तेल बीजों की आत्मनिर्भरता के लिए सरसों की खेती
Modern Kheti - Hindi|1st October 2021
गेहूँ के मुकाबले सरसों एवं दालों की खेती पर खर्च भी कम आता है और दालें हवा बीच की नाईट्रोजन भी मिट्टी में फिक्स करती हैं। इसके साथ ही सरसों का तेल निकलवा कर एवं दालों की सफाई/दलायी करवा कर भी अधिक आमदनी प्रात की जा सकती है जो आमदनी के इस मामूली अंतर को पूरा कर सकती है।

पीला इंकलाबः लगभग तीस बरस पहले उस समय के प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने एक शुरुआत की जिसको बाद में पीला इंकलाब कहा गया। 1986 में शुरू किया गया तेल बीज तकनीकी मिशन (The Oilseeds Technology Mission) जिसने भारत को दस वर्षों में ही 1993-94 तक एक मुख्य तेल-बीज आयात करने वाले देश से लगभग स्वैः निर्भर बना दिया। 1993-94 में भारत अपने देश में ही 97 प्रतिशत खाने वाले तेल पैदा करने वाला देश बन गया था। सिर्फ 3 प्रतिशत तेल-बीज बाहर से मंगवाने की जरूरत थी। इन वर्षों में सरसों, सूरजमुखी, मूंगफली और सोयाबीन अधीन क्षेत्रफल भी बढ़ा और औसत उत्पादन भी। फिर शुरू हुआ घाण और भारतीय सरकार को विश्व व्यापार संगठन (WHO) के दबाव अधीन आ गई और पीला इंकलाब खत्म हो गया। पीले इंकलाब का अंत एक मिसाल है कि कैसे घरेलू तेलबीज क्षेत्र का अंत आर्थिक सुधार की भेंट चढ़ाया गया। इंपोर्ट ड्यूटी घटने से बाहर से आयात किये तेल-बीजों के सामने भारतीय किसानों के घुटने लग गए और वह तेल-बीजों की उस स्तर पर खेती करना बड़ी संख्या में छोड़ गए।

तेल बीज पैदा करना एवं इंपोर्ट करने में भारत एक अग्रणीय देश है। अमेरिका, चीन एवं ब्राजील के बाद भारत का नाम तेल बीज आर्थिकता में चौथे स्थान पर आता है। पैट्रोलियम एवं सोनो के इंपोर्ट के बाद तेल बीज सबसे अधिक लागत वाली फसल है। भारत में 7 तरह के तेल बीज मुख्य तौर पर पैदा किये जाते हैं। सरसों, सूरजमुखी, मूंगफली, सोयाबीन, तिल, कुसुम एवं निगर। भारत में लगभग 2.7 करोड़ हैक्टेयर में तेल बीजों की खेती होती है, जिसका बड़ा हिस्सा (लगभग 72 प्रतिशत) बारानी खेती अधीन आता है।

खेती एवं किसान भलाई मंत्रालय की वैबसाईट से मिली जानकारी के अनुसार वित्तीय वर्ष 2020-21 में भारत में 3.657 करोड़ मी.टन तेल बीज उत्पादन का अनुमान है जो 2019-20 के मुकाबले (3.32 करोड़ मी.टन) 33.5 लाख मी.टन अधिक रहा। तेल बीज फसलों अधीन क्षेत्रफल का लगभग 90 प्रतिशत सोयाबीन, मूंगफली एवं सरसों अधीन रहा। इस वृद्धि के बावजूद भी भारत में तेल बीजों का इंपोर्ट बिल 75000 करोड़ के लगभग रहा।

नेशनल मिशन ऑन ऑयलसीड एंड ऑयल पाम (NMOOP) प्रोग्राम अधीन तेल बीज उत्पादन के लिए क्षेत्रफल एवं पैदावार बढ़ाने के लिए मानक बीजों की मिनी बीज किटें किसानों को मुहैय्या करवाई जा रही हैं। मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान, गुजरात, कर्नाटका, तेलंगाना एवं छत्तीसगढ़ के 41 जिलों में मिश्रित खेती में 76.03 करोड़ के सोयाबीन बीज बाँटे जाएंगे। इसके इलावा मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान, कर्नाटका, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश, गुजरात एवं छत्तीसगढ़ के 73 जिलों में 104 करोड़ खर्च किए और 3,90, 000 हैक्टेयर की संभावना भी देखी जा रही है। मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान, कर्नाटका, आंध्राप्रदेश, गुजरात एवं तमिलनाडु में 13 करोड़ रु.की 74000 मूंगफली बीजों की मिनी बीज किटों के लिए भी स्वीकृति दी गई है।

मिशन की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत में तेल बीज उत्पादन का लगभग 88 प्रतिशत से अधिक हिस्सा सोयाबीन (34 प्रतिशत), सरसों (27 प्रतिशत) और मूंगफली (27 प्रतिशत) से आता है; फसलों से प्राप्त तेल का 80 प्रतिशत से अधिक हिस्सा भी इन तीन फसलों से ही आता है। सरसों (35 प्रतिशत), सोयाबीन (23 प्रतिशत) एवं मूंगफली (25 प्रतिशत)। आंध्राप्रदेश (मूंगफली), गुजरात (मूंगफली), हरियाणा (सरसों), कर्नाटका (मूंगफली), मध्य प्रदेश (सोयाबीन), महाराष्ट्रा (सोयाबीन), राजस्थान (सरसों एवं सोयाबीन), तमिलनाडू (मूंगफली), उत्तर प्रदेश (सरसों) और पश्चिमी बंगाल (सरसों) राज्यों का तेल बीज उत्पादन में 95 प्रतिशत योगदान है।

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