सब्जी की फसलों में खरपतवार नियंत्रण
Modern Kheti - Hindi|15th November 2021
हरियाणा के शहरी इलाकों या उनके साथ लगते गांवो में काफी मात्रा में सब्जियाँ उगाई जाती हैं। प्रांत में मुख्यत : आलु, प्याज, लहसुन, मटर, भिण्डी, टमाटर, हल्दी, बैंगन, पत्तागोभी, मेथी व फूलगोभी की काश्त ज्यादा की जाती है।
डा. सतबीर सिंह पूनिया व विरेन्द्र हुडा

ये फसलें शुरू की अवस्था में कम बढ़वार लेती हैं और अगर वातावरण अनुकूल हो तो खरपतवारों की समस्या और बढ़ जाती है। सब्जी की फसल बोने से पहले आमतौर पर खेत में गोबर की खाद डाली जाती है जिसकी वजह से भी खरपतवार ज्यादा उगते हैं। इसके अलावा, सब्जी की फसलों में ज्यादा सिंचाई की जरूरत पड़ती है जिसकी वजह से खेत में नमी होने की वजह से खरपतवारों की बढ़वार भी जल्दी होती है व खरपतवार को फलने फूलने के लिए अच्छा मौका मिल जाता है। इन सभी कारणों की वजह से कई बार खरपतवार सब्जी की फसल को शुरू की अवस्था में ही ढक लेते हैं। अगर खरपतवारों को समय पर न निकाला जाये तो पैदावार में औसतन 25-55 प्रतिशत तक कमी आ जाती है। प्रयोगों द्वारा पता चला है कि खरपतवारों द्वारा गाजर की फसल में 28-78 :, मूली में 86 :, आलू में 6282 :, मटर में 70 :, पत्तागोभी में 66 :, टमाटर में 60 प्रतिशत तक नुकसान आंका गया है। इस के अलावा खरपतवार फसलों में कई बीमारियों व कीड़ों को भी आश्रय देते हैं। इसलिए जरूरी है कि फसलों में खरपतवारों का उचित समय पर नियंत्रण किया जाये।

खरपतवार निकालने का उचित समय : यह समय पौधे की पूर्ण उम्र में वह समय है जिस समय खेत में खरपतवार नहीं होने चाहिये और पैदावार में कमी न हो। अगर इस समय में फसल में खरपतवार नहीं होंगे तो पैदावार में कोई कमी नहीं आयेगी। इस समय के बाद उगे हुए खरपतवार फसल में ज्यादा नुकसान नहीं करते परन्तु इस समय के बाद खेत में अगर खरपतवार नियंत्रण करते है तो कटाई आसानी से हो जाती है व अगले साल के लिए खरपतवारों का नहीं बन पाता। खरपतवार नियंत्रण का यह नाजुक समय सीधी बीज द्वारा लगाई गई फसलों में रोपाई की फसलों की बजाये/अपेक्षा ज्यादा होता है। आमतौर पर खरपतवारों की संख्या व मौसम के हालात पर इस समय की लम्बाई निर्भर करती है। विभिन्न फसलों को खरपतवार रहित रखने का नाजुक समय सारणी 1 में नीचे दिया गया है।

सारणी 1 : विभिन्न फसलों को खरपतवार रहित रखने का समय

आमतौर पर सब्जी की फसल में ऋतु के अनुसार एकवर्षीय, दो वर्षीय व बहु वर्षीय डीला जाति वाले खरपतवार आते है। इस के इलावा कई जगह बैंगन व टमाटर की फसल में परजीवी खरपतवार मरगोजा का प्रकोप भी देखने को मिलता है। प्याज की फसल में अमर वेल भी काफी नुकसान करती है।

इसलिए खरपतवारों को समय पर निकालना बहुत जरूरी है। इन फसलों में खुरपे से गोड़ाई द्वारा या हाथ द्वारा खरपतवार नियंत्रण काफी प्रचलित है परन्तु कई बार मजदूर समय पर न मिलने या ज्यादा बारिश के कारण निराई-गुड़ाई समय पर सम्भव नहीं हो पाती अतः ऐसे हालात में खरपतवारनाशियों का प्रयोग करके भी खरपतवारों पर काबू पाया जा सकता है। खरपतवारनाशी का प्रयोग करके निम्नलिखित फसलों में समय पर व अच्छी तरह खरपतवार नियन्त्रण मिल सकता है।

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