ड्रिप (टपक) सिंचाई द्वारा रासायनिक उर्वरकों का प्रयोग
Modern Kheti - Hindi|1st October 2021
ड्रिप (टपक) या बूंद-बूंद सिंचाई, सिंचाई की एक ऐसी विधि है जिसमें पानी थोड़ी-थोड़ी मात्रा में, कम अन्तराल पर सीधा पौधों की जड़ों तक पहुंचाया जाता है। टपक सिंचाई के बढ़ते उपयोग के साथ यह जानना जरूरी हो जाता है कि कौन-कौन से रासायनिक उर्वरकों का प्रयोग किस प्रकार इस विधि द्वारा किया जाना चाहिए।
डॉ. ए.एस. यादव, सहायक प्राध्यापक, डॉ. सुहेल मेंहदी सहायक प्राध्यापक एवं डॉ. अनीता यादव

टपक सिंचाई में जिस तरह पौधे को ड्रिपर्स के जरिए पानी दिया जाता है, उसी तरह रासायनिक उर्वरक की कम मात्रा को 10 से 12 बार पानी में घोल कर वेंचूरी या उर्वरक टैंक/पम्प की सहायता से ड्रिपर्स द्वारा सीधे पौधे की जड़ों तक पहुंचाया जाता है। ऐसा करने से महंगे मूल्य वाले उर्वरक का नुकसान नहीं हो पाता यानि उर्वरक के व्यय में बचत होती है। इस विधि द्वारा जहां फसल को नियमित रूप से आवश्यक मात्रा में उर्वरक मिलती है, वहीं पौधों के स्वस्थ विकास के साथ-साथ पैदावार में भी महत्वपूर्ण बढ़ोतरी होती है।

टपक सिंचाई योग्य उर्वरक : टपक सिंचाई द्वारा प्रयोग किये जाने वाला उर्वरक पानी में पूर्णतः घुलनशील होना चाहिए व इसकी टपक सिंचाई यंत्र से कोई भी रासायनिक क्रिया नहीं होनी चाहिए। टपक सिंचाई द्वारा पानी में घुलनशील व तरल उर्वरकों का प्रयोग अधिक लाभकारी रहता है।

1. नत्रजन युक्त उर्वरकः अमोनियम सल्फेट, अमोनियम क्लोराइड, कैल्शियम, नाईट्रेट, डाई अमोनियम फॉस्फेट, पोटैशियम नाइट्रेट, यूरिया आदि नत्रजन युक्त उर्वरक हैं जो जल में सुगमता से घुल जाते हैं। पौधे नत्रजन को नाइट्रेट रूप में ग्रहण करते हैं और पोषण प्राप्त करते हैं। अमोनियम सल्फेट तथा अमोनियम क्लोराइड में से नाईट्रेट का रूपान्तर अत्यन्त तीव्रता से होता है, इसलिए ये फसलों के लिए ज्यादा अनुकूल रहता है। नत्रजन युक्त उर्वरकों में 'यूरिया' का प्रयोग श्रेष्ठ सिद्ध हुआ है। यूरिया जल में पूर्णतः घुलनशील है तथा इसमें समाविष्ट नत्रजन का 90-96 प्रतिशत तक का भाग फसल ग्रहण कर लेती है। परन्तु दूसरी ओर एक कठिनाई यह है कि अगर ड्रिपर्स या लेटरल्स में यूरिया युक्त जल का थोड़ा भी भाग रह जाए तो वहीं सूक्ष्म जीवाणु पैदा होने लगते हैं जिससे ड्रिपर्स के छिद्र भर जाते हैं। इसके उपचार हेतु उर्वरक देने के तुरन्त बाद, कम से कम 30 से 45 मिनट तक पानी चालू रखना चाहिए। इससे यूरिया युक्त पानी के ठहरने का सवाल ही नहीं रहेगा।

2. फॉस्फोरस युक्त उर्वरकः फॉस्फोरस युक्त उर्वरक मुख्यतः चार प्रकार की होती

(1) सुपर फॉस्फेट (2) डी.ए.पी (3) बोनमील (4) रॉक फॉस्फेट

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