और उस ने बहुत थकान महसूस की, क्योंकि उसे स्कूल के लिए तैयार होना पड़ रहा था. उसे स्कूल में होने वाले वार्षिक क्विज कंपीटिशन की चिंता हो रही थी इसलिए उसे सिर में दर्द महसूस हो रहा था. साल के आखिर में प्रत्येक कक्षा से चुने हुए बच्चों को एकदूसरे के विरुद्ध टीम में प्रतियोगिता के कई राउंड बाद चुना जाता है.
हरिनी राघवन

यह दिन क्विज कंपीटिशन का था और मधु बड़ी सावधानी से फाइनल में प्रवेश करने की तैयारी कर रही थी. पूरी रात वह सैमीफाइनल के रिजल्ट को ले कर चिंतित रही. वह कैसे अच्छा परफोर्मेंस दिखाए, बस इसी टेंशन में उसे रातभर नींद नहीं आई. परेशान हो कर वह ब्रेकफास्ट करने के लिए डायनिंग टेबल के पास बैठ गई. उस के तनाव के पीछे क्या कारण है, यह जानने का उस की मां ने प्रयास किया. वह देख रही थीं कि मधु रात में अच्छी नींद नहीं ले पाई थी.

जब मधु विचारों में खोई ब्रेकफास्ट करने लगी तो मां ने बीच में टोका, “मधु, तुम्हें क्या हो गया है? ऐसी क्या बात है जिस से तुम्हें निराशा हो रही है?" मां ने पूछा.

मधु ने जवाब दिया, "नहीं मां, ऐसी कोई बात नहीं है. आज क्विज कंपीटिशन का फाइनल है. इसलिए मैं रिजल्ट को ले कर चिंतित हूं.''

मां ने आश्चर्य जताते हुए कहा, "अरे हां, मैं तो बिलकुल ही भूल गई थी. तुम्हें और तुम्हारी टीम को बधाई. तुम्हें सफलता अवश्य मिलेगी.' 2

मां मधु की समस्या से भलीभांति परिचित थीं. जब भी कंपीटिशन या परीक्षा होती थी तो मधु हमेशा चिंता का अनुभव करती थी. कोई भी सांत्वना और भरोसा उस की चिंता को कम कर देता था. इवेंट समाप्त होने के बाद ही मधु अपनी दिमागी शांति को फिर से हासिल कर पाती थी.

मां और पापा ने उसे कई बार सलाह दी थी कि ये सब चीजें सरलता से लिया करो, हर कंपीटिशन के लिए तनाव मत लो. वे हमेशा महसूस करते थे कि वह ऐसे समय पर बहुत टेंशन में हो जाया करती थी. मां अहसास करती थीं कि यह बात किसी भी तरह से मधु के लिए ठीक नहीं हो सकती. वह अभी भी उस बच्चे की तरह थी जो अपने रिजल्ट को ले कर आशंकित रहता है और हमेशा अच्छा करने के प्रयास में लगा रहता है.

जब रिजल्ट उस के पक्ष में आता तो वह खुशी से भर जाती और यदि रिजल्ट विपरीत आया तो वह टूट जाती तथा निराश हो जाती थी. उस दिन पूरी रात मां और पापा ने उस के साथ बिताई और उस की चिंता को नियंत्रित करने और हालात काबू करने लिए रातभर उसे संभालते रहे. जब भी अगला कंपीटिशन या परीक्षा सामने आती तो वह भी कोई भिन्न नहीं होती थी. मधु की बहुत ही निराशाजनक स्थिति होती थी.

मां ने आश्वस्त हो कर अपना हाथ मधु के कंधे पर रखा और बोली, “मधु, तुम अभी भी बच्ची हो भविष्य में तुम्हारे रास्ते में बहुत सारी चुनौतियां आएंगी. हरेक से कुछ सीखो और परिणाम से खुश होने की कोशिश करो, खुशी मनाओ, चाहे परिणाम कैसा भी हो. परिणाम पर ध्यान केंद्रित मत करो, अच्छा प्रयास करो और रिजल्ट के बारे में चिंता मत करो."

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