कृषि व्यापार में इंटरनेट मंडीकरण का महत्व
Modern Kheti - Hindi|15th November 2021
सूचना क्रांति ने मानवीय जीवन के लगभग हर पहलू को छूआ है। आगामी समय में सूचना क्रांति की आर्थिक, सामाजिक एवं व्यापारिक ढांचों पर गहरी छाप छोड़ने की उम्मीद है। सूचना क्रांति में अनेक प्रौद्योगिकियों का योगदान है जैसे कि कंप्यूटर, इंटरनेट, मोबाइल फोन इत्यादि।

आज का युग सूचना तकनीकी का युग है। उचित कृषि व्यापार में प्रभावी निर्णय काफी मायने रखते हैं। किसी भी व्यापार में प्रभावी निर्णय, समय पर उचित एवं स्टीक जानकारी से सीधे तौर पर प्रभावित होते हैं। यूं तो कच्चे माल की खरीद से लेकर अंतिम खपतकार तक पहुँच के सभी कार्यों में इंटरनेट खेती उद्यमियों के लिए सहायक सिद्ध होता है। परंतु मंडीकरण की बेहतरी एवं दूर के खपतकारों तक पहुँच करने के लिए इंटरनेट मंडीकरण एक किफायती एवं प्रभावी विकल्प के तौर पर उभर कर सामने आया है।

सूचना क्रांति ने मानवीय जीवन के लगभग हर पहलू को छूआ है। आगामी समय में सूचना क्रांति की आर्थिक, सामाजिक एवं व्यापारिक ढांचों पर गहरी छाप छोड़ने की उम्मीद है। सूचना क्रांति में अनेक प्रौद्योगिकियों का योगदान है जैसे कि कंप्यूटर, इंटरनेट, मोबाइल फोन इत्यादि। सूचना क्षेत्र में बढ़ रही उपभोक्ताओं की संख्या इस बात की ओर इशारा करती है कि आम जनता को सूचना क्रांति से काफी उम्मीदें हैं और सूचना के इस्तेमाल की कीमत आम उपभोक्ता की पहुँच में है। इंटरनेट (internet) को सूचना क्षेत्र की उन्नति में एक अहम मील का पत्थर माना गया है। इंटरनेट की शुरुआत संयुक्त राज्य अमेरिका में हुई और 1995 के बाद इस के प्रचार में तेजी देखने में आई। इस प्रद्यौगिकी के द्वारा वर्ल्ड वैब (www) के साथ कंप्यूटरों को आपस में जोड़ कर एक ऐसा ताना बुना गया जो कि आज के समय में व्यापारिक गतिविधियों के लिए प्राथमिक ज़रूरत बनता जा रहा है। इंटरनेट विश्व स्तर पर एक ऐसा ढांचा है जिस में कंप्यूटर नैटवर्क आपस में जुड़े हुए हैं।

आज के वैज्ञानिक युग की खोजों के सुमेल ने इंटरनेट के प्रचार और प्रसार में अहम भूमिका अदा की है। किसी समय सिर्फ कंप्यूटर के द्वारा ही इंटरनेट तक पहुँच की जा सकती है परंतु विज्ञान में उन्नति के संयोग अब मोबाइल फोन एवं टेबलेट के द्वारा भी इंटरनेट का इस्तेमाल आसानी से किया जा सकता है। पिछले कुछ समय में भारत में इंटरनेट प्रयोगकर्ताओं की संख्या में तेजी से विस्तार हुआ है। मुहैय्या आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2014-15 में पूरे भारत में लगभग 30.23 करोड़ इंटरनेट उपभोक्ता थे जिनमें लगभग 20.31 करोड़ नैरोबैंड इंटरनेट उपभोक्ता और 9.92 करोड़, बरौडबैंड इंटरनेट उपभोक्ता थे। भार आधारित इंटरनेट उपभोक्ताओं की संख्या 1.90 करोड़ थी जबकि वायरलैस इंटरनेट उपभोकताओं की संख्या लगभग 28.33 करोड़ थी। शहरी उपभोक्ताओं की संख्या लगभग 19.47 करोड़ थी जबकि ग्रामीण इंटरनेट उपभोक्ताओं की संख्या लगभग 10.75 करोड़ थी। वर्ष 2019-20 में कुल इंटरनेट उपभोक्ताओं की संख्या 74.32 करोड़ हो गई जो कि 2014-15 के संबंध लगभग ढाई गुना अधिक है। वर्ष 2014-15 से वर्ष 2019-20 तक ग्रामीण इंटरनेट उपभोक्ताओं की संख्या में वृद्धि की दर शहरी इंटरनेट उपभोक्ताओं की वृद्धि की दर से अधिक दर्ज की गई। 2019-20 में शहरी इंटरनेट उपभोक्ताओं की संख्या लगभग 45.72 करोड़ थी एवं ग्रामीण इंटरनेट उपभोक्ताओं की संख्या लगभग 28.59 करोड़ थी।

