मशरूम में लगने वाले कीट-बीमारियाँ एवं उनका प्रबन्धन
Modern Kheti - Hindi|15th November 2021
मशरूम जिसे आमतौर पर खुम्ब या छतरी कहा जाता है जो "कवक" की एक विशिष्ट प्रजाति है। मशरूम की खेती पश्चिमी प्रदेशों एवं उत्तरांचल के अलावा अब पूर्वांचल में भी व्यावसायिक स्तर पर की जाने लगी है। आमतौर पर इसकी खेती पूरे वर्ष की जाती है, परन्तु अधिकतर मात्रा में अगस्त-सितम्बर से लेकर फरवरी-मार्च तक किया जाता है।
संदीप कुमार, शैलेश कुमार सिंह, सोमेन्द्र नाथ, अश्वनी कुमार सिंह तथा रवि प्रकाश मौर्या

मशरूम जिसे आमतौर पर खुम्ब या छतरी कहा जाता है जो कवक की एक विशिष्ट प्रजाति है। मशरूम की खेती पश्चिमी प्रदेशों एवं उत्तरांचल के अलावा अब पूर्वांचल में भी व्यावसायिक स्तर पर की जाने लगी है। आमतौर पर इसकी खेती पूरे वर्ष की जाती है, परन्तु अधिकतर मात्रा में अगस्त-सितम्बर से लेकर फरवरी-मार्च तक किया जाता है। मशरूम अत्यधिक पौष्टिक, मुलायम एवं गुद्देदार होने के साथ इसमें लगभग 90 प्रतिशत पानी होता है जिसके कारण मशरूम में कई प्रकार के कीट एवं बीमारियाँ लगती है। मशरूम के मुख्य कारकों में कवक जनित, के जीवाणु जनित, विषाणु जनित तथा अजीवित कारक जैसे पानी, तापक्रम, अपेक्षित आर्द्रता होता है, इसके अलावा कीटों में मक्खियां, स्प्रिंगटेल्स और माईट मशरूम की बिजाई से लेकर तुड़ाई तक किसी भी अवस्था में क्षति पहुँचाते हैं जिससे मशरूम की उपज एवं गुणवत्ता में कमी हो जाती है। इसके अलावा समय से उचित प्रबन्धन न किये जाने के कारण भी मशरूम की फसल में विभिन्न प्रकार के कीट एवं रोगों का संक्रमण होने लगता है।

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