लकड़ी की डंडियों के सहारे सीखा मैथ्स
Champak - Hindi|September First 2021
डमरू गधे ने अपनी मम्मी से कहा, “मम्मी, मेरे सिर में दर्द है. आज मैं स्कूल नहीं जाऊंगा."
सुवादीप भट्टाचार्जी

यह सुन कर मम्मी घबरा गईं. उन्होंने कहा, "डमरू, अगर तुम ठीक नहीं हो, तो मैं तुम्हें डाक्टर के पास ले जाऊंगी, लेकिन बेटा, तुम पिछले सप्ताह भी दो दिन अनुपस्थित हो चुके हो. अगर ऐसा ही चलता रहा तो तुम्हें इस साल अगली कक्षा में नहीं भेजा जा सकेगा."

डमरू ने कोई जवाब नहीं दिया. सही बात तो यह थी कि उसे मैथ्स की क्लास पसंद नहीं थी. जब उस के ज्यादातर सहपाठी गिनती करते हैं, तो वह गिनती नहीं कर सकता. वह सोचता कि उसे अंकों की समस्या है. मैथ्स की क्लास के समय वह या तो अपनी नजरें नीचे झुकाए डैस्क को देखता या फिर खिड़की से खेत में काम कर रहे पुरुषों और महिलाओं को देखता रहता. उस के टीचर मिस्टर जंबो उसे चौकस रहने के लिए कहते, लेकिन वह ऐसा नहीं करता.

मम्मी के प्यार भरे स्वर ने महसूस कराया कि उसे स्कूल जाना चाहिए. वह जानता था कि मम्मी उसे कुछ भी नहीं कहेंगी, अगर वह कहता कि तबीयत ठीक नहीं है. दो साल पहले जब उस के पापा का निधन हुआ तो मम्मी ने सारी जिम्मेदारियां अपने कंधों पर ले ली. वे ऊनी कपड़े बुन कर उन्हें मार्केट में बेचती थीं. डमरू जानता था कि उस की मम्मी उसे पालने के लिए बहुत मेहनत करती हैं. वह स्कूल जाने के लिए तैयार हो गया.

डमरू अपने सब से अच्छे दोस्त चीकू खरगोश और मीकू चूहे के साथ बैठता था. दूसरा पीरियड मैथ्स का था. जब भूगोल की टीचर चली गईं, तो डमरू ने सचमुच सिरदर्द महसूस किया. वह जानता था कि अंकों के सवाल का जवाब वह नहीं दे सकेगा. वह सोशल स्टडीज, पर्यावरण और भाषा जैसे विषयों में बहुत अच्छा था, लेकिन जब मैथ्स का पीरियड आता तो वह अपने सीखने की सभी खुशियां खो देता. मिस्टर जंबो दयालु और दोस्ताना स्वभाव के शिक्षक थे. वे क्लास में आते और सभी से नए चैप्टर खोलने को कहते .

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