मायरा की जीत
Champak - Hindi|September First 2021
इस साल मायरा 8वीं कक्षा में आ गई थी. पिछले एक साल से वह बैडमिंटन खेलने का प्रशिक्षण ले रही थी. अकसर जब मायरा एक हाथ में बैडमिंटन रैकेट पड़ती थी तो दूसरे हाथ में बड़ी सी ट्रोफी की कल्पना में खो सी जाया करती थी.
पूनम पांडे

उस की इच्छा थी कि वह चैंपियन बने और कई पदक, पुरस्कार, ट्रोफी आदि जीते. एक दिन अपने कोच से उस ने अपनी इच्छा को व्यक्त करते हुए कहा, "मैं हर पदक जीतना मैं चाहती हैं."

यह सब सुन कर उस के कोच बोले, क्यों नहीं, यह सब बिलकुल संभव है मायरा. तुम यहां स्टेडियम में एक साल से प्रैक्टिस रही हो. अब तुम किसी भी प्रतियोगिता में भाग ले सकती हो. अगले महीने अपने शहर के स्पोर्ट्स क्लब की तरफ से बैडमिंटन टूर्नामैंट का आयोजन किया जा रहा है. तुम भी अपना रजिस्ट्रेशन करवा लो यह प्रतियोगिता बिलकुल निशुल्क है.”

अपने कोच से उत्साहित हो कर मायरा काफी प्रभावित हुई. घर लौट कर उस ने मातापिता के सामने अपने मन की बात रखी तो उन्होंने उसे प्रवेश के लिए सहमति दे दी. अगले ही दिन मायरा ने अपना नाम रजिस्टर करवा दिया. अब वह बड़े जोश और जनून के साथ इस प्रतियोगिता की तैयारी में जुट गई. अपनी एकाग्रता बढ़ाने के लिए मायरा नियमित योग भी करने लगी, वह मेहनत कर स्पर्धा में चैंपियन बनना चाहती थी.

नियत समय पर मैच की घोषणा हो गई. पहले मायरा को 4 मैच खेलने थे और 3 मैचों 4 में जीत हासिल करनी थी.

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