मैं लैफ्टी हूं
Champak - Hindi|August First 2021
"नीलू हाथमुंह धो कर खाना खा लो,” नीलू की मां ने आवाज लगाई.
कुसुम अग्रवाल

नीलू को बहुत तेज भूख लगी थी. उसे आज बहुत दिनों बाद दादीजी के हाथ का खाना मिलने वाला था, क्योंकि इन दिनों नीलू की दादीजी उन के पास रहने के लिए आई हुई थीं. इसलिए वह झटपट डाइनिंग टेबल की ओर दौड़ी.

मेज पर थाली लगी थी जिस में उस की मनपसंद भिंडी की सब्जी, ताजा आम का अचार और आमरस था. नीलू के मुंह में यह देख कर पानी आ गया.

उस ने झट से चम्मच उठाया और एक चम्मच आमरस पीया ही था कि दादीजी आ गईं. इस से पहले कि नीलू दादीजी को बताती कि आमरस बहुत अच्छा है, दादीजी ने उसे टोका, “फिर तू ने बाएं हाथ से चम्मच पकड़ लिया? तुझे मैं ने कितनी बार समझाया है कि दाहिने हाथ से खाना खाया कर. बाएं हाथ से खाना अच्छा नहीं लगता है. तुझे तो पराए घर जाना है.''

नीलू का मुंह उतर गया. वह जिस चाव से भोजन करने बैठी थी, वह भी खत्म हो गया.

वह चुपचाप दाहिने हाथ से खाना खाने की कोशिश करने लगी. लेकिन उसे बड़ी मुश्किल हो रही थी. आमरस था कि चम्मच से बारबार गिरता ही जा रहा था. वह रोटी पर भी ठीक से सब्जी नहीं लगाई पा रही थी. वह खुद को असहाय महसूस कर रही थी और उस की आंखों में आंसू आ गए. वह जैसेतैसे खा कर उठ गई.

नीलू अपने सभी काम बाएं हाथ से ही करती थी, जिस कारण घर के सभी बड़ेबुजुर्ग तथा पड़ोसी उसे अजीब निगाहों से देखते थे. अकसर वे उसे टोकते रहते थे. वे नीलू को बराबर एहसास कराते थे कि बाएं हाथ से काम करना बुरा होता है.

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