पिछले कुछ वर्षों में बरौडबैंड इंटरनेट उपभोक्ताओं की संख्या में अधिक बढ़ोतरी हुई है। वर्ष 2014-15 में लगभग 9.92 करोड़ इंटरनेट उपभोक्ता बरोडबैंड का इस्तेमाल करते थे जबकि वर्ष 2019-20 में यह संख्या लगभग 68.74 करोड़ दर्ज की गई। बरौडबैंड सेवा के साथ इंटरनेट तक अधिक रफ्तार के साथ पहुँच की जा सकती है। मोबाइल फोन पर इंटरनेट के इस्तेमाल में वृद्धि का रुझान देखने में आया है और आगामी समय में इस रुझान के बरकरार रहने की उम्मीद है।

कृषि व्यापार एवं इंटरनेट मंडीकरण : इंटरनेट एक ऐसी प्रौद्यौगिकी के रूप में सामने आया जिस कारण कृषि व्यापार उद्यमी दुनिया भर में अपने व्यापार का प्रचार कर सकते हैं। इंटरनेट ने पूरे विश्व की मंडी में सरहदों को तोड़ कर सारे विश्व को एक मंडी के तौर पर प्रस्तुत किया है। नई प्रौद्यौगिकी नये मौके लेकर उपस्थित होती है। जागरूक एवं तत्पर कृषि व्यापार उद्यमी इंटरनेट का इस्तेमाल अपने व्यापार की प्रफुल्लता एवं बेहतरी के लिए कर सकते हैं।

प्रभावी कृषि व्यापार प्रबंध करने के लिए कई व्यापारिक गतिविधियों में तालमेल बैठाना पड़ता है। इन गतिविधियों में कच्चे माल की खरीद, भंडारण, उत्पादन, वित्तीय बुद्धिमत्ता, मंडीकरण एवं प्रौद्यौगिकी आदि दो प्रभावी ढंगों से इस्तेमाल आदि को शामिल किया जा सकता है। व्यापार की लाभदायक एवं वृद्धि के लिए ये सभी गतिविधियां संगल एवं कड़ियों की तरह पिरोई होती हैं। किसी भी संगल की क्षमता उसकी सबसे कमज़ोर कड़ी के बराबर मानी जाती है। इसी तरह किसी भी व्यापार की क्षमता इसकी सबसे कमज़ोर गतिविधि के बराबर मानी जाती है। आमतौर पर कृषि व्यापार उद्यमी मंडीकरण की समस्या के बारे में अधिक चिंता करते हैं और मंडीकरण को कृषि व्यापार की एक कमज़ोर कड़ी के तौर पर जाना जाता है। इंटरनेट मंडीकरण कृषि व्यापार के क्षेत्र में नये मौके प्रदान कर रहा है। इस लेख का उद्देश्य इंटरनेट मंडीकरण की धारणा एवं गतिविधियों के बारे में कृषि उद्यमियों को परिचित करवाना है। इंटरनेट मंडीकरण को प्रभावी ढंग से समझने के लिए मंडीकरण के बारे में आरंभिक बातों की जानकारी होना आवश्यक है। इसलिए इंटरनेट मंडीकरण के बारे में चर्चा करने से पहले मंडीकरण के बारे में संक्षिप्त रूप में जानकारी दी जा रही है।

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