जनता की आवाज
Champak - Hindi|August Second 2021
"मैं आप सभी जंगलवासियों का बहुत आभारी हूं, जो आप ने मुझे सेवा करने का अवसर दिया," शेरसिंह अपनी गुफा के सामने सभी को संबोधित कर रहा था.
निखिल अग्रवाल

चंपकवन में हाल ही में चुनाव हुए थे, जिस में शेरसिंह को भारी बहुमत से जीत मिली थी. उस ने आखिर इस के लिए कड़ी मेहनत भी की थी. चुनाव के दौरान उस ने अपना 90 किलोग्राम वजन कम कर लिया था. इसी जीत के जश्न के लिए शेरसिंह ने कुछ चुनिंदा जंगलवासियों को दावत में आमंत्रित किया था. यह कोविड का दौर था और चंपकवन भी इस से अछूता नहीं था. दो बार से जीत रहे टोटो टाइगर को उस ने हराया था, लेकिन उसे भी अपने साथियों के साथ आमंत्रित किया था.

“आप सभी दावत का आनंद लीजिए और आने वाले सुखी जीवन की खुशियां मनाइए,' शेरसिंह बोला. सभी जानवर अपने नए राजा से बेहद खुश थे.

उन के दो शिष्य थे, एक हरि लकड़बग्घा और दूसरा जैकी सियार. दोनों बाहर से आने वाले सभी अतिथियों के हाथों पर सैनिटाइजर छिड़क रहे थे. वे दोनों बड़े धूर्त और चालाक थे. दोनों ने शेरसिंह की जीत के लिए एड़ीचोटी का जोर लगा दिया था. वे उस के बहुत पुराने साथी थे. उस ने उन्हें अपना सलाहकार नियुक्त कर लिया था.

स्वादिष्ट भोजन और नाचगानों के शानदार आयोजन के बाद सब अपने घर चले गए. आने वाला समय चंपकवन के लिए एकदम नया और सुखी होने वाला था. यही सोच कर सब चैन की नींद सो गए.

चंपकवन और आसपास के अन्य वन भी कोविड महामारी के मुश्किल दौर का सामना कर रहे थे. ज्यादातर शिकायतें कोविड से संबंधित थीं. कभी किसी को अस्पताल में बेड की जरूरत थी तो किसी को औक्सीजन चाहिए थी. हरि और जैकी को पूरे जंगल में घूम कर निगरानी रखने का कार्य सौंपा गया था ताकि यदि किसी को कोई दिक्कत हो तो वह तुरंत इस की जानकारी दें. जंगलवासी उन से सीधे जा कर भी शिकायत कर सकते थे.

बेड, औक्सीजन व दवाओं के साथसाथ अब सभी के टीकाकरण की समस्या भी उस के सामने थी. चंपकवन में सब चीजों का अभाव था. कुछ महीने तक शेरसिंह ने भरसक प्रयास किया, पर शिकायतें खत्म होने का नाम नहीं ले रही थीं और आखिर एक दिन उस का सब्र का बांध टूट गया. उस ने अपने शिष्यों को बुलाया.

"हां सर,” जैकी ने कहा.

शेरसिंह दहाड़ा,“ मैं तंग आ गया हूं. शिकायतों का कोई अंत नहीं है. मैं ने तुम दोनों को शिकायतें लेने के लिए भेजा था, लेकिन वे सब तो मेरे सिर पर ही चढ़ गए."

"सही कह रहे हैं आप,” हरि बोला, "वे आप को हर छोटे काम के लिए बुलाते हैं.'

“क्या सबकुछ मैं ही करूं? वे खुद भी तो अपनी समस्या हल कर सकते हैं," शेरसिंह बोला. दोनों ने हामी में सिर हिलाया.

“अब से तुम दोनों शिकायतें लेना बंद करो, शेरसिंह बोला, "और यदि कोई शिकायत करे, तो उन से कहो उस का हल खुद खोजें. चंपकवन के राजा को और भी बहुत काम हैं,” इतना कह कर वह अपनी गुफा में आराम करने चला गया.

“जी सरकार," जैकी बोला और वे दोनों चले गए.

एक दिन नदी किनारे उन्होंने गीगी बकरी को पानी भरते हुए देखा. उसे अपना कोविड टेस्ट करवाना था, जिस में उसे काफी परेशानी हो रही थी. इस से पहले वे दोनों उस से नजरें बचा कर निकल पाते तभी उस ने उन्हें पकड़ लिया.

"अरे, जैकी कैसे हो भाई? टेस्ट का क्या हुआ? मुझे यहां कोई भी टेस्ट करने वाला नहीं मिल रहा है. बहुत दिक्कत हो रही है," गीगी ने पूछा.

“राजा इस बारे में जानता है, जल्द ही उस का समाधान भी हो जाएगा. तब तक थोड़ा धीरज रखो," जैकी बोला.

"टेस्ट जल्दी हो जाता तो मुझे यह पता लग जाता कि इलाज की जरूरत है या नहीं,” गीगी बोली.

"अरे, कमाल है,' हरि बोला. "राजा को और भी कई काम होते हैं, यदि इन छिटपुट शिकायतों पर ही ध्यान देते रहेंगे तो बाकी जंगल को कौन संभालेगा तुम?' गीगी चुप रही. वह बात को और आगे नहीं बढ़ाना चाहती थी. वह शांति से अपने घर की तरफ चल दी.

"अरे जैकी, गीगी तो रोज इसी तरह हम दोनों का दिमाग खाएगी,” गीगी के जाने के बाद हरि बोला, "हमें कुछ ऐसा करना पड़ेगा जिस से उस का शिकायत से ध्यान हट जाए और हमारी जान बचे."

"सही कहते हो हरि,” जैकी बोला. “कुछ ऐसा करो कि वह शिकायत करना ही भूल जाए."

गीगी के फलों के बागान थे. वहां अकसर उस की दोस्त सन्नी गिलहरी और चीकू खरगोश उस से मिलने आया करते थे. हरेभरे बाग में उन्हें खेलने मे बड़ा आनंद आता था. अगले दिन जब वे बाग में आए, तो देखा वह बाहर खड़ी सुबक रही थी.

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