अनोखा रक्षाबंधन
Champak - Hindi|August Second 2021
कूहू व पीहू दोनों सगी बहने थीं. कूहू पीहू से दो 'साल बड़ी थी. दोनों पढ़ाई में अच्छी थीं तथा घर में मां का काम में भी वे हाथ बटाती थीं.
वंदना गुप्ता

कूहू को बागबानी का बहुत शौक था. उसे पेड़पौधों से काफी लगाव था. वह अपने घर पर बगीचे में नए पौधे लगाती तथा पुरानों की देखभाल करती थी.

कई बार वह मां को अपने बगीचे की सब्जियां भी ला कर देती थी. पीहू को कराटे का शौक था, वह हफ्ते में तीन दिन शाम को कराटे की क्लास जाती थी.

दोनों बहनें आमतौर पर खुश रहती थीं पर जब रक्षाबंधन का त्योहार आने वाला होता तो वे दुखी हो जाती थीं. बाजार तरहतरह की राखियों व उपहारों से सज जाते थे. सभी लड़कियां अपने भाइयों के लिए सुंदरसुंदर राखी व उपहार लाती थीं. लड़के भी अपनी बहनों के लिए रिटर्न गिफ्ट खरीदते पर कूहूपीहू ये काम नहीं कर पाती थीं इसलिए वे उदास हो जाती थीं.

इस साल भी रक्षाबंधन का त्योहार आने वाला था. मां सोच रही थीं कि ऐसा क्या करूं जो उन की बेटियां उदास न हों.

लेकिन उन्हें यह देख कर हैरानी हुई कि इस बार कूहू व पीहू खुश दिखाई दे रही थीं. वे बाजार जा कर चुपके से कुछ सामान खरीद लाईं और उसे छिपा कर रख दिया.

जल्दी ही रक्षाबंधन का दिन भी आ गया. दोनों बहनें सुबह ही नहाधो कर अच्छे कपड़े पहन कर तैयार हो गई थीं.

मां बहुत खुश थीं, क्योंकि हर साल आज के दिन वे दोनों अपने कमरे से बाहर ही नहीं निकलती थीं, खेलती भी नहीं थीं और खाना भी उन्हें जिद कर के खिलाना पड़ता था.

कुछ ही देर में दोनों बहनों ने दो थालियां सजा कर मेज पर रख दीं.

उन में सुंदर राखियां और उपहार थे. साथ ही उन के साथ चौकलेट्स भी रखी थीं.

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