भूमि सुपोषण महत्व व उपयोगी घटक
Modern Kheti - Hindi|15th September 2021
प्रस्तावना : भूमि, कृषि का मूल आधार स्तंभ है जिसके बिना खेती की परिकल्पना नहीं की सकती है। बदलते समय के साथ हमारे देश की भूमि की गुणवत्ता में कमी आई है, जोकि एक चिंता का विषय है।
सुनील कुमार, रविंद्र सिंह, राजेंद्र वावरे व प्रतिभा ठोंबरे

बढ़ते रासायनिक उर्वरकों के असंतुलित उपयोग से भूमि की रासायनिक व भौतिक गुणों का नुकसान हो रहा है। भूमि की गुणवत्ता बनाये व बढ़ाने के लिए विभिन्न जैविक व प्राकृतिक घटकों का प्रयोग करना चाहिये। ये घटक विभिन्न प्राकृतिक संसाधनों से बनाये जा सकते है। इस प्रकार की खेती करने का मुख्य उद्देश्य यह है कि रासायनिक उर्वरकों का उपयोग न हो तथा इसके स्थान पर जैविक उत्पाद का उपयोग अधिक से अधिक हो लेकिन वर्तमान में बढ़ती जनसंख्या को देखते हुए तुरंत उत्पादन में कमी न हो अत: इसे (रासायनिक उर्वरकों के उपयोग को) वर्ष प्रति वर्ष चरणों में कम करते हुए जैविक उत्पादों को ही प्रोत्साहित करना है। जैविक खेती का प्रारूप निम्नलिखित प्रमुख क्रियाओं के क्रियान्वित करने से प्राप्त किया जा सकता है। इसकी पूर्ति के लिए कुछ पदार्थ निर्मिती व प्रयोग निम्न प्रस्तुत किये गये है, जिसमे मुख्त यह जीवामृत, बीजामृत, विभिन्न पोषक तत्व जैसे नाइट्रोजन, फास्फोर्स, पोटाश व भु-सुधारक तथा एक विशेष कल्चर गो.कृपा अमृतम है :

1. जीवामृत : जीवामृत एक अत्याधिक प्रभावशाली जैविक खाद है, जिसे गोबर के साथ पानी में कई और पदार्थ जैसे गौमूत्र, बरगद या पीपल के नीचे की मिट्टी, गुड़ और दाल का आटा मिलाकर तैयार किया जाता है। जीवामृत पौधों की वृद्धि और विकास के साथसाथ मिट्टी की संरचना सुधारने में काफी मदद करता है। यह पौधों की विभिन्न रोगाणुओं से सुरक्षा करता है तथा पौधों की प्रतिकारक क्षमता को भी बढ़ाने का कार्य करता है, जिससे पौधे स्वस्थ बने रहते हैं तथा फसल से बहुत ही अच्छी पैदावार मिलती है। फसल को दी जाने वाली प्रत्येक सिंचाई के साथ 200 लीटर जीवामृत का प्रयोग प्रति एकड़ की दर से किया जा सकता है, अथवा इसे अच्छी तरह से छानकर टपक या छिड़काव सिंचाई के माध्यम से भी प्रयोग कर सकते हैं, जोकि एक एकड़ क्षेत्र के लिए पर्याप्त होता है। छिड़काव के लिए 10 से 20 लीटर तरल जीवामृत को 200 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव किया जा सकता है।

निर्माण विधि :

Continue reading your story on the app

Continue reading your story in the magazine

MORE STORIES FROM MODERN KHETI - HINDIView All

सरसों की खेती ऐसे करें उत्पादन में बढ़ोतरी

सरसों की खेती : इस साल सरसों के भावों में हुई बढ़ोतरी से किसानों का सरसों की खेती की ओर रूझान बढ़ रहा है। इससे इस आने वाले सीजन में किसान अधिक क्षेत्रफल पर इसकी बुवाई कर सकते हैं। ऐसी उम्मीद है। इस बार सरसों उत्पादक राज्यों सरसों की खेती का रकबा बढ़ सकता है। ऐसा इसलिए कि इस सीजन सरसों के भाव ऊंचे रहे जिससे किसानों को भी इसे बेचने पर काफी फायदा हुआ। इससे उत्साहित किसान अब सरसों की खेती पर अपना ध्यान बढ़ा सकते हैं। आगे भी उम्मीद की जा रही है कि सरसों के भावों में तेजी बनी रहेगी। इससे किसानों को सीजन में सरसों की फसल से लाभ होगा।

