पिल्लू मेरा दोस्त
Champak - Hindi|August First 2021
"चलो हटो, तुम मेरा दुपट्टा गंदा कर दोगे, ' टिम्मी तुम्हें इतनी चिंता है, वह तुम्हें मेरे बापदादाओं के बलिदान की बदौलत ही मिला है."
कुसुम अग्रवाल

उस दिन बहुत तेज हवा चल रही थी. वह हवा क्या आंधी ही थी. वह इतनी तेज थी कि पेड़ों से पत्ते टूट कर गिर रहे थे. घरों के बाहर तारों पर सूख रहे कपड़े इधरउधर उड़ रहे थे.

टिम्मी ने देखा कि आंगन में तार पर लटका उस का रेशमी दुपट्टा हवा में उड़ने लगा था.

“अरे, तुम कहां जा रहे हो?" कह कर टिम्मी भी उस हल्केफुल्के खूबसूरत दुपट्टे के पीछेपीछे दौड़ी. पर दुपट्टा था कि रुकने का नाम ही नहीं ले रहा था. तार से उड़ कर वह मैदान में पहुंच गया और फिर मैदान से उड़ कर एक शहतूत के पेड़ पर लटक गया. टिम्मी भी दौड़तीदौड़ती उस शहतूत के पेड़ तक जा पहुंची.

लेकिन वहां पहुंच कर वह हैरान रह गई वहां पर तो और भी बहुत से शहतूत के पेड़ थे.

टिम्मी उस पेड़ के पास गई जिस की एक टहनी पर उस का दुपट्टा अटका था. वह अपना दुपट्टा लेना ही चाहती थी कि उस की नजर एक छोटे से काले रंग के कीड़े पर पड़ी, जो शहतूत की पत्तियां खा रहा था.

"कौन हो तुम? और तुम्हारे बापदादा कौन थे? मैं किसी को नहीं जानती. मैं तो इतना जानती हूं कि मेरा यह सुंदर रेशमी दुपट्टा मेरी मम्मी नैशनल हैंडलूम हाउस से खरीद कर लाई थी और पापा ने अपनी कमाई का एक अच्छाखासा हिस्सा इस पर खर्च किया था. हां, यदि तुम दावा कर ही रहे हो कि यह सब तुम्हारे बापदादाओं के कारण हमें मिला है तो सब से पहले तो यह बताओ कि तुम हो कौन?"

इस पर उस कीड़े ने कहा, "मेरा नाम पिल्लू है. तुम मुझे रेशम का कीड़ा या बोबिक्स मोरी भी कह सकती हो. वह देखो, मेरे कितने भाईबहन इस शहतूत के पेड़ पर रहते हैं,” पिल्लू ने पेड़ की डालियों की ओर इशारा करते हुए कहा, "सचमुच पेड़ की डालियों पर बहुत सारे कीड़े थे. लेकिन उसे अभी भी पिल्लू की बात पर विश्वास नहीं हो रहा था.

वह सोच रही कि इतना छोटा सा कीड़ा भला रेशम कैसे दे सकता है?" वह बोली, “चलो, पहले मुझे अपने बारे में कुछ बताओ. तब मानूंगी तुम्हारी बात.

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