भारतीय कृषि में मौसम-एक जुआ
Modern Kheti - Hindi|1st November 2021
कृषि एक जुआ है, क्योंकि कृषि पूर्ण रूप से मौसम पर निर्भर होती है। भारतीय कृषि सदियों से अधिकांशत मौसम और मानसून की विशेषताओं के मीनाज पर निर्भर है।
लखमा राम चौधरी

मौसम और जलवायु की अनिश्चितता देश की खाद्यान्न सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा खतरा है, ओलावृष्टि, चक्रवात सुखांड, लू, अनावृष्टि, अतिवृष्टि और शीतलहर जैसे प्रचंड मौसम के कारण फसल उत्पादन में प्रत्येक वर्ष काफी क्षति होती है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग द्वारा उपलब्ध जलवायु संसाधनों के अलावा मृदा और जल संसाधनों का सक्षम उपयोग तथा प्रचंड मौसम के प्रतिकुल प्रभाव को कम करके और अनुकूल मौसम का लाभ उठाने के लिए कृषि मौसम परामर्श सेवाओं के रूप में अति विशेष प्रकार की जानकारी किसानों को देती है। किसान बंधु अनुकूल मौसम का लाभ उठाते हुए और प्रतिकूल मौसम के क्षति को कम करके कृषि उत्पादन में महत्वपूर्ण रूप से योगदान कर सकते हैं।

सन् 1932 में स्थापित भारतीय मौसम विज्ञान विभाग का मुख्य उद्देश्य किसानों को मौसम संबंधी कृषि परामर्श सेवा प्रदान करना एवं मौसम पूर्वानुमान के आलोक में फसलों पर प्रतिकूल मौसम के प्रभाव को कम करने की चेष्टा करना और अनुकूल मौसम का लाभ उठाते हुए कृषि उत्पादन को बढ़ाना है। मौसम विज्ञान विभाग की प्रमुख गतिविधियां चार भागों में वर्गीकृत हैं।

1. तकनीकी सहायता

2. कृषि परामर्श सेवा

3. अनुसंधान और विकास तथा

4. मानव संसाधन विकास

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