1 min read
Modern Kheti - Hindi
15th October 2021

बछड़े/बछियों को स्वस्थ रखने हेतु सुझाव

आज की बछड़ी या बछड़ा कल की होने वाली गाय/भैंस या बैल है। अगर जन्म से ही बछड़े या बछड़ी की देखभाल अच्छे से की जाए तो वह भविष्य में अच्छी गाय-भैंस या बैल बन सकते हैं। इसलिए शुरूआती दौर में इनकी देखभाल, इनके स्वास्थ्य को ठीक रखने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

1 min read
Modern Kheti - Hindi
15th October 2021

टमाटर का सेवन और स्वास्थ्य लाभ

परिचय : टमाटर विश्व में सबसे ज्यादा प्रयोग होने वाली सब्जी है। इसका वानस्पतिक नाम लाइकोपर्सिकन एस्कुलेंटम मिल है और वर्तमान समय में इसे सोलनम लाइकोपर्सिकम कहते हैं। टमाटर जितना देखने में अच्छा लगता है, उतना ही वह खाने में स्वादिष्ट भी है और स्वास्थ्यवर्धक भी।

1 min read
Modern Kheti - Hindi
15th October 2021

भारतीय कृषि का गिरता स्तर एवं सुधार के प्रयास

भारत एक कृषि प्रधान देश है तथा इसके इतिहास में कृषि का महत्वपूर्ण स्थान है। पुरातन काल से ही कृषि का भारतवासियों के जीवन में एक विशेष महत्व रहा है।

1 min read
Modern Kheti - Hindi
15th October 2021

फूलगोभी की वैज्ञानिक खेती

सब्जियों में फूलगोभी का विशिष्ट स्थान है।

1 min read
Modern Kheti - Hindi
15th October 2021

सहकारिता की शक्ति एवं कृषि विकास

कृषि व्यवसाय को अब एक व्यापारिक इकाई के तौर पर देखा जा रहा है जिसमें बिजाई, उत्पादन से लेकर मंडीकरण तक का सफर संगठित हो रहा है। ऐसे में किसानों की आपसी सांझ ही कृषि आमदनी बढ़ा सकती है जैसे कि पहले लेख में कहा गया है कि हमें आपसी भाईचारे की साझ की शक्ति को पहचानना पड़ेगा। संगठित होकर संयुक्त व्यापारिक ढांचे पैदा करने पड़ेंगे।

1 min read
Modern Kheti - Hindi
15th October 2021

धान की कटाई और भंडारण कैसे करें?

देश की एक बड़ी आबादी का मुख्य खाना चावल ही है, लिहाजा चावल की जरूरत हमेशा होती है। इसीलिए धान के भंडारण की और भी अहमियत बढ़ जाती है, ताकि वह लंबे अरसे तक महफूज रह सके।

1 min read
Modern Kheti - Hindi
1st October 2021

तेल बीजों की आत्मनिर्भरता के लिए सरसों की खेती

गेहूँ के मुकाबले सरसों एवं दालों की खेती पर खर्च भी कम आता है और दालें हवा बीच की नाईट्रोजन भी मिट्टी में फिक्स करती हैं। इसके साथ ही सरसों का तेल निकलवा कर एवं दालों की सफाई/दलायी करवा कर भी अधिक आमदनी प्रात की जा सकती है जो आमदनी के इस मामूली अंतर को पूरा कर सकती है।

1 min read
Modern Kheti - Hindi
1st October 2021

ड्रिप (टपक) सिंचाई द्वारा रासायनिक उर्वरकों का प्रयोग

ड्रिप (टपक) या बूंद-बूंद सिंचाई, सिंचाई की एक ऐसी विधि है जिसमें पानी थोड़ी-थोड़ी मात्रा में, कम अन्तराल पर सीधा पौधों की जड़ों तक पहुंचाया जाता है। टपक सिंचाई के बढ़ते उपयोग के साथ यह जानना जरूरी हो जाता है कि कौन-कौन से रासायनिक उर्वरकों का प्रयोग किस प्रकार इस विधि द्वारा किया जाना चाहिए।

1 min read
Modern Kheti - Hindi
1st October 2021

टमाटर फसल के मुख्य कीट समस्या तथा समाधान

किसान भाईयों से निवेदन है कि सब्जियों में कीट प्रबन्धन के लिए विशेषज्ञों की सलाह लेकर ही कीटनाशकों का प्रयोग करें। टमाटर में मुख्य रूप से निम्न कीटों का आक्रमण होता है।

1 min read
Modern Kheti - Hindi
1st October 2021