हसन फिर पढ़ने जाने लगा
Champak - Hindi|August Second 2021
"हसन..." अम्मी की आवाज हवा में लयबद्ध तरीके से गूंजती चली गई, हसन ने अपनी किताब से सिर ऊपर उठाया तो आकाश में सूरज उस का स्वागत कर रहा था.
लक्ष्मी गोपीनाथन

"आया, अम्मी,” हसन खड़ा हुआ और उस ने अपने पाजामे की धूल झाड़ी. किताब उस ने बाजू के नीचे रखी थी. हसन गंभीर स्वभाव का लड़का था, एक ऐसा लड़का जो समय से पहले ही बड़ा हो गया था. उसे स्कूल में प्लेग्राउंड पर इधरउधर भागना और अपने दोस्तों के साथ खेलना याद था जैसे यह कल की ही बात हो.

आज स्वतंत्रता दिवस है और जहां तक हसन को याद है, यह उत्सव खेल और मिठाइयां खाने का दिन हुआ करता था, लेकिन अब वह सब बीती याद की तरह महसूस हो रहा था. अब वह केवल सशस्त्र बलों के पैदल और गश्ती जीप के चलने की आवाज के बारे में ही सोच सकता था जिस ने उसे एक स्वनिर्मित जेल में भेज दिया था. वे आवाजें उसे डराती थी और उस ने महसूस किया था कि उस के जीवन में भारी बदलाव के ये सभी मुख्य कारण थे.

"तुम क्या कर रहे हो, बेटे?" जब हसन पास आया तो अम्मी ने प्यार से पूछा.

"मैं इस किताब को 10वीं बार पढ़ रहा हूं, अम्मी,” हसन ने जवाब दिया और एक मुसकान के साथ अपनी मां के सवालों का जवाब देने से कभी थकान महसूस नहीं की.

अब्बा मार्केट से छोटेमोटे काम कर के घर आ गए थे. जैसे ही वे अम्मी के बगल में बैठे उस का चेहरा उत्साह से चमक उठा.

हसन ने पिछले एक साल में कई बार अपने अम्मीअब्बा को श्रीनगर से जाने की चर्चा करते सुना था, लेकिन उसे यकीन नहीं था कि ऐसा कभी होगा. दो साल से भी अधिक समय से हसन ऐसा जीवन बिता रहा था, जिस के बारे में उस ने कभी सोचा भी नहीं था. शुरुआत में वह कभीकभार घर से बाहर निकल जाता और अपने दोस्तों से मिल लिया करता था, लेकिन कोविड-19 ने उसे भी रोक दिया था. कभीकभी सामुदायिक रेडियो और खराब इंटरनेट पर औनलाइन कक्षाएं जब अम्मी और अब्बा बारीबारी से होमस्कूलिंग करते थे, तब यह रूटीन हुआ करता था. उस का सब से करीबी दोस्त आमिर अपने अम्मीअब्बा के साथ गांव चला गया था, ऐसा लग रहा था कि अब जाने की उन की बारी है.

"हसन, हम तुम से यहां से जाने के बारे में बात करना चाहते हैं," अब्बा की आवाज ने हसन की तंद्रा भंय कर दी.

"हां, अब्बा," हसन कर्तव्यनिष्ठा के साथ अपने अब्बा के पास बैठ गया.

“तुम जानते हो न, हमारे लिए यह कितना कठिन समय रहा है, हम डावर की ओर बढ़ रहे हैं.'

हसन का चेहरा खिल उठा और उसे अब्बा का गांव याद आ गया, हालांकि वे कुछ समय से वहां नहीं रह रहे थे. लेकिन उसे कुछ याद था तो सिर्फ इतना ही, बहती हुई नदी, एक प्राचीन घाटी और सुंदर ऊंचेऊंचे पहाड़.

“डावर अब कितनी दूर है, अब्बा?"

“वह ज्यादा दूर नहीं है, बेटा, यहां से 100 किलोमीटर के करीब होगा.'

"हम वहां कैसे पहुंचेंगे, अब्बा? हम कहां रहेंगे? क्या मैं वहां स्कूल जा सकूँगा? क्या आप और अम्मी वहां नौकरी करेंगे?" हसन के सवालों ने अब्बा को बेचैन कर दिया.

"हां, हसन, वहां जीवन अलग होगा. आशा से भरा होगा,” अम्मी ने हसन के माथे पर एक चुंबन जड़ दिया और उसे अपने आलिंगन में ले लिया. हसन अम्मी की बाहों में फिसलता चला गया. वह मुसकराया और उन का चेहरे देखने लगा.

"क्या मैं वहां स्कूल जा पाऊंगा, अम्मी?'' अम्मी और अब्बा एकदूसरे को देखने लगे.

“हसन, हम तुम्हारे लिए पढ़ने और सीखने का एक तरीका खोज लेंगे. हम वादा करते हैं."

"हम कैसे जाएंगे, अब्बा?"

"हम श्रीनगर से अगले सोमवार को गुरेज घाटी के लिए सुमो पकड़ेंगे."

हसन ने अपना सिर हिलाया. उस का मनमस्तिष्क उज्ज्वल कल के सपनों से भर गया था.

एक सप्ताह बीत गया और हसन सामान पैक करने और अपने दोस्तों तथा पड़ोसियों को अलविदा कहने में व्यस्त था. सभी ने मास्क लगाए हुए थे. वे एकदूसरे के गले नहीं लगे, लेकिन प्यार भरे दिलों से सभी ने अलविदा कहा. अम्मी और हसन ने उन के सभी दोस्तों को बांधने के लिए राखियां बनाईं, जो श्रीनगर में जीवन भर भाईबहनों की तरह रहे. इस वर्ष रक्षाबंधन भी अलग किस्म का होगा, लेकिन परंपरा को जिंदा रखा जाएगा.

"तुम अपनी सहेलियों को राखी क्यों बांधती हो, अम्मी?"

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