दुधारू पशुओं में ब्रुसीलोसिस-एक चिंताजनक रोग
Modern Kheti - Hindi|15th September 2021
ब्रुसीलोसिस बीमारी को मनुष्यों में माल्टा फीवर/अनडूलैंट फीवर या बैंग बीमारी के नाम से जाना जाता है। कुछ जगह इस बीमारी को साईप्रस फीवर या रोक फीवर भी कहा जाता है। मनुष्य में यह बीमारी मुंह के द्वारा, सांस के द्वारा तथा बीमार पशु के सीधे संपर्क में आने से होती है। इसलिए पशुपालक तथा वेटनरी स्टाफ इस बीमारी के लिए संवेदनशील है, क्योंकि वह सीधे रूप से पशुओं के संपर्क में रहते हैं।
राजेश कसरीजा तथा नमन खुराना

हम सबके लिए यह गर्व करने वाली बात है कि हमारा देश भारत पूरे संसार भर में दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में नम्बर एक पर है। साल 2018-19 में हमारे देश में कुल दूध का उत्पादन 187.70 मिलीयन टन दर्ज किया गया है। परंतु साथ में ही हमारे देश में संसार भर में सबसे ज्यादा पशु हैं। 20वीं राष्ट्रीय पशु गणना के अनुसार भारत में कुल 535.78 मिलीयन पशु दर्ज किए गए, जिनमें 192.49 मिलीयन गाय जाति के तथा 109.85 मिलीयन भैंस जाति के पशु थे। भाव यह है कि हमारे देश में पशुओं की संख्या भी अधिक है।

गांवों में लगभग हर दूसरे घर में घर-परिवार की दूध की जरूरत पूरी करने के लिए दो-तीन पशु रखे जाते हैं। कई किसान भाईयों ने तो दुधारू पशुओं के पालन को व्यापारिक रूप पर रखकर बड़े-बड़े डेयरी फार्म भी बनाए हैं। बहुत सारे पशुपालकों के लिए डेयरी तो आय का मुख्य स्रोत है।

पशुपालक दिन रात सख्त मेहनत करते हैं, पशुओं के सही प्रबंधन के लिए सदैव चिंतित रहते हैं तथा काफी समय हर रोज पशुओं के साथ पशु बन कर लगे रहते हैं। परंतु बहुत ही कम किसान भाई/पशुपालक इस बात को जानते हैं कि डेयरी पशुओं से उन्हें कुछ रोग भी लग सकते हैं। पशुओं से मनुष्यों में फैलने वाली बीमारियों को जूनोटिक बीमारियां कहा जाता है। इस लेख में दुधारू पशुओं से होने वाली एक बीमारी-ब्रुसीलोसिस के बारे में जानकारी दी जा रही है।

पिछले दिनों समाचार पत्रों तथा टैलीविजन चैनलों पर ब्रुसीलोसिस बीमारी के बारे में तो कई किसानों/पशुपालकों ने यह तो पढ़ा या सुना होगा कि हमारे पड़ोसी देश चीन में हजारों मनुष्य ब्रुसीलोसिस बीमारी से ग्रसित हो गए। हमारे देश में प्रतिवर्ष लगभग एक लाख मनुष्य ब्रुसीलोसिस से पीड़ित होते हैं तथा इस बीमारी की मृत्यु दर लगभग 2 प्रतिशत है। सबसे पहले पशुओं में ब्रुसीलोसिस बीमारी के बारे में चर्चा करते हैं।

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सरसों की खेती ऐसे करें उत्पादन में बढ़ोतरी

सरसों की खेती : इस साल सरसों के भावों में हुई बढ़ोतरी से किसानों का सरसों की खेती की ओर रूझान बढ़ रहा है। इससे इस आने वाले सीजन में किसान अधिक क्षेत्रफल पर इसकी बुवाई कर सकते हैं। ऐसी उम्मीद है। इस बार सरसों उत्पादक राज्यों सरसों की खेती का रकबा बढ़ सकता है। ऐसा इसलिए कि इस सीजन सरसों के भाव ऊंचे रहे जिससे किसानों को भी इसे बेचने पर काफी फायदा हुआ। इससे उत्साहित किसान अब सरसों की खेती पर अपना ध्यान बढ़ा सकते हैं। आगे भी उम्मीद की जा रही है कि सरसों के भावों में तेजी बनी रहेगी। इससे किसानों को सीजन में सरसों की फसल से लाभ होगा।

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टमाटर का सेवन और स्वास्थ्य लाभ

परिचय : टमाटर विश्व में सबसे ज्यादा प्रयोग होने वाली सब्जी है। इसका वानस्पतिक नाम लाइकोपर्सिकन एस्कुलेंटम मिल है और वर्तमान समय में इसे सोलनम लाइकोपर्सिकम कहते हैं। टमाटर जितना देखने में अच्छा लगता है, उतना ही वह खाने में स्वादिष्ट भी है और स्वास्थ्यवर्धक भी।

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