भाग 2- नन्हा राजकुमार
Chakmak|August 2021
पिछले अंक में तुमने पढ़ा लेखक को बचपन में बड़ों ने चित्र बनाने से हतोत्साहित किया तो वह पायलट बन बैठा। अपनी एक यात्रा के दौरान उसे रेगिस्तान में जहाज़ उतारना पड़ा। वहाँ उसकी भेंट एक नन्हे राजकुमार से हुई। राजकुमार ने उससे भेड़ का चित्र बनाने के लिए कहा और फिर एक-दूसरे से परिचय का सिलसिला शुरू हुआ। राजकुमार ने बताया कि वह एक छोटे-से ग्रह का निवासी है। अब आगे...
लालबहादुर वर्मा

इससे मुझे बहुत आश्चर्य नहीं हुआ। मैं जानता था कि पृथ्वी, बृहस्पति, मंगल, शनि जैसे बड़े-बड़े ग्रहों के अलावा सैकड़ों ऐसे छोटे, बेनाम ग्रह हैं जिन्हें दूरबीन से भी देखने में कठिनाई होती है। जब कोई वैज्ञानिक किसी एक ग्रह की खोज करता है तो वह उसकी पहचान के लिए एक संख्या चुन लेता है, जैसे नक्षत्र 32611।

मेरे इस विश्वास के कई कारण हैं कि जिस नक्षत्र से वह आया था, उसका नाम B612 होगा। इस नक्षत्र को केवल एक बार 1901 में एक तुर्क वैज्ञानिक ने अपनी दूरबीन से देखा था।

उसने एक अन्तर्राष्ट्रीय सम्मेलन में अपनी खोज का भव्य प्रदर्शन किया था। पर उसकी पोशाक देखकर उस पर किसी ने विश्वास नहीं किया। वयस्क लोग ऐसे ही होते हैं।

B612 के नक्षत्र अच्छे रहे होंगे क्योंकि तुर्की के एक तानाशाह ने, शायद इसी घटना के कारण, कानून बना दिया कि जो योरोपीय ढंग के कपड़े नहीं पहनेगा उसे मौत की सज़ा मिलेगी। उस वैज्ञानिक ने 1920 में फिर प्रदर्शन किया। इस बार उसने अपने को सूट-बूट से सजा रखा था और सबने उसकी बात मान ली थी।

वयस्क लोगों के कारण ही मुझे उस नक्षत्र और उसकी संख्या के बारे में इतने विस्तार में बताना पड़ा। बड़े लोगों का संख्याओं में बड़ा विश्वास होता है। उनसे आप किसी नए दोस्त के बारे में बातें करें तो वे कभी कोई सार्थक प्रश्न नहीं पूछेगे। वे कभी नहीं पूछेगे, “उसकी आवाज़ कैसी है? कौन-से खेल खेलता है? तितलियाँ इकट्ठा करता है?” पूछेगे, “क्या उम्र है? उसके कितने भाई हैं? उसका वज़न कितना है? उसके पिता कितनी तनख्वाह पाते हैं?” यही सब जानने में विश्वास होता है उनका। उनसे कहो, “मैंने गुलाबी ईंटों का एक मकान देखा है जिसकी खिड़कियों पर जैरेनियम के फूल लगे हैं, छत पर कबूतर गुटुर-गू करते हैं!” तो वे ऐसे घर की कल्पना भी नहीं कर पाएंगे। उनसे कहना चाहिए, "मैंने एक लाख की कीमत वाला मकान देखा है।” झट बोलेंगे, “कितना सुन्दर!"

इसी तरह अगर उनसे कहो, “नन्हा राजकुमार बहुत आकर्षक था, हँसता था, एक भेड़ चाहता था,” और यह उसके होने के लिए उसके अस्तित्व को साबित करने के लिए काफी है क्योंकि कोई होगा तभी तो भेड़ माँगेगा? तो ये लोग कन्धा उचकाकर तुम्हें बच्चा समझ लेंगे। लेकिन यदि यह कहा जाए कि जिस ग्रह से वह आया था उसका नाम 8612 है तो वह मान जाएँगे। और फिर कोई सवाल नहीं पूछेगे। ऐसे होते हैं ये लोग, इनसे ऐसी ही उम्मीद रखनी चाहिए। बच्चों को बड़े लोगों के प्रति बड़े धैर्य से काम लेना पड़ता है।

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