जलवायु परिवर्तन का खेतीबाड़ी, खाद्य सुरक्षा एवं पशुपालन पर प्रभाव
Modern Kheti - Hindi|1st September 2021
जलवायु परिवर्तन ने हमारे देश को बुरी तरह से प्रभावित कर रखा है जिसकी अनेकों चिन्ताजनक स्थितियां हैं जैसे अनियमित मानसून, कृषिमण्डल का पलायन, महामारी जैसे रोगों में वृद्धि, समुद्र तल का ऊपर उठना, स्वच्छ जल उपलब्धता में बदलाव, सूखा, गर्म हवायें, ओला, तूफान, बाढ़ इत्यादि।
डा. राम प्रताप सिंह, डा. रवि शंकर सिंह, डा. राज कुमार पाठक एवं विपुल सिंह

मौसम परिवर्तन कभी भी अचानक नहीं होता, पहले प्रकृति चेतावनी देती है। मानव विकास के समय से लगभग 2 लाख वर्षों में पृथ्वी ने हिमयुग झेला है, अब गर्मयुग झेलने की नौबत आ रही है। यही हमारी परेशानी का सबक है। खेती आधारित अर्थव्यवस्था वाले देश के लिये जो मानसून पर निर्भर है, स्थिति काफी खतरनाक हो सकती है। आई.पी.सी.सी. की पांचवी रिपोर्ट में भी आगाह किया गया है कि तेजी से तापमान बढ़ेगा, जिसके चलते गर्मी से लोगों की मौत का सिलसिला भी बढ़ेगा।

हमारे देश में गर्मी के बढ़ रहे स्वरूप पर अब किसी को कहीं से कोई सन्देह नहीं रह गया है। इसका दुष्प्रभाव वन जीवन, कृषि, रोग वृद्धि, स्थानीय मौसम, समुद्र तल वृद्धि इत्यादि पर पड़ रहा है। बढ़ती आबादी, तीव्र शहरीकरण, औद्योगिकीकरण, निर्वनीकरण और अपशिष्टों का निष्कासन ये सभी प्राकृतिक संसाधनों पर भारी पड़ रहे हैं और इससे भूमि, जल, वायु, जैव विविधिता, वनों और जैव संसाधनों में गुणात्मक और मात्रात्मक कमीं बढ़ती जा रही है। ऐसे संसाधनों के क्षीण होने से जो पुनः अपनी पूर्व अवस्था में नहीं आ सकते, खेती व खेती योग्य भू-भागों में कमी व क्षेत्रीय विषमता वृद्धि एवं प्राकृतिक संसाधनों का कम होना तथा जैवअजैव दबाव में वृद्धि जैसी परिस्थितियों में कठिनाइयों को और अधिक बढ़ाया है।

हमारी मृदा का लगभग 70 प्रतिशत भाग जैविक कार्बन व अन्य सूक्ष्म पोषक तत्वों के अभाव में है। रसायनों एवं कीटनाशकों के प्रयोग और औद्योगिक अपशिष्टों से जल व मृदा में विषाक्तता बढ़ रही है। वर्षों से कृषि में होने वाले घाटों ने नई पीढ़ी को अन्य व्यवसायों की ओर आकर्षित एवं साथ ही दूसरे व्यवसायों के लिये बुनियाद का काम भी किया है। भूमि सुलभता एवं कृषि उत्पादन में कमी निरन्तर बढ़ती आबादी के भरण-पोषण पर बहुत बड़ी चुनौती है। संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (यू.एन.ई.पी.) की रिपोर्ट में 'आउट लुक फार ग्लैशियर स्नो' ने भविष्यवाणी की है कि ग्लोबल वार्मिंग के कारण सन् 2050 तक हिमालय क्षेत्र के 1500 हिमनद और 9000 हिमतालों (ग्लेशियर लेक) में से आधे और 2100 तक लगभग सारे ही समाप्त हो जायेंगे। यह स्थिति केवल हिमालयी क्षेत्र की ही नहीं अपितु पूरे विश्व के ग्लेशियर क्षेत्र की है। इतनी तेजी से ग्लेशियर पिघलने से विश्व की सभी छोटी बड़ी नदियों में पहले बाढ़ आयेगी और फिर वे सूख जायेंगी। परिणामतः विश्व के विभिन्न हिस्सों में जलापूर्ति नहीं हो पायेगी। भूमितल पानी व अन्य जल स्रोत पहले ही समाप्त होते जा रहे हैं। ऐसी स्थिति में भविष्य में बहुत बड़ा जल संकट आयेगा और हम सभी जानते हैं कि पानी के बिना किसी भी तरह के जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती है।

Continue reading your story on the app

Continue reading your story in the magazine

MORE STORIES FROM MODERN KHETI - HINDIView All

सरसों की खेती ऐसे करें उत्पादन में बढ़ोतरी

सरसों की खेती : इस साल सरसों के भावों में हुई बढ़ोतरी से किसानों का सरसों की खेती की ओर रूझान बढ़ रहा है। इससे इस आने वाले सीजन में किसान अधिक क्षेत्रफल पर इसकी बुवाई कर सकते हैं। ऐसी उम्मीद है। इस बार सरसों उत्पादक राज्यों सरसों की खेती का रकबा बढ़ सकता है। ऐसा इसलिए कि इस सीजन सरसों के भाव ऊंचे रहे जिससे किसानों को भी इसे बेचने पर काफी फायदा हुआ। इससे उत्साहित किसान अब सरसों की खेती पर अपना ध्यान बढ़ा सकते हैं। आगे भी उम्मीद की जा रही है कि सरसों के भावों में तेजी बनी रहेगी। इससे किसानों को सीजन में सरसों की फसल से लाभ होगा।

1 min read
Modern Kheti - Hindi
15th October 2021

बछड़े/बछियों को स्वस्थ रखने हेतु सुझाव

आज की बछड़ी या बछड़ा कल की होने वाली गाय/भैंस या बैल है। अगर जन्म से ही बछड़े या बछड़ी की देखभाल अच्छे से की जाए तो वह भविष्य में अच्छी गाय-भैंस या बैल बन सकते हैं। इसलिए शुरूआती दौर में इनकी देखभाल, इनके स्वास्थ्य को ठीक रखने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

1 min read
Modern Kheti - Hindi
15th October 2021

टमाटर का सेवन और स्वास्थ्य लाभ

परिचय : टमाटर विश्व में सबसे ज्यादा प्रयोग होने वाली सब्जी है। इसका वानस्पतिक नाम लाइकोपर्सिकन एस्कुलेंटम मिल है और वर्तमान समय में इसे सोलनम लाइकोपर्सिकम कहते हैं। टमाटर जितना देखने में अच्छा लगता है, उतना ही वह खाने में स्वादिष्ट भी है और स्वास्थ्यवर्धक भी।

1 min read
Modern Kheti - Hindi
15th October 2021

भारतीय कृषि का गिरता स्तर एवं सुधार के प्रयास

भारत एक कृषि प्रधान देश है तथा इसके इतिहास में कृषि का महत्वपूर्ण स्थान है। पुरातन काल से ही कृषि का भारतवासियों के जीवन में एक विशेष महत्व रहा है।

1 min read
Modern Kheti - Hindi
15th October 2021

फूलगोभी की वैज्ञानिक खेती

सब्जियों में फूलगोभी का विशिष्ट स्थान है।

1 min read
Modern Kheti - Hindi
15th October 2021

सहकारिता की शक्ति एवं कृषि विकास

कृषि व्यवसाय को अब एक व्यापारिक इकाई के तौर पर देखा जा रहा है जिसमें बिजाई, उत्पादन से लेकर मंडीकरण तक का सफर संगठित हो रहा है। ऐसे में किसानों की आपसी सांझ ही कृषि आमदनी बढ़ा सकती है जैसे कि पहले लेख में कहा गया है कि हमें आपसी भाईचारे की साझ की शक्ति को पहचानना पड़ेगा। संगठित होकर संयुक्त व्यापारिक ढांचे पैदा करने पड़ेंगे।

1 min read
Modern Kheti - Hindi
15th October 2021

धान की कटाई और भंडारण कैसे करें?

देश की एक बड़ी आबादी का मुख्य खाना चावल ही है, लिहाजा चावल की जरूरत हमेशा होती है। इसीलिए धान के भंडारण की और भी अहमियत बढ़ जाती है, ताकि वह लंबे अरसे तक महफूज रह सके।

1 min read
Modern Kheti - Hindi
1st October 2021

तेल बीजों की आत्मनिर्भरता के लिए सरसों की खेती

गेहूँ के मुकाबले सरसों एवं दालों की खेती पर खर्च भी कम आता है और दालें हवा बीच की नाईट्रोजन भी मिट्टी में फिक्स करती हैं। इसके साथ ही सरसों का तेल निकलवा कर एवं दालों की सफाई/दलायी करवा कर भी अधिक आमदनी प्रात की जा सकती है जो आमदनी के इस मामूली अंतर को पूरा कर सकती है।

1 min read
Modern Kheti - Hindi
1st October 2021

ड्रिप (टपक) सिंचाई द्वारा रासायनिक उर्वरकों का प्रयोग

ड्रिप (टपक) या बूंद-बूंद सिंचाई, सिंचाई की एक ऐसी विधि है जिसमें पानी थोड़ी-थोड़ी मात्रा में, कम अन्तराल पर सीधा पौधों की जड़ों तक पहुंचाया जाता है। टपक सिंचाई के बढ़ते उपयोग के साथ यह जानना जरूरी हो जाता है कि कौन-कौन से रासायनिक उर्वरकों का प्रयोग किस प्रकार इस विधि द्वारा किया जाना चाहिए।

1 min read
Modern Kheti - Hindi
1st October 2021

टमाटर फसल के मुख्य कीट समस्या तथा समाधान

किसान भाईयों से निवेदन है कि सब्जियों में कीट प्रबन्धन के लिए विशेषज्ञों की सलाह लेकर ही कीटनाशकों का प्रयोग करें। टमाटर में मुख्य रूप से निम्न कीटों का आक्रमण होता है।

1 min read
Modern Kheti - Hindi
1st October 